Lockdown mai bhabi ki chudai

Hindi Sex Story में पढ़ें कि कोरोना लॉकडाउन में मैं और मेरी भाभी घर में अकेले रह गये. एक दिन मुझे भाभी की अधनंगी चूचियां दिख गयी तो खुद को रोक न पाया।

दोस्तो, मैं इमरान एक बार फिर से आपके लिए एक गर्मागर्म देवर बाबी सेक्स स्टोरी लेकर आया हूं.

मैं हापुड़ (यू.पी.) का रहने वाला हूं और शादीशुदा हूं मगर कोई चुदासी चूत मिल जाती है तो मैं चोदने से परहेज भी नहीं करता. मेरी उम्र 37 साल है और मेरी हाइट 5.7 फीट है.

अब मैं अपनी आज की कहानी शुरू करता हूं जो कि मेरी भाभी की चुदाई की कहानी है. मेरे भाई मुझसे दो साल बड़े हैं जिनका नाम सलमान है. उनकी बेगम का नाम समीना है जो कि मुझसे साल दो साल छोटी ही हैं.

भाभी की चुदाई की घटना बताने से पहले मैं आपको उनका परिचय दे देता हूं. उनका रंग गोरा है और देखने में काफी सुंदर हैं. आप तो जानते ही हैं कि हमारी महिलायें कितनी सुन्दर होती हैं. उसकी हाइट 5.6 फीट है.

उनके बदन में जो सबसे आकर्षित करने वाला अंग है, वो है उनकी चूचियां. उनकी मोटी मोटी चूचियां इतनी मस्त हैं कि सबकी नज़र पहले उन्हीं पर जाती है. साइज़ के बारे में आप इसी से अन्दाज़ा लगा सकते हैं कि बुर्के के अन्दर भी अलग से उभर कर दिखती हैं.

दोस्तो, मैं एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में जॉब करता हूं और मेरे भाई मुंबई में बिजनेस करते हैं. अपनी पिछली कहानियों में मैंने बताया था कि भैया के बिजनेस के चलते मैंने ही उनकी बेटी यानि कि अपनी भतीजी को कॉलेज में एडमिशन दिलाया था और उसके रूम पर उसकी चुदाई कर दी थी.

कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते मेरी जॉब से छुट्टी हो गयी थी और भाई वहीं मुम्बई में ही फंस गये थे. मेरी बीवी अपने मायके में फंस गयी थी. अब मैं घर में ही रह रहा था. हमारे घर में 3 रूम, एक किचन और एक बाथरूम है. एक रूम में भैया भाभी रहते हैं, दूसरे रूम में मैं और एक रूम में अम्मी रहती हैं.

मेरी भाभी घर में मैक्सी पहन कर रहती हैं. एक दिन मैं अपने रूम में सो रहा था और भाभी मेरे रूम की सफाई कर रही थी. अचानक से टेबल से गिलास गिरा जिसकी आवाज़ सुनकर मेरी नींद खुल गई.

आंखें मलते हुए मैंने भाभी की तरफ देखा तो वह झाड़ू लगा रही थी और उनके बूब्स आधे बाहर दिख रहे थे. भाभी की चूचियों को देखकर मेरा मन मचल गया और मैं वासना की आग में जलने लगा.

किसी तरह मैंने खुद को कंट्रोल करके रखा जब तक कि भाभी रूम से चली नहीं गयी. उनके जाने के तुरंत बाद ही मैंने लंड बाहर निकाला और हिलाने लगा. मैं तेजी से मुठ मारने लगा और फिर अंडरवियर में ही माल निकाल दिया.

फिर सुबह के 10:00 बजे चुके थे. अम्मी दवाई लेने पास के ही हॉस्पिटल चली गई थी. मैं नहाने के लिए बाथरूम की तरफ जाने लगा. जैसे ही बाथरूम के दरवाजे पर पहुंचा तो मुझे सिसकारियों जैसी आवाजें सुनाई दीं। अंदर भाभी ही हो सकती थी क्योंकि और तो घर में कोई था ही नहीं.

भाभी के मुंह से सिसकारियां सुनकर मेरा लंड खड़ा होने लगा. मैं फिर से उस पल का मजा लेने के लिए वहीं दरवाजे के बाहर खड़ा होकर मुठ मारने लगा. दो मिनट बाद अचानक से भाभी ने दरवाजा खोल दिया और मैं वहीं पर लंड को बाहर निकाल कर हाथ में लिये हुए मुठ मार रहा था.

उनकी नज़र सीधी ही मेरे लंड पर पड़ी. लंड देखते ही उनका चेहरा एकदम लाल हो गया और वह शर्मा गई और अपने रूम में भाग गई। अब मैं नहाने के लिए बाथरूम में गया और नहाकर अपने रूम में पहुंचा. वहां से मैंने बनियान और हाफ लोअर पहन लिया।

फिर मैं किचन की तरफ जाने लगा तो मैंने देखा कि भाभी काले रंग की मैक्सी पहने खड़ी होकर रोटी बना रही थी. मैं उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया. उनकी गांड की नजदीकी पाकर मेरा लंड निक्कर में ही खड़ा हो गया.

कुछ ही पल में मेरा लौड़ा तनकर भाभी की गांड पर लगने लगा. अब मुझसे कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था. घर में हम दोनों ही अकेले थे और मेरा चूत मारने का बहुत मन कर रहा था.

फिर आखिरकार मैंने एक हाथ से भाभी की गांड को दबोच लिया और दूसरे से उनकी चूची भींच दी.

वो एकदम से उछल कर घूम गयी. वो बोली- क्या कर रहे हो इमरान?
मैंने कहा- भाभी जान, दे दो न आज? प्लीज!
वो बोली- पागल हो गये हो, खुदा का खौफ खाओ, तुम्हारे भाईजान को पता लग गया तो क्या सोचेंगे?

मैंने कहा- उनको कौन बताने वाला है. बात आपके और मेरे बीच में ही रहेगी.
इतना कहकर मैंने भाभी की मैक्सी के गले में हाथ डालकर उनकी चूचियों को पकड़ लिया और भींच दिया.

वो बोली- अच्छा … अच्छा रुको … यहां किचन में कुछ नहीं करना. मैं थोड़ी देर में तुम्हारे कमरे में आती हूं. मेरा इंतजार करो.
मैं बोला- पक्का आओगी ना भाभीजान?
वो बोली- हां, पक्का आऊंगी.

मैं खुशी खुशी अपने रूम में चला गया. एक घंटे के बाद भाभी खाना लेकर मेरे रूम में आ गयी. हम दोनों ने खाना खाया और टीवी देखने लगे.

थोड़ी देर बाद भाभी मुझसे बोली- मेरी देवरानी कब आयेगी?
मैंने कहा- पता नहीं भाभी, अभी तो लॉकडाउन है.
वो बोली- तो फिर तो तुम्हें अभी बहुत दिन तक प्यासा रहना पड़ेगा.
मैं बोला- आपको भैया की याद नहीं आती है क्या रात में?

वो बोली- आती तो है, मगर वो तो मुंबई में हैं.
मैंने भाभी का हाथ अपनी निक्कर की जिप पर रखवाते हुए कहा- तो क्या हुआ, मैं तो हूं न घर में? आप मेरा अकेलापन दूर कर दो और मैं आपको खुश कर देता हूं.

इतना बोलकर मैंने अपनी निक्कर का बटन खोल दिया और भाभी के हाथ को अपने तनाव में आ चुके लंड पर रखवा दिया. उनकी गर्दन को मैंने अपनी ओर खींचा और उसको होंठों पर जोर से किस करने लगा. उसने शुरू में थोड़ा सा विरोध किया लेकिन फिर भाभी का हाथ मेरे लंड पर कस गया.

हम दोनों अब जोर जोर से एक दूसरे को किस करने लगे. मैं भाभी के ऊपर आ गया और मैक्सी के ऊपर से ही उनकी चूचियों को जोर जोर से भींचने लगा.

चूचियां भींचने से भाभी के मुंह से जोर से सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह … इमरान … आराम से दबाओ … इतने जोर से तो तुम्हारे भाईजान ने भी कभी नहीं दबाये हैं.

मैं बोला- आह्ह … रोको मत भाभी … आपकी चूचियां इतनी मस्त हैं कि मैं उनको भींच भींच कर उखाड़ ही दूंगा. सुबह जब से इनको आपकी मैक्सी में लटकते हुए देखा है तब से ही मेरा लंड मुझे परेशान किये हुए है. अब मैं और नहीं रुक सकता भाभी … आह्हह … चोद दूंगा आपको आज।

इतना बोलकर मैंने भाभी की मैक्सी को ऊपर उठा दिया और उसके कंधों से निकलवाकर उसके बदन से अलग कर दिया. भाभी ने नीचे से कुछ नहीं पहना हुआ था. वो पूरी की पूरी नंगी हो गयी और मैं उसकी चूचियों पर टूट पड़ा।

भाभी के मोटे स्तनों को पहले मैंने जोर से दबाया और फिर बारी बारी से उनको मुंह में लेकर पीने लगा. भाभी सिसकारते हुए मेरी पीठ और मेरे सिर के बालों को सहलाने लगी.

मैं भाभी के 36 इंच के बूब्स चूसने लगा. वो जोर जोर से सिसकारने लगी- आह्ह … इमरान … ऊईई … आह्ह … उफ्फ … हाए।
इतने में ही मैंने फिर से भाभी के होंठों को अपने होंठों में लॉक कर लिया और जोर से पीने लगा.

अब मैं उनके चूचों पर चूमता हुआ, पेट और नाभि से होता हुआ उनकी चूत के पास पहुंच गया. मैंने उनकी फूली हुई चूत पर एक किस कर दिया. भाभी ने एक लम्बी सी कामुक आह्ह … भरी और फिर अपनी चूचियों को अपने हाथों से ही दबाने लगा.

मैं समझ गया कि भाभी अब पूरी चुदने के मूड में हो चुकी है. मैंने भाभी की चूत को चूसना शुरू किया और भाभी फिर से सिसकारने लगी.
कुछ ही देर में भाभी मिन्नतें करने लगी- बस … अब चोद दो देवरजी … बहुत दिनों से लंड नहीं लिया है मैंने. मेरी चूत में आज अपने लंड से चोद कर मजा दे दो.

चूत पर से मुंह को अलग करके मैंने कहा- एक बार मेरे हथियार को भी टेस्ट कर लो भाभी.
वो बोली- लाओ, इसमें कौन सी बड़ी बात है, तेरे भाईजान तो बहुत चुसवाते हैं.

भाभी उठी और मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. मैं भी जैसे जन्नत की सैर पर निकल गया. वाकई में भाभी बहुत मस्त लौड़ा चूस रही थी. मैं बस आने ही वाला था कि मैंने भाभी को रोक दिया.

फिर मैंने भाभी की कमर के नीचे तकिया रखा. इससे भाभी की चूत ऊपर उठ गई. मैंने अपने लंड का टोपा भाभी की चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा.

इस झटके से मेरा लंड 4 इंच उसकी चूत में घुस गया.
भाभी जोर से चिल्लाई- उउउई … उउउई … अम्मी … मर गयी।
मैं बोला- क्या हुआ भाभी? भैया से भी तो चुदवाती हो!
वो बोली- उनका इतना लम्बा और मोटा नहीं है, वो तो आराम से डालते हैं, तूने तो जान ही निकाल दी मेरी।

मैं बोला- कुछ नहीं भाभी, दो मिनट के अंदर आपको ऐसा मजा आने लगेगा कि आप खुद ही जोर से चोदने के लिए कहोगी.
इतना बोलकर मैंने भाभी की चूत में लंड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

दो मिनट में ही भाभी का दर्द जैसे गायब ही हो गया और वो नीचे से गांड उठाने लगी. मैंने भी इशारा पाकर अपनी स्पीड तेज कर दी और धीरे धीरे पूरा आठ इंच का लंड उनकी चूत में पूरा जाने लगा. अब मैं भाभी की चूत को तेजी के साथ पेलने लगा.

कुछ ही देर में भाभी मस्त कामुक आवाजें करती हुई चुदवाने लगी- आह्ह … इमरान … और जोर से चोदो … मेरी फुद्दी को चौड़ी कर दो. आह्ह … तुम्हारा लंड तो बहुत मजा दे रहा है। ओह्ह … और जोर से … और तेज इमरान … आह्ह … मजा आ रहा है।

इस तरह से भाभी मस्त कामुक आवाजें करते हुए चुदवा रही थी और मेरा जोश भी बढ़ता जा रहा था. लगातार 15 मिनट तक मैं भाभी को उसी रफ्तार के साथ में पेलता रहा. भाभी की चूत से चिपचिपा पदार्थ भरपूर निकल रहा था जिससे कि पूरे रूम में फच-फच … फच-फच की आवाज गूंज रही थी.

अब मैंने और तेज स्पीड कर दी और भाभी दर्द से चिल्लाने लगी. मेरा लंड भाभी के अंदर इतनी जोर से ठोक रहा था कि जैसे उनके पेट में घुस रहा हो. 20 मिनट की चुदाई के बाद उसका पानी निकल गया. वो थक कर निढाल सी हो गयी.

फिर थोड़ी देर बाद मेरा भी पानी निकलने वाला था.
मैंने पूछा- भाभी कहां निकालूं अपना माल?
वो बोली- मेरी चूत में डाल दो, तुम्हारे भाई का तो 5 इंच का है जिससे मेरी चूत में खरोंच तक नहीं आती. तुमने तो मेरी चूत फाड़कर रख दी. मैं इस लौड़े का रस अपनी चूत में गिरवाना चाहती हूं.

4-5 धक्के मैंने जोर से लगाये और उसके बाद मेरा पानी उसकी चूत में निकल गया. मैं उसके ऊपर ही चूत में लंड डालकर लेट गया.

आधे घंटे बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.
मैं फिर से भाभी की चूची और गांड को दबाने लगा. फिर से चूचियों को मुंह में भरकर पीने लगा. 10 मिनट तक चूची चूसने के बाद मैंने उसको घोड़ी बनाया और उसकी गांड पर अपने लंड का टोपा रख दिया. अपने लंड पर मैंने कई बार थूका और उसकी गांड पर मलने लगा.

फिर मैंने थोड़़ा सा थूक हथेली पर लेकर उसकी गांड में उंगली से अंदर करने लगा. उसकी गांड को चिकनी करके मैंने लंड के टोपे को छेद पर टिकाया और एक धक्का जोर से मार दिया. पहले ही धक्के में लंड का टोपा भाभी की गांड में जा घुसा.

वो जोर से चिल्लाई और छूटने की कोशिश करने लगी. मगर मैंने उसको दबोच लिया और लंड का टोपा फंसाये हुए ही उसकी चूचियों को जोर से भींचने लगा. उसके कानों पर किस करने लगा. थोड़ी देर में वो नॉर्मल हो गयी और मैं धीरे धीरे उसकी गांड को चोदने लगा.

भाभी की गांड चुदाई करते हुए मुझे जो मजा आ रहा था वो भाभी की चूत चुदाई करते हुए भी नहीं मिला था. फिर मैंने एक जोर का धक्का मारा तो मेरा 4 इंच लंड उसकी गांड में अंदर बढ़ता हुआ घुस गया. मैं थोड़ी देर रुका और तीसरा धक्का मारा.

अब मेरा पूरा का पूरा लंड भाभी की गांड में था. फिर थोड़ा विराम देकर मैंने जोर से भाभी की गांड को पेलना शुरू कर दिया. वो भी कुछ ही देर में गांड चुदवाने का मजा लेने लगी.

वह भी अपनी गांड को लंड की ओर धक्का मारने लगी. 20 मिनट की चुदाई के बाद मेरा पानी निकलने लगा और मैंने अपने लंड का सारा माल उसकी गांड में भर दिया.

इतनी देर की लगातार चुदाई के बाद हम दोनों ही थक गये थे. हम बेड पर लेट गये और सो गये. फिर आधे घंटे बाद अचानक मेरी आंख खुली. मैंने देखा तो भाभी जा चुकी थी. जल्दी से उठकर मैंने भी कपड़े पहन लिये और फिर से सो गया.

इस तरह से जब तक भैया नहीं आये, तब तक मैं भाभी की चुदाई लगातार करता रहा और वो भी मौका पाते ही मेरे लंड से चुदवाने लगी थी. मैंने भाभी को बहुत पेला और भाभी भी अब भैया की बजाय मेरे लंड से चुदने की बात करने लगी थी.

किसी तरह मैंने भाभी को समझाया कि एक घर में इस तरह से भैया के रहते हुए देवर-भाभी की चुदाई ठीक नहीं है. हमें मौका देख कर ही सेक्स करना होगा. बड़ी मुश्किल से वो मानी और फिर हम सावधानी से चुदाई करने लगे.

दोस्तो, यह थी मेरी देवर बाबी सेक्स कहानी. आपको मेरी स्टोरी पसंद आई होगी. Comment karke jarur btaaye.

Anjaan pyaasi bhabi ke ghar jaakr chut chudai

मैं राजकोट शहर का रहने वाला हूँ. मेरा नाम हर्षित है. ये नाम बदला हुआ नाम है.
मेरी उम्र 23 साल की है. मेरी हाईट 5 फ़ीट 10 इच है.

मेरे लंड उस्ताद का नपातुला साइज 5 इंच का है, जो किसी भी लड़की और भाभी को संतुष्ट कर सकता है.

इसके बाद मैं सेक्सी भाभी की चुदाई कहानी के उस पात्र के बारे में बता दूँ जिसके साथ मजा किया था.
उसका नाम मनीषा था. (ये भी बदला हुआ नाम है.)

मनीषा 35 साल की एक शादीशुदा भाभी थी. उससे मेरी दोस्ती ऑनलाइन हुई थी.

उसका पति पहले से किसी बड़ी कंपनी का मालिक था और खूब कमाता था.
मनीषा भाभी का पति कई कुंवारी लड़कियों को चोदने के चक्कर में भी रहता था.

वो पिछले 6 महीने से एक प्राइवेट बैंक में मैंनेजर के पद पर कार्यरत एक लड़की को डेट कर रहा था.
उसको खुश रखने के लिए वो बहुत पैसा बर्बाद करता था.

वो अपनी पत्नी की प्यार की ललक को नहीं बुझा पाता था.

फिर मनीषा ने मुझे अपने पति की पूरी कहानी सुनाई और मुझसे आग्रह किया कि उसे मदद की जरूरत है. मैंने उसकी मदद करने के लिए उसे हां कर दी.

वैसे तो उसने ये सारी बातें उसने मुझे फ़ोन पर बताई थीं. फिर भी हमने एक दूसरे की फोटो कभी नहीं भेजी. कभी जरूरत ही नहीं पड़ी, बस प्यार से एक दूसरे से बातें करने में मशगूल रहते थे. हम दोनों इतना समझ चुके थे कि एक दूसरे के लिए हम परफेक्ट हैं.

फिर एक दिन उसने मुझसे सेक्स के बारे में पूछा, तो मैंने हामी भर दी.
मगर किधर मिलना था जब ये पूछा तो उसने कहा कि मैं तुम्हें कॉल करूंगी, तब तुम मेरे घर ही आ जाना.

उसके बेटे की रोज़ कोचिंग क्लास रहती थी और शनिवार के दिन उसकी कोचिंग का टाइम 4 घंटे का होता था.

इस तरह मनीषा ने शनिवार का दिन डिसाइड कर लिया.

मैंने भी उससे सारी तैयारियां करके रखने को कहा.
इस पर उसने झट से कमेंट मारते हुए कहा- जो आप बोलें मेरे प्यारे मित्र.

यह सुन कर मैं हंसने लगा.

फिर उसने मुझे अपने घर का पता दे दिया. उसके घर का पता राजकोट के एक अमीर इलाके का था.

आखिर वो दिन आ ही गया. हम दोनों एक दूसरे को मिलने वाले जो थे.

उसका पति दिल्ली टूर पर गया था.
और बेटे का कोचिंग का समय था. उसका बेटा दोपहर से अपने फ्रेंड के घर चला गया था.

उस दिन दोपहर को करीब डेढ़ बजे मुझे मनीषा का कॉल आया- मेरे घर आ जाओ, मैं इन्तजार कर रही हूँ.

मैं तैयार तो था ही … बस उसका फोन आते ही मैं निकल पड़ा.
करीब 2 बजकर 10 मिनट पर मैंने मनीषा के घर की डोरबेल बजाई.

उसने अन्दर से आवाज दी- अभी आती हूँ.

उसने दरवाजा खोला और मुझे देखते हुए बोली- आप हर्षित हो ना?
मैंने हां करके अपना सिर हिलाया और पूछा- आप मनीषा!

उसने मुस्कुरा कर हां में सर हिलाया और मुझे प्यार से अन्दर आने को बोला.
मैं घर के अन्दर आ गया.

उसका घर बहुत ही सुंदर सजाया हुआ घर था.

जब वो मेरे लिए पानी और चाय लेकर आयी, तो मैंने उससे उसके घर की तारीफ की.

मनीषा ने थैंक्स कहा और फिर हम बातें करने लगे.
हम दोनों ने बहुत सी बातें की.
इस दौरान हमें वक़्त का पता ही नहीं चला की आधा घंटा निकल गया.

मैंने चूंकि मनीषा को अभी ही देखा था तो मैं आपको उसकी फिगर आदि के बारे में बता देता हूँ.

उसकी हाइट करीब 5 फुट 1 इंच रही होगी और उसका रंग गोरा, मदहोश कर देने वाली नशीली आंखें, भरे हुए गोल गुलाबी गाल, प्यारे से होंठ, जिन पर एक मस्त स्माइल थी.
उसने रेड कलर की एक हॉट सी कुर्ती और नीचे ब्लैक कलर की साइन करती हुई जींस पहन रखी थी.

इसी बीच मैंने उसे प्यार से देखा और आंखों से मूक इशारा किया, तो वो मेरी तरफ को सरक आई.

मैंने मनीषा को अपने पास आते देखा, तो मैं भी देर ना करते हुए आगे को बढ़ गया.
अगले ही पल हम दोनों होंठों से होंठों को मिलाते हुए किस करने लगे.

वो बहुत अच्छा किस कर रही थी. उसके किस करने के तरीके को देख कर कोई भी नहीं कह सकता था कि ये सेक्स की भूखी है.

एक बार एक पल के लिए हमारे होंठ अलग हुए हम दोनों ने एक दूसरे की आंखों में देखा और फिर से हमारे होंठ जुड़ गए.

इस बार हम दोनों ने लगातार 15-20 मिनट तक किसिंग की.
हमारे चुम्बन से हम दोनों की शारीरिक भूख जाग गई थी और अब हम दोनों सेक्स के लिए पागल हुए जा रहे थे.

हमारा चुम्बन टूटा, तो मैंने उसे अपनी बांहों में खींच लिया और उससे बोला- चलो बेडरूम में चलते हैं.

उसने मेरी आंखों में कामुक निगाहों से देखा और बेडरूम की तरफ इशारा करते हुए कहा- चलो.

वो आगे चल रही थी, पीछे से उसकी गांड बड़ी मस्त हिल रही थी.
कुछ ही पलों बाद हम दोनों बेडरूम में थे.

उसे मैंने गोद में उठा लिया और पलंग पर लेटा कर उस पर चढ़ गया.
मैं फिर से मनीषा को किस करने लगा.

इस बार मैं उसके होंठ, गाल, गर्दन, सभी जगह किस करने लगा.
इससे वो ज़ोर-जोर से कामुक सिसकारियां ले रही थी और मेरे बालों में उंगलियां फेर रही थीं.

मैं ऊपर चूमने के बाद उसके नीचे आ गया और मैंने उसके दोनों पैर अपने हाथों में ले लिए.
उसकी जांघों को जींस के ऊपर से ही किस करने लगा था.
उसके साथ किसी ने कभी भी ऐसे नहीं किया था.
वो एकदम नशे जैसी हालात में लगने लगी थी.

मैं फिर से धीरे से ऊपर बढ़ा और उसकी कुर्ती को ऊपर करता हुआ, उसके पेट पर चुम्बनों की बारिश करने लगा.

मेरे हर एक किस से वो और भी जोर से सिसकारियां लेने लगी.
उसकी आवाजों से मैं भी उत्तेजित होता जा रहा था.

मैं पेट से ऊपर बढ़ता हुआ उसकी ब्रा तक पहुंच गया.
उसने अन्दर ब्लैक कलर की ब्रा पहनी थी.

मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मों को दबाने लगा.
वो और भी ज्यादा कामुक होने लगी.

फिर मैंने उसकी कुर्ती और ब्रा को एक साथ निकाल दिया.

अब मुझे उसकी चूत देखने के जल्दी थी. इसलिए मैं उसकी जींस के ऊपर से ही उसकी चूत को मसलने लगा.

उसने मुझे इशारा किया तो मैंने उसकी जींस को नीचे खींच कर घुटनों पर कर दिया.

सामने उसकी काले रंग की जालीदार पैंटी को देखा, तो उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसमें से चुत का रस बह रहा था.

मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही चूत पर किस किया और ज़ोर से अपने मुँह को उसकी चूत की दरार में चिपका दिया.
इससे उसकी बहुत ज़ोर की सिसकारी निकल गई.

मैंने मन में सोचा कि इसका पैंटी के ऊपर से ही ये हाल है, तो अन्दर से तो ये फूट पड़ेगी.

फिर मैंने उसकी गांड पकड़ कर उठाया और उसकी चिकनी चमचमाती हुई चूत को पैंटी की कैद से आज़ाद कर दिया. उसकी पैंटी घुटनों पर थी.
उसकी चूत काफी दिनों से चुदी नहीं थी.

चूत बिल्कुल चिकनी और सफ़ेद थी.
उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, वो चुदाई की पूरी तैयारी करके बैठी थी.

मैं फिर से उसकी चूत की तरफ बढ़ा और उसकी चूत में अपनी जीभ डाल दी.

उसकी चूत मानो एक गर्म चोको लावा केक जैसा अनुभव करा रही थी. मेरी जीभ उसकी चूत के हर हिस्से को चाट रही थी.

थोड़ी ही देर में मैंने उसकी चूत चाटने की अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसकी चूत का रसपान करने के लिए तैयार हो गया.

उसकी कामुक सिसकारियां और तेज होती जा रही थीं.
जल्दी ही वो झड़ने वाली थी.

मैंने अपनी स्पीड थोड़ी और बढ़ाकर उसकी चूत को तेजी से चाटने लगा.
तभी उस सेक्सी भाभी ने एक बहुत ज़ोर की सिसकी ली और ‘आह आह अम्म्म अआह ..’ करते हुए अपनी चूत के पानी का फ़व्वारा मेरे मुँह पर दे मारा.

मेरा पूरा चेहरा और मुँह उसके चूत के रस से भर गया था.
फिर मैं उसे पी गया.

उसकी चूत से अब भी पानी निकल रहा था, जिसे मैंने फिर से चाटना शुरू कर दिया.

मैंने उसकी चूत को चाट चाट कर फिर से चिकनी और चुदासी कर दी.

अब वो उठी और बोलने लगी- अब बहुत हो गया, तुम जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड घुसा दो. मुझसे अब नहीं रहा जा रहा है.
मैंने कहा- मेरा मन 69 का है.
वो हंस दी और बोली- ओके मैं भी रेडी हूँ.

अब मैंने उसकी जींस और पैंटी पूरी निकाल दी और उसको किस करते करते उसके मम्मों के साथ खेलने लगा.

उसके चूचे बहुत कोमल थे. मैं उसके रसीले मम्मों को चूसने और दबाने लगा.

बहुत देर तक उसके दूध चूसने और मसलने के बाद मैंने उससे कहा कि वो बेड के कोने पर आ जाए. वो झट से मान गयी और बेड के कोने पर आ गयी.

मैं उसकी चूत फिर से चाटने लगा. तभी उसने उठ कर मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मेरा लंड झट अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. वह लंड चुसाई का आनन्द मेरे जीवन की सबसे मस्त फीलिंग थी. वो इतना अच्छा लंड चूसती थी कि मुझे अपना लंड उसके मुँह से निकालने का मन ही नहीं कर रहा था.

अब मैं उसका सर पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से उसके मुँह को चोदने लगा. वो बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी.

तभी मेरा होने वाला था, तो मैंने उसको बोला- मेरा निकलने वाला है.

उसने लंड चूसने की स्पीड बढ़ा दी और एक मिनट बाद मेरा सारा माल वो पी गई.

मैं निढाल होकर उसके बाजू में लेट गया और उसे किस करने लगा.

कुछ मिनट बाद वो पोजीशन लेकर फिर से मेरा लंड चूसने लगी और उसने लंड को खड़ा कर दिया.

इसके बाद मैंने उसे पलंग के कोने पर लिटाया और उसके चूतड़ों के नीचे एक तकिया रख कर चुदाई की पोजीशन सही कर ली.
मैंने उसकी चूत पर मेरा लंड सैट किया और ज़ोर लगा दिया.

पहली बार में ही मेरा आधा लंड चुत के अन्दर घुसता चला गया.
इस अचानक हुए हमले से सेक्सी भाभी की तेज चीख निकल पड़ी.

फिर मैंने धीरे-धीरे 4-5 धक्के मारे, जिससे मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर-बाहर होने लगा. उसकी चूत बहुत दिनों से नहीं चुदी थी, इसलिए बहुत टाइट थी.

अब वो मेरे लंड को पूरी तरह से एन्जॉय कर रही थी और लगातार उसके मुँह से ‘आह आह अम्म्म ..’ की आवाज़ आ रही थी.
पूरे कमरे में मेरे लंड के उसके चूत में जाने की आवाज़ गूंज रही थी.

मैं उसे धकापेल चोदे जा रहा था. बीच-बीच में मैं अपनी स्पीड कम कर देता था ताकि चोदने का मज़ा और बढ़ जाए.
दस मिनट बाद मनीषा ने मुझसे कहा कि मैं झड़ने वाली हूँ.

मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और वो ज़ोर से चीखते हुए मुझसे लिपट कर मुझ पर चढ़ गयी और कंपकंपाते हुए मेरे लंड के ऊपर अपना रस छोड़ने लगी.

उसकी चूत के रस में मेरा तना हुआ लंड पूरा भीग गया था और मेरी जांघों पर बहने लगा था.

मेरा लंड अभी झड़ा नहीं था और पूरी औकात में उसकी चूत को फाड़ते हुए आगे-पीछे हो रहा था.

फिर वो मुझसे अलग हो गई.
तो मैंने उसे बताया कि मैं अभी झड़ा नहीं हूँ और अभी और चोदना चाहता हूँ.

वो बहुत खुश हुई और बोली- चोद दो जानू … लेकिन पोजीशन बदल लेते हैं.

फिर मैंने उससे उसकी फ़ेवरिट पोजीशन पूछी, तो उसने मुझे कहा कि वो घुड़सवारी करते हुए चुदना चाहती है.

तो मैं लेट गया और उसे अपने लंड के ऊपर आने को कहा.
सेक्सी भाभी मेरे ऊपर आ गयी और मेरा खड़ा लंड चूसने लगी.
मेरा लंड उसके मुख के रस से सन गया.

वो अब मेरे लंड की सवारी करने को तैयार थी. वो मेरे लंड पर चढ़ गयी और मेरे लंड को अपनी चूत की दरार में एडजस्ट करते हुए मेरे तने लंड को अपनी चूत में घुसा लिया.

एक आह के साथ मनीषा ने लंड को चुत में खा लिया था. वो गांड उछालते हुए चुदाई का मजा लेने लगी.

मैं उसकी गोरी चूत को अपने लंड के ऊपर नीचे होते हुए देख रहा था.

वो अपना मुँह ऊपर की ओर करके मुझसे चुदने का आनन्द ले रही थी और मैं उसके बड़े मम्मों को मस्ती से हवा में उछलते हुए देख रहा था. मैं मनीषा के मम्मों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया.

उसके स्तनों के चूचुक मेरे हाथों में आ गए थे और मेरा लंड उसकी चूत में था.

वो मेरे लंड पर ऊपर-नीचे होते हुए चिल्लाते हुई बोली- मैं फिर से झड़ने वाली हूँ.
मैंने भी बोला- हां जान मेरा भी होने वाला है, कहां निकालूं?

उसे अचानक कुछ याद आया और वो रुक गयी.
सेक्सी भाभी लंड से हट कर मेरे नीचे आ गई और बोली- जोर से मुझे चोदो, मेरा भी निकाल दो और अपना अमृत मेरी चूत में ही गिरा दो.

मैंने उसका मन समझ लिया था और उसी चुत में ही झड़ने का मन बना कर उसके ऊपर आकर उसे ताबड़तोड़ चोदने लगा.

दो मिनट बाद वो झड़ गई और मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.

उसके झड़ने के बाद मैंने करीब 10 से 15 धक्के और मारे और मैं ‘आ आह आ आह आह हम्म आह ..’ करते हुए झड़ गया.
उसके कहे अनुसार मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में भर दिया और हमारे रस की बाढ़ उसकी चूत से बहने लगी.

फिर वहां से उठकर हम दोनों साथ में बाथरूम में चले गए और एक दूसरे को नहलाने लगे.

उसी वक्त उसने मेरा लंड पकड़कर फिर से चूसना शुरू कर दिया.

करीब पांच मिनट तक लंड चूसने के बाद मैंने उसे रोक दिया दिया और नहाकर बाहर निकल आए.

उसके बाद हम दोनों ने नाश्ता किया.
वो हम दोनों के लिए काजू बादाम वाला केसर का दूध दो बड़े मग में लेकर आई.
हमने नाश्ता खत्म किया और मैंने निकलने की बात की.

वो मेरे पास आई और मुझे हग करके किस करने लगी.
तभी मैंने उसकी गांड पर एक जोर से थप्पड़ मारते हुए कहा- अब इसका नम्बर है.
वो हंस कर बोली- इसको तो छोड़ दो.

मैंने कहा- नहीं मुझे तुम्हारी गांड मारनी ही है.
उसने मुझसे कहा- ओके फिर कभी आ जाना और इसके साथ मजे कर लेना. अभी मेरे बेटे को आने का टाइम हो गया है.

मैंने उसे किस किया और बाय बाय कह कर निकल गया.

आपको मेरी सच्ची सेक्सी भाभी की चुदाई कहानी कैसी लगी?Comment karke jrur btana.

Mai uncle or unke dosto se chud gyi… Part-2

कॉलेज की लड़की की इंडियन चुदाई का मजा लें. मुझे अंकल ने चोदा ऑफिस में लेजाकर. वहां उनके कुछ दोस्त भी थे. इतने लोगों के सामने मेरी नंगी चुदाई की कहानी पढ़ें.

हैलो! मैं कॉलेज की लड़की सुमीना, अपने पड़ोसी अंकल के साथ उनके ऑफिस में अपनी इंडियन चुदाई की बेकरारी में मर्दों की गोद में खेल रही थी.

इसकी डिटेल जानने के लिए इस इंडियन चुदाई कहानी का पिछला भाग
Mai uncle or unke dosto se chud gyi… Part-1
जरूर पढ़ें.

अब आगे पढ़ें कि कैसे मुझे अंकल ने चोदा:

अंकल ने कहा- सुमीना, तुम बहुत भारी हो, एक काम करो तुम टेबल पर लेट जाओ.

मेरी कहां चल रही थी, सबने मुझे टेबल पर लिटा दिया. एक व्यंजन की तरह मैं सबके सामने परोसी हुई थी.

शायद एक ने मेरे दिल की आवाज सुन ली और अंकल से कहा- सुमीना, तो केक की तरह लग रही है. जी कर रहा है कि सब मिल कर चख लें.
अंकल ने कहा- तो मैं मना कर रहा हूं क्या, चख लो.

सबको शायद इसी का इंतजार था. वो लोग टूट पड़े. कोई मेरे स्तनों को मसल रहा था, कोई निप्पल चूस रहा था, कोई मेरी जांघों से खेल रहा था. हर कोई मेरे अंग अंग को चूम रहे थे. एक एक करके सब मेरे होंठों को चूम चूस रहे थे.

सबने मुझे चखा और अलग हट गए.

अंकल ने मेरी चूत को चूसा तो मैं एकदम से गरमा गई.

मैंने अंकल की तरफ देखा, जो अपने कपड़े उतार रहे थे.

एक ने पूछा- क्या कर रहे हो?
अंकल ने कहा- चूत चख कर भूख बढ़ गई है. अब तो पेट भरना पड़ेगा.

अंकल अपने कपड़े उतार कर टेबल कर आ गए और मेरी जांघों को फैला कर अपना लंड मेरी चूत पर सटा दिया. फिर दबाव देकर लंड चूत के अन्दर ढकेलने लगे. मेरी चूत से पानी आ रहा था इसलिए लंड आसानी से अन्दर चला गया.

अंकल ने मुझे बांहों में समेटा और मेरे गालों और गले को हल्के से चूमते हुए बोले- सुमीना रानी, हम तो तुम्हें अनछुई कली समझ रहे थे, पर तुम तो पहले भी लंड खा चुकी हो.

मैंने कुछ नहीं कहा. उनकी बात सच थी. मैंने ऊपर लिखा भी है कि इससे पहले भी तीन लोग मेरी जवानी का मजा चख चुके थे. मेरी चूत की सील मेरे कॉलेज के छात्र संघ के अध्यक्ष, जो अभी अंतिम वर्ष में था, ने तोड़ी थी.
हालांकि उसमें पूरी तरह से मेरी मर्जी भी नहीं थी. उसने मुझे मेरे बायफ्रेंड के साथ कैमिस्ट्री लैब में पकड़ लिया था. बायफ्रेंड डरपोक निकला.. तो वो मुझे छोड़ कर भाग गया. पर छात्र संघ के अध्यक्ष ने मुझे धमका करके मेरी चूत की सील तोड़ दी.

उसके बाद दो महीने तक उसने मेरे जिस्म का खूब मजा लिया और तीन बार उसने मुझे अपने दो दोस्तों को भी परोस दिया.

खैर वो अलग कहानी है. अभी मुद्दा कुछ और है.

अंकल धीरे धीरे मेरी चूत में लंड के धक्के लगाने लगे थे. मुझे भी मेरी इंडियन चुदाई का मजा आने लगा था. वो बीच बीच में रूक कर मेरे स्तनों को मसल देते, या मेरे निप्पल चूस लेते या मेरे होंठों को चूसने लगते.

अंकल को थोड़ा उम्र का तकाजा था, सो वे पांच मिनट में ही मेरी चूत में पानी छोड़ कर खड़े हो गए.

उनके खड़े होते ही दूसरा कपड़े उतार कर मेरे ऊपर आ गया और मेरी चूत में अपना लंड डाल कर धक्के लगाने लगा. उम्र में ये भी अंकल के बराबर ही था इसलिए इसने भी पांच मिनट में ही मेरी चूत में पानी छोड़ दिया और खड़ा हो गया.

इसके बाद तीसरे ने मेरे ऊपर आकर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया और धक्के लगाने लगा. इसकी ताकत भी अच्छी थी और लंड में दम भी काफी था. हर एक धक्के पर लगता था कि वो मेरी चूत के सबसे निचली सतह को छू गया.

उसे चूत में पानी छोड़ने में काफी टाईम लग रहा था और इसी वजह से चौथा बेसब्र हो रहा था. उसने अपना लंड मेरे हाथ में पकड़ा दिया और मुझे हस्तमैथुन करने को कहने लगा.

मैं उसके लंड को अपने हथेली से मसलने और सहलाने लगी. जो आदमी मेरी चूत में अपने लंड से धक्के लगा रहा था, अब उसने मेरी चूत में पानी छोड़ दिया था और साथ ही चौथे ने भी पानी छोड़ दिया था. उनके बाद पांचवां मेरे ऊपर चढ़ गया उसने भी मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया और धक्के लगाने लगा. वो भी पांच मिनट में ही मेरी चूत में पानी छोड़ कर खड़ा हो गया.

अब सब अपना अपना अंडरवियर पहनने लगे, तभी चपरासी दौड़ते हुए अन्दर आया और उसने अंकल के कान में कुछ बोला.

उसकी बात सुनकर सब सकते में आ गए. अंकल मेरे पास आए और हड़बड़ाते हुए मुझे उठाकर मुझे बाथरूम के पास ले गए.

वे मुझसे बोले- सुमीना, जल्दी से बाथरूम में छुप जाओ, बड़े साहब आ रहे हैं. तुमको इस हालत में देख लेंगे तो पुलिस बुला लेंगे.

पुलिस के नाम से मुझे भी थोड़ा डर लगा. उन्होंने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया, दरवाजा खुला और दो लड़के बाहर झांकने लगे.

अंकल ने जल्दी से कहा- इसे अन्दर ले लो.

दोनों ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोले- अन्दर ले तो लें, पर कुछ नहीं करेंगे. इसकी गारंटी नहीं ले सकते.
अंकल झल्ला कर बोले- जो करना है करो, बस इसको अन्दर ले लो.

दोनों ने एक एक हाथ से मेरे स्तनों को पकड़ा और मुझे अन्दर खींचने लगे. मेरे अन्दर पहुंचते ही दोनों ने दरवाजा बंद कर लिया.

वे दोनों नंगे थे, दोनों ने मुझे नहलाया और मेरी चूत में उंगली डाल कर साफ किया.

उसके बाद उनमें से एक ने मुझे दीवार पर सटाया और मेरी जांघें फैला कर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया.

वो धीरे धीरे धक्के लगाने लगा, दूसरा मेरे स्तनों से खेल रहा था. धीरे धीरे उसके धक्के तेज होते गए और पन्द्रह मिनट बाद वो मेरी चूत में पानी छोड़ने लगा.

उसके अलग होते ही दूसरे ने मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया. उसे भी चूत में पानी छोड़ने में पन्द्रह मिनट लगे.

तब दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और जाने लगे.

उनमें से एक ने कहा- रानी तुम्हें नहलाना जरूरी था, हमें चुदी चूत और रौंदे हुए फूल पसंद नहीं हैं.
मैंने पूछा- तुमको कैसे पता चला कि मैं चुदी हुई थी?

तो उसने मुझे दरवाजे में कान लगा कर सुनने को कहा.

मैंने दरवाजे से कान लगा दिया. उधर बातें चल रही थीं.

एक भारी आवाज ने कहा- मेरे लिए माल का इन्तजाम किया?
एक आवाज आई- जनाब, माल बाथरूम में नहा धोकर तैयार है.
उसी भारी आवाज ने कहा- मुझे कॉलेज की कड़क लौंडिया चोदना पसंद है.
एक और आवाज आई- ये कॉलेज की माल ही है.

उसी भारी आवाज ने फिर कहा- अगर मेरे स्पेशल फरमाईश पर ना नुकर करेगी तो!
अंकल की आवाज आई- पुलिस बुला कर साली को उसके हवाले कर देंगे और वेश्यावृत्ति का केस लगवा देंगे. जब रात भर लाकअप में बीस बाईस पुलिस वाले मनमानी इंडियन चुदाई करेंगे, तो पता चलेगा साली को.

ये सुनकर मेरी तो हड्डियों तक में सिहरन हो गई.

उसी भारी आवाज ने कहा- दरवाजा खुलवाओ.

दो पल बाद अंकल दरवाजा खटखटा रहे थे. मैं सोच रही थी कि क्या करूं, तभी पीछे वाला दरवाजा खुला और जिसने मुझे नहलाया था, वो अन्दर आ गया. उसने बाथरूम का दरवाजा खोला और वापस उसी दरवाजे से बाहर चला गया. आवाज से पता चल गया कि बाहर से दरवाजा लगा दिया गया.

अंकल ने इधर का दरवाजा खोला और मुझसे कहा- साहब आ रहे है अन्दर, ठीक से खुश करना. वरना …

आगे अधूरा छोड़ कर वो बाहर निकल गए. अगले ही पल एक कसरती बदन का जवान मर्द, नंगे बदन अन्दर घुसा, उसका लंड काफी मोटा और लम्बा था. अन्दर आकर उसने दरवाजा बंद कर दिया.

उसने एक क्रीम की ट्यूब उठाई और अपने लंड पर लगाने लगा. जब लगा चुका, तो उसने मुझे पीछे घूम जाने को कहा. मुझमें न कहने की तो हिम्मत ही नहीं थी सो पीछे घूम गई. उसने मुझे झुकने को कहा. मैं झुक गई.

अचानक मुझे महसूस हुआ कि वो मेरी गांड के छेद पर अपना लंड सटा रहा है. इस तरह से पहले कभी चुदाई नहीं की थी. पर विरोध करने की हिम्मत नहीं थी. उसने अपने पेट और छाती का भार मेरी पीठ पर डाल दिया और मेरी बांह के नीचे से हाथ लाकर मेरे स्तनों को थाम लिया.

अचानक उसने एक तेज झटका दिया और पूरा लंड मेरी गांड फाड़ते हुए अन्दर घुस गया. न चाहते हुए भी एक तेज चीख मेरे मुँह से निकल गई. मैंने कस कर अपनी हथेली से मुह बंद कर लिया ताकि बाहर कोई आवाज न सुन ले.

वो मेरे स्तनों को मसलता रहा और मेरे गले के पास चूमता रहा.

जब मैं थोड़ा शांत हुई, तो उसने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिया. गांड में लंड लेने में मुझे अभ्यस्त होने में पांच मिनट लगा.

और फिर उसके धक्कों की गति बढ़ती गई. दस मिनट तक लगातार गांड में लंड धक्के लगाता रहा. पर उसका लंड ज्यों का त्यों कड़क गांड में पिस्टन सा चल रहा था.

अचानक उसने लंड बाहर खींच लिया. मैंने पलट कर देखा.
तो उसने मुझे फर्श पर लेटने को कहा.
मैं लेट गई.

उसने मेरी जांघें फैला कर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया और धक्के लगाने लगा. बीच बीच में रूकता और मेरे स्तनों के निचले हिस्से पर काट लेता, मेरे निप्पल को काट लेता या मेरे होंठों पर दांत गड़ा देता. उसके बाद फिर धक्के लगाने लगता.

पूरे पन्द्रह मिनट बाद उसने मेरी चूत में पानी छोड़ दिया और दरवाजा खोल कर बाहर निकल गया.

बाहर निकल कर उसने कहा- मजा आ गया, चलो अब मैं चलता हूँ. साली छिनाल की गांड की सील अभी टूटी है. देख लेना. इसको कुछ खून वून आ रहा हो, मरहम पट्टी कर देना.

इसके बाद आवाजें आना बंद हो गईं. दो मिनट के बाद चपरासी मेरे कपड़ों के साथ आया और कपड़ों को साईड में रख कर उसने मुझे उलटा किया. मेरी गांड के छेद कर उसने बर्फ का एक टुकड़ा रखा और सिकाई करने लगा.

मैंने सारा खेल समझ लिया था. इसलिए उस चपरासी से सीधे पूछा- जूस गलती से गिरा था या जानबूझ कर गिराया था.
उसने कहा- जानबूझ कर.
मैंने पूछा- चक्कर क्या था?

उसने बताया कि तेरे ये अंकल और बाकी लोग अक्सर कॉलेज की लड़कियों को, जो आस पास रहती हैं.. उनको लेकर आते हैं. किसी न किसी तरीके से कपड़े उतवा कर ऐसे हालात बनाते है कि वो मजबूरी में सबके साथ ये सब बिना विरोध करे. फिर वे लड़की को अपने तीन साहबों में से किसी एक को या तीनों को उस लड़की को परोस देते हैं.

मैंने पूछा- क्या एक लड़की एक बार से ज्यादा भी आती है?
उसने कहा- ऐसा कभी कभी ही होता है. अक्सर नई लड़कियां ही आती हैं, कोई बहुत जबरदस्त माल हो, तो तीन चार बार आ जाती है. पर दूसरी बार बहाना नहीं करना पड़ता. सीधे चुदाई होती है.
मैंने कहा कि दूसरी बार कौन आने को तैयार होती होगी?
उसने बताया कि बाथरूम में गुप्त कैमरा लगा है और कहीं रिकार्डिंग चल रही होती है.

इस बात से मुझे खुद पसीना आ गया. चपरासी ने कहा- आपका बदन देख कर लगता है कि आपके दो तीन चक्कर और लगेंगे.
मैंने पूछा- जब कोई लड़की नहीं मिलती तब?
उसने कहा- ऐसा होता तो नहीं है. पर ऐसा होने पर ये अपनी पत्नियों को ले आते हैं.

मैंने पूछा कि कोई कॉन्डम तो इस्तेमाल कर ही नहीं रहा था, किसी को गर्भ ठहर गया तो?
उसने बताया कि जूस में गर्भ न ठहरने की दवा मिली होती है. साथ ही एक साथ कई लंड झेलने की दवा भी मिली रहती है.

सिकाई करके उसने मुझे उलटा किया और मेरी जांघें फैला कर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया. वो धक्के लगाने लगा और पांच मिनट में मेरी चूत गीली करके उठ गया.

उसने मुझे नहलाया और कपड़े पहनाए.

मैं बाहर निकली, तो अंकल बैठे थे. मैं उनके साथ बाहर आई और उन्होंने मुझे बाईक से घर पहुंचा दिया.

जब मैं घर के अन्दर जाने लगी, तो वो बोले- सुमीना, किसी से कुछ मत कहना. और अगली बार बुलाऊं तो चुपचाप घर में बहाना बना कर आ जाना. नहीं तो वीडियो गलत हाथ में भी जा सकता है.

मैंने सर हिलाया तो वो बोले- मैं तुम्हें दो तीन बार और ले जाऊंगा. उससे ज्यादा परेशान नहीं करूंगा, उसके बाद मेरा मन भर जाएगा. तुम चलना और कपड़े उतार कर मेरे रूम में बैठ जाना, जितने लोग आएं, उनकी प्यास बुझा देना बस.

मैंने सर हिलाया तो अंकल ने बाईक आगे बढ़ा दी.

इस तरह मुझे अंकल ने चोदा ऑफिस में. आगे क्या हुआ फिर कभी लिखूंगी.

यद्यपि ये इंडियन चुदाई कहानी एक प्रताड़ना जैसी है मगर मेरे लिए ये एक सुखद अनुभव था, जिसने मेरी फंतासी को पूरा किया था कि एक ही दिन में मुझे कई लोग चोदें.

हालांकि गांड मारे जाने से मुझे दर्द हुआ था मगर मेरी फंतासी में तो एक साथ सैंडविच सेक्स का भी समावेश था. जिसमें तो एक साथ गांड और चूत दोनों मेंही लंड चुदाई करता है.

अगली बार शायद मैं खुद ही ये कोशिश करूंगी कि उन लोगों के साथ एक साथ दो लंड का मजा लेते हुए सैंडविच सेक्स भी करवा लूं.

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Part 1 – Mai uncle or unke dosto se chud gyi… Part-1

Mai uncle or unke dosto se chud gyi… Part-1

मेरी गंदी कहानी में पढ़ें कि मेरा मन था किसी अनजान लंड से चुदने का. पड़ोसी अंकल मुझे अपने ऑफिस ले गए. वहां वे मुझे नंगी करके कैसे मेरे जिस्म से खेले?

कॉलेज की छात्रा सुमीना की चुदाई की गंदी कहानी आपके सामने रख रहा हूँ. मजा लीजिएगा.

मेरा नाम सुमीना है. मेरी गंदी कहानी का मजा लें.

एकदम गोरा रंग, छरहरा बदन, तीखे नयन नक्श, गुलाबी होंठ, कसे हुए उभार, बेदाग बदन ये मेरी काया है. मेरी उम्र बीस साल है और मैं कॉलेज के सेकंड ईयर में हूं.

मुझे चुदाई का बड़ा शौक है. हालांकि अब तक मेरी चूत में सिर्फ तीन ही लंड घुसे हैं. जिसमें से एक लंड ने मेरी चूत को कई बार चोदा है.

मेरी रंगीन सोच ये रही है कि कोई बिना जाने … तबियत से चोदे और मजा दे.
सेक्स को लेकर मेरे मन में तो बहुत सी फंतासियां हैं … पर अभी जवानी शुरू हुई है … आगे हो सकता है कि मेरी सारी इच्छाएं पूरी होती चली जाएं.

फ्रेंड्स, मुझे गाड़ी चलाना नहीं आता.
ऐसा नहीं है कि मुझे मेरे पापा ने सिखाने की कोशिश नहीं की. पर मैं सीख ही नहीं पाई. इसलिए हर एक काम के लिए अगर कहीं भी जाना होता है, तो मुझे किसी के साथ ही जाना पड़ता है. ज्यादातर पापा ही जाते हैं और कभी कभी पापा के कोई फ्रेंड मेरे साथ चले जाते हैं.

हमारे पड़ोस में एक महीने पहले ही एक फैमिली किराए से रहने आई थी. इस फैमिली में मियां बीवी बस थे.

उनका हमारे घर आना जाना होने लगा. अंकल का नेचर इतना अच्छा था कि मेरे पापा उन्हें अपने भाई से ज्यादा मानने लगे.
पर मुझे ये थोड़ा ठीक नहीं लगता था कि इतना जल्दी किसी पर इतना भरोसा कर लिया जाए. क्योंकि एक दो बार मैंने अंकल की नजरों को अपनी मदमस्त जवान चूचियों को घूरते हुए पकड़ा था.

मगर मुझे अच्छा लगा था इसलिए मैं कुछ नहीं कहा.

खैर उस दिन मुझे कॉलेज में काम था. असल में मैं बहुत दिनों से कॉलेज नहीं जा पाई थी, मुझे कुछ नोट्स लेने थे. उसी दिन मेरी फैमिली को शादी का फंक्शन अटेन्ड करने बाहर जाना था. हालांकि मेरे पापा ने मुझसे कहा भी कि कल चली जाना, पर पता नहीं क्यों, मैं उसी दिन जाने की जिद कर रही थी.

असल में मेरी एक सहेली थी, जिससे मुझे मिलने का मन था. उसके साथ मुझे लेस्बियन सेक्स करने की आदत थी. हम दोनों एक दूसरी की चूत में कुछ कुछ करके मजा ले लेते बठे.

उससे मिलने के लिए कॉलेज जाना था और साथ में जाने वाला कोई नहीं था, इसलिए मैं थोड़ा सोच में पड़ी थी कि कैसे जा पाऊंगी.

उसी समय पड़ोस वाले अंकल आ गए.
उन्होंने पापा से पूछा कि क्या हुआ … कोई परेशानी है क्या?
पापा ने उन्हें बताया- हां यार सुमीना को कॉलेज छोड़ने जाना है … और मुझे शादी का फंक्शन अटेन्ड करने बाहर जाना है.

अंकल ने पेशकश की कि वो मुझे कॉलेज छोड़ देंगे.
पापा ने कहा- सवाल छोड़ने जाने का नहीं है … वापस लाने का भी है.

अंकल ने कॉलेज छूटने का टाईम पूछा, तो मैंने बताया कि 12 से 4 तक कॉलेज टाईम होता है.

अंकल ने मुझसे कहा- मेरा ऑफिस का टाईम दस से चार होता है … दस बीस मिनट का फर्क पड़ेगा, उसे तुम मैनेज कर लेना.
मैंने हां कह दिया तो अंकल ने कहा ठीक है … तुम मेरे साथ चलो और मेरे साथ ही वापस आ जाना.
मैंने कहा कि मगर अंकल मैं दो घंटे पहले जाकर क्या करूंगी.
अंकल बोले कि तुम दो घण्टे मेरे ऑफिस में रूक जाना. तुम्हारे कॉलेज के बगल में ही तो मेरा ऑफिस है.

पापा को ये बात जंच गई और मेरे ना नुकुर करने के बावजूद मुझे जबरदस्ती तैयार करवा कर अंकल के साथ में भेज दिया.

अंकल की उम्र 40 से 42 के बीच रही होगी. वो ट्रेफिक ऑफिस में काम करते थे. पापा को भी अपने ट्रांसपोर्ट बिजनेस के कारण वहां बहुत काम पड़ता था. अंकल के कारण दिनों का काम मिनटों में हो जाता था.

मैंने एक अच्छा सा सलवार सूट पहना और उनके साथ बाईक पर बैठ कर पौने नौ पर कॉलेज को निकल गई. दस बजे तक हम उनके ऑफिस पहुंच गए.

वो मुझे लेकर अन्दर गए और गलियारे से होते हुए एक रूम में घुस गए. वहां उनके ही उम्र के दो लोग बैठे थे, जिनसे उन्होंने मुझे मिलवाया. वहां सिर्फ कॉलेज की तरह लोहे वाली एक टेबल रखी थी और पांच कुर्सियां रखी थीं. जिन पर हम बैठ गए.

अंकल ने चपरासी को बुलाया और चाय लाने को कहा.
मैंने अंकल से कहा कि मैं चाय नहीं पीती.
तो उन्होंने चपरासी से सबके लिए जूस लाने को कहा.

चपरासी चला गया और थोड़ी देर में जूस लेकर आ गया. वो एक जग में जूस और गिलास लेकर आया था. उसने सारा सामान टेबल पर रख दिया.

सब जग उठा कर अपना अपना गिलास भरने लगे. जब मेरी बारी आई और मैंने जग उठाया, तो जग बहुत भारी लगा. मुझसे जग उठा कर गिलास में जूस डालते नहीं बन रहा था, तो थोड़ा सा टेबल क्लाथ पर गिर गया.

मैंने जग वापस रख दिया.

अंकल ने गिलास मेरे हाथ में पकड़ा दिया और टेबल क्लाथ समेटने लगे.

उन्होंने चपरासी से चिल्ला कर कहा- आराम से खड़ा है हरामखोर, गिलास में जूसतेरा बाप डालेगा?

चपरासी हड़बड़ा कर आया और जग उठा कर मेरी तरफ बढ़ा. जितनी हड़बड़ाते हुए वो आया था उससे कुछ न कुछ गलती होने का अंदेशा था. सो गलती हो ही गई. चपरासी ने हड़बड़ी में सारा जूस मेरे ऊपर ही गिरा दिया. मैं जूस से तरबतर हो गई.

अंकल खड़े हुए और उन्होंने चपरासी को खींच कर एक झापड़ मार दिया. चपरासी गाल सहलाता हुआ बाहर निकल गया. मैंने अपने कपड़ों की तरफ देखा, तो अंकल ने कहा- सुमीना, यहां अटैच बाथरूम है, तुम वहां नहा लो.

मैं बिना कुछ बोले बाथरूम में चली गई.

बाथरूम में घुस कर मैंने दरवाजा बंद कर लिया, पलट कर देखा तो एक और दरवाजा दिखा. शायद बाथरूम दो रूम से अटैच था, पर उसमें अन्दर से कुंडी नहीं थी.

मैंने ये बात अंकल को बताई, तो वो बाहर से बोले कि उस रूम में कोई नहीं है, वो रूम बंद है.

मैंने अब अपने ऊपर गिरे जूस का अंदाजा लिया, तो पता चला कि जूस बहुत ज्यादा गिरा था और कपड़े धोना जरूरी है.

सो मैंने एक एक करके कपड़े उतारना शुरू किए … पर दिक्कत ये थी कि वहां कपड़े लटकाने के लिए कुछ भी नहीं था.

मैंने इधर उधर देखा तो पाया कि दीवार छत से नहीं जुड़ी थी और बीच में थोड़ा गैप था. सो मैं अपने कपड़े वहीं लटकाने लगी. मैंने समीज को उतारा, फिर सलवार, ब्रा और पैन्टी.

मेरी आदत है कि मैं ब्रा पैन्टी के बिना ही नहाती हूं. जैसे ही मैंने सारे कपड़े रखे मुझे लगा कि मेरे कपड़े सरक रहे हैं. जब तक मैं कुछ समझ पाती, किसी ने दीवार की दूसरी तरफ से मेरे कपड़े खींच लिए थे.

मैं कुछ बोलती उससे पहले ही अंकल कि आवाज आई- सुमीना तुम नहा लो, मैं तुम्हारे कपड़े धुलवा देता हूं.

मैंने दरवाजा खोल कर झांका, पर वो जा चुके थे. मैं जल्दी जल्दी नहा लिया, पर न तो टावेल था … न कुछ और.

अच्छा हुआ जो मैंने सर नहीं धोया था.

तभी किसी ने दूसरे दरवाजे पर दस्तक दी.

मैंने पूछा कि कौन है?
तो उसने अपना नाम बताया.

उसने मुझसे बाहर निकलने को कहा … क्योंकि उसे फारिग होना था.

अब मैं निकलती कैसे, मेरे पास एक भी कपड़ा नहीं था. क्या करूं … मैं ये सोच ही रही थी कि अंकल ने आवाज देकर पूछा कि कोई समस्या तो नहीं है?

तो मैंने समस्या बताई, तो अंकल कुछ देर सोच कर बोले कि बाहर आ जाओ.
मैंने कहा- मैंने कपड़े नहीं पहने हैं.
वो बोले- मैं बाहर जा रहा हूँ और मैं बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर दूंगा.

अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं था क्योंकि वो आदमी बार बार बोल रहा था कि निकलो बाहर वर्ना अन्दर घुस जाऊंगा. मैंने अंकल को बाहर जाने को कहा और फिर दरवाजे से झांक कर बाहर देखा कि रूम में कोई है तो नहीं. रूम में कोई नहीं था, तो मैं बाहर आ गई और बाथरूम का दरवाजा बाहर से बंद कर लिया.

अब मैं पूरी नंगी बाहर खड़ी थी. अभी दो मिनट भी नहीं हुए थे कि वो दो लोग, जिनसे मैं मिल चुकी थी … और दो नये चेहरे धड़धड़ाते हुए कमरे में घुस गए और कुर्सी पर बैठ गए. अचानक उनकी नजर मुझ पर पड़ी, पर न तो वो लोग उठ कर बाहर गए … न कुछ बोले.

मैं तो इस पशोपेश में थी कि अपने नंगे बदन का कौन सा हिस्सा कैसे छुपाऊं. जैसे तैसे मैंने दोनों हाथों से अपनी चूत को ढका. तभी चपरासी जूस लेकर अन्दर आ गया और पांच गिलासों में जूस डाल कर चला गया.

उसने मुझे देखा, पर उसकी नजरों से ऐसा लगा कि वो ऐसे सीन रोज ही देखता हो, मतलब उसके चेहरे पर हैरानी के कोई भाव ही नहीं थे.

वे लोग जूस गिलास में डाल कर पीने लगे और आपस में बातें करने लगे. शर्म से मेरा चेहरा लाल पड़ गया था और बदन पर पसीना आ रहा था.

अचानक एक ने दूसरे से कहा- बेचारी अलग से किनारे में खड़ी है … और हम सब जूस पी रहे हैं. उसे भी बुला लो.
उसने मुझसे कहा- सुमीना तुम भी आकर यहीं बैठ जाओ, थोड़ा जूस पी लो.

मुझे तो कुछ बोलते नहीं बन रहा था. फिर भी मैंने धीरे से कहा- नहीं, मैं यहीं ठीक हूं.
वो आदमी उठा और मेरी कलाई खींचते हुए बोला- आप तो फालतू में तकल्लुफ कर रही हैं.

वो मुझे खींच कर कुर्सी तक लाया और मुझे कुर्सी पर बैठा दिया. मैंने एक हाथ से अपने चूत को ढक लिया और एक हाथ से अपने स्तनों को ढक लिया.

उसने गिलास में जूस डाल कर मेरे सामने रखा. गिलास किसी भी हाथ से उठाती, तो जिस्म की अच्छी खासी नुमाईश हो जाती.

उस आदमी ने फिर से कहा- आप तकल्लुफ कर रही हैं.

मैंने अपने जिस हाथ अपने स्तनों को ढक रखा था, उसे खींच कर उसने गिलास पकड़ा दिया. मैंने एक झटके से गिलास खत्म किया और अपने स्तनों को दोबारा ढक लिया.

उसने कहा- अरे सुमीना बेबी, पानी नहीं जूस पी रही हो. एक गिलास पांच मिनट से पहले खत्म हो जाए … तो जूस का क्या खाक मजा आएगा.

उसने एक गिलास जूस और डाल दिया. मैं तो समझ ही नहीं पा रही थी कि करूं तो क्या करूं.

वो लोग अपनी बातों में मशगूल हो गए. जैसे ही मैं गिलास उठाने के लिए हाथ बढ़ाती, चारों मेरे भरे हुए स्तनों को एकटक घूरने लगते और जब मैं गिलास रख कर जैसे ही अपने स्तनों को ढक लेती, वो लोग अपने बातों में मशगूल हो जाते.

जैसे तैसे मैंने गिलास खत्म किया और अपने बदन को अपने हाथों से छुपाकर बैठी रही.

कुछ लोगों को लग सकता है कि मुझे चिल्लाना चाहिए था, पर इससे मेरे बदन की नुमाईश और लोगों के सामने होती और ये एरिया भी मेरा नहीं था. हालांकि शहर तो मेरा ही था, तो कोई न कोई जानने वाला मिल ही जाता. इससे मैं जिन्दगी भर की बदनामी मोल ले लेती.

फिर मुझे न जाने क्यों मजा भी आने लगा था. मेरी फंतासी अंगड़ाइयां लेने लगी थी. बस शर्म ही मुझे परेशान कर रही थी.

थोड़ी देर मैं वैसे ही बैठी रही.
तो उसमें से एक न कहा- आप इतनी तकल्लुफ से क्यों बैठी हुई हैं. आराम से बैठिए.

इतना कह कर उसने मेरे दोनों हाथ खींच कर अगल बगल में रख दिए. मैं उसके इस कृत्य का विरोध भी नहीं कर पाई न ही अपने हाथ वापस ला पाई. मैं वैसे ही अपने बदन की नुमाईश करते हुए बैठी रही.

वो लोग अपनी बातें करते रहे.

एक ने कहा- क्या मस्त शर्ट है, कहां से ली.

वे सब इसी तरह की फ़ालतू बातें कर रहे थे. आपस में बात करते करते एक ने मुझसे कहा- अरे सुमीना, तुम्हारे क्या बढ़िया स्तन हैं. एकदम संतरे के समान गोल हैं. मेरी पत्नी के तो तरबूज हो गए हैं … और दबाने से गीले मैदा से लगते हैं. तुम्हारे तो टाईट है न?

मैं क्या बोलती, चुपचाप बैठी रही. मुझे शर्म और सनसनी दोनों हो परेशान कर रही थी.

उसने आगे कहा- अरे तुम तो फालतू में शर्मा रही हो, लाओ मैं खुद ही देख लेता हूं.

इतना कह कर उसने अपने दोनों हाथों से मेरे स्तनों को पकड़ा और मसलने लगा. मैं शर्म से गड़ी जा रही थी कि ये कैसी मेरी गंदी कहानी बन रही है.

उसने मेरे चूचे मसल कर कहा- एक नम्बर, बहुत मस्त कसावट है.
तभी दूसरे ने कहा- लाओ मैं भी देखूं.

उसने भी मेरे स्तनों को दोनों हथेलियों से पकड़ कर अच्छे से मसला.

एक एक करके चारों ने मेरे स्तनों को मसला और कहा- सही है, सच में बहुत मस्त कसावट है.

मुझे भी अपनी चूचियों को मसलवाने में मजा आने लगा था.

तभी किसी ने किसी से कहा- स्तन की बात तो ठीक है, पर चूत का क्या?
एक ने कहा- मेरी पत्नी की तो इतनी फैल गई है कि अब लौकी भी घुस जाए … तब भी उसे फर्क नहीं पड़ेगा. सुमीना तुम्हारी चूत का क्या हाल है? लाओ मैं देखूं जरा.

उसने मेरी जांघों को फैलाया और मेरी चूत में एक उंगली अन्दर तक घुसा दी. मुझे करंट सा लगा और ऐसा लगा कि उछल जाऊं.

वो कुछ देर तक मेरे चूत को उंगली से टटोलता रहा और फिर उंगली बाहर निकाल ली. एक एक करके सबने मेरी चूत में उंगली डाल कर कुछ देर तक मेरी चूत को टटोला. अब तक मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी.

तभी दरवाजा खुला और मेरे अंकल अन्दर आ गए. उस टाईम पर एक की उंगली मेरी चूत में थी और उसने धीरे से उंगली बाहर निकाल ली.

अंकल ने उससे कुछ नहीं कहा, जिससे ये बात साफ हो गई कि वे भी इनके साथ मिले हुए हैं.

उन्होंने मुझे उठने को कहा और खुद कुर्सी पर बैठ गए.

थोड़ी देर बाद किसी ने कहा- क्या यार खुद बैठ गए हो और उसे खड़ा रख दिया है.
अंकल ने मेरे हाथ को पकड़ा और मुझे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया. अंकल एक हाथ से मेरे कमर को सहारा दिए हुए थे.

अब वो अपने एक हाथ से कभी मेरे स्तनों को मसलते, कभी मेरी जांघों को सहलाते, कभी मेरी चूत में उंगली डालते.

वो सब अपने बातों में मशगूल रहे.

थोड़ी देर में किसी ने कहा- अरे यार, तुम थक गए होगे, लाओ इसे मैं अपनी गोद में बिठा लेता हूं.

मुझे खींच कर उस आदमी ने अपनी गोद में बिठा लिया और मेरे बदन से खेलने लगा. हर पांच मिनट में मैं एक से दूसरे की गोद में जाती रही. आखिर में मैं अंकल की गोद में दोबारा पहुंच गई. मुझे बेहद सनसनी होने लगी थी और जब से अंकल ने मेरे बदन के साथ खेला था, तब से तो मेरी शर्म भी जाती रही थी. अब मैं चुदने का इन्तजार कर रही थी.

अगले भाग में मेरी मेरी गंदी कहानी का पूरा मजा पढ़ना न भूलिएगा.

Part-2 Mai uncle or unke dosto se chud gyi… Part-2

Pdosan widhwa chachi ki chut gaand chudai

देसी चाची की चुदाई कहानी में पढ़ें कि पड़ोस की विधवा चाची जवान नज़र आती थी. उस गजब की माल सेक्सी चाची की चूत और गांड को कैसे चोदा.

हाय दोस्तो, मेरा नाम शशि है. आज मैं देसी चाची की चुदाई कहानी में आप लोगों को बताने जा रहा हूँ कि कैसे मैंने एक विधवा महिला को चोदा.

मेरे घर के बगल में एक औरत रहती है, उनके पति आज से करीब 15 साल मर गए थे. मैं उसे चाची कहता हूँ.

चाची की शादी कम उम्र में हो गई थी, जिसके कारण चाची आज भी जवान नज़र आती हैं.

उनका नाम रीता है, उनका रंग सांवला है … लेकिन वो दिखने में गजब की माल लगती हैं.

चाची की साइज 34-32-36 की है. चाची की चूचियां किसी जवान लड़की की तरह एकदम कसी और उन्नत हैं.
उनकी गांड के बारे में क्या कहूँ यार … गांड को देखकर लंड में पानी आ जाता है. मन तो करता है क़ि अभी पकड़ कर चोद दें.

चाची के दो बच्चे हैं. एक तो मेरा ही उम्र का था … जो मेरा दोस्त है. उसका नाम भरत है.

हुआ यूं कि एक बार जब मैं भरत को बुलाने के लिए उसके घर गया तो देखा कि चाची आंगन में नहा रही थीं.
उनके चेहरे पर साबुन लगा हुआ था और चूचियां खुली हवा में उछल रही थीं.

चाची के नंगे मम्मे देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.
मैं सोचने लगा कि काश मैं अभी चाची को चोद पाता.

तभी चाची ने अपना चेहरे को धोया और मुझे अपने चूचे देखते हुए देख लिया.
उनसे नजरें मिलते ही मैं तुरन्त वहां भाग गया.

इस घटना के कुछ दिन तक तो मैं चाची से नजर ही नहीं मिला पा रहा था.

फिर एक दिन जब सुबह मैं छत पर गया तो उसी समय चाची भी छत पर आ गईं.

मैंने देखा कि चाची मुझे ही देख रही थीं.

उन्हें देख कर मैं जैसे ही नीचे आने लगा … तभी चाची ने मुझे आवाज देकर रोक लिया.

मैं रुका और उनकी तरफ देखने लगा.

चाची बोलीं- तुम दोपहर में मेरे घर आना.
मैं कुछ नहीं बोल सका.

फिर दोपहर को चाची ने फोन किया और मुझसे घर आने को बोलीं.
मुझे डर लग रहा था कि चाची कहीं उस दिन की बात न बोलने लगें.

जब मैं चाची के घर गया तो देखा कि उनके घर में कोई नहीं था.

चाची मुझे अपने रूम में ले गईं और पूछने लगी- उस दिन क्या देख रहा था?

ये सुन कर मेरी तो गांड फट गई … वही बात हुई जो मैं सोच रहा था. अब मैं चाची से क्या बोलूं, मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था.

मैं सहमते हुए बोला- चाची वो मैं भरत को बुलाने आया था.
ये सुनकर चाची मुझे देखने लगीं.

चाची- वो मुझे मालूम है कि तू किस लिए आया था. मैं ये पूछ रही हूँ कि तूने उस दिन क्या देखा था?
मैं- क..कुछ नहीं चाची!

चाची- अच्छा कुछ नहीं देखा था … तो फिर भाग क्यों गया था?
मैं- बस व..वो..

चाची- मुझसे झूठ बोल रहा है. मैंने देखा था कि तू मुझे देख रहा था … सच सच बोल!

मैं घबरा गया और घिघियाने लगा- न..नहीं चाची मैं बस आपका वो दिख रहा था … व्..वो.
चाची ने थोड़ी खुलते हुए पूछा- वो क्या दिख रहा था … बोल न!

ये कहते हुए चाची मुझे अपनी चूचियां उठा कर दिखाने लगीं- ये देख रहे थे न?
मैं कुछ नहीं बोल सका.

चाची- क्या तूने पहले किसी के नहीं देखे हैं?
मैं- न.. नहीं चाची.
चाची- अच्छा ये बता … तुझे मैं कैसी लगती हूँ?

मैं सोचने लगा कि बोल दूं कि आप एक नंबर की माल दिखती हो. पर मैंने सिर्फ इतना बोला- अच्छी लगती हो.

चाची ने अपनी साड़ी का पल्लू हटाते हुए, पूछा- हम्म अच्छी लगती हूँ … तो क्या तुम मुझे चोदोगे?

एकदम से चाची ने चोदने के लिए पूछा तो मैं अचकचा गया और सोच में पड़ गया कि चाची ये क्या बोल रही हैं.
मैं कुछ नहीं बोल सका.

चाची- बोल न … मेरी बात का जवाब दे.
यह कहते हुए चाची ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने मम्मों पर रख दिया और दबाने लगीं.

मुझे डर लग रहा था कि कहीं कोई देख न ले.

चाची ने मुझे खींचा, तो मैं एकदम से खिंचा चला गया. चाची ने मुझे अपनी बांहों में ले लिया और मुझे किस करने लगीं.

उनकी चुम्मियों से अब मैं भी गर्म होने लगा था और मेरा लंड भी खड़ा हो रहा था.
मैं भी चाची का साथ देने लगा.

करीब दस मिनट की चूमा-चाटी के बाद मैं चाची की मम्मों को जोर जोर से दबाने लगा और ब्लाउज़ के ऊपर से ही उनके एक निप्पल को चूसने लगा.

चाची भी मुझे अपनी बांहों में भींचे मुझे दूध चुंघाने लगीं.

मैंने धीरे धीरे चाची की साड़ी को खोल दिया.

उन्होंने वासना भरी निगाहों से मुझे देखा, तो मैंने उनका ब्लाउज़ भी खोल कर अलग कर दिया. उसके बाद पेटीकोट का नाड़ा ढीला किया तो पेटीकोट नीचे गिर गया.

अब चाची मेरे सामने केवल लाल रंग की ब्रा और पैंटी में खड़ी थीं.

चाची को ऐसे देख कर मुझे जोश आ गया और मैं अपने होंठों को चाची के होंठों पर रख कर उन्हें चूसने लगा. साथ ही हाथों से चाची की गांड को मसलने लगा.

फिर जैसे ही मैं चाची की ब्रा को खोलने लगा, तो चाची ने मुझे रोक दिया और बोलीं कि जरा रुक जा … पहले अपने कपड़े तो खोल ले.
मैं बोला- चाची, आप ही खोल दो न!
तो चाची बोलीं- साला अभी मुझे चोदने वाला है … और मादरचोद अभी भी चाची बोल रहा है.

मैं समझ गया कि चाची अब पूरे जोश में आ गई हैं. मैं सुर बदल कर बोला- ठीक है साली रंडी … आज से मैं तुझे तेरा नाम लेकर बुलाऊंगा.

चाची हंस दीं और बोलीं- अब लाइन पर आया कमीने.
मैं- चल रीता रंडी … अब तू मेरे कपड़े खोल मां की लौड़ी.

चाची ने मेरी पैंट के बटन खोले और चैन खोल कर मेरे लंड को पकड़ लिया और चड्डी के ऊपर से मेरे लंड को दबाने लगीं.

मैंने भी अपनी टी-शर्ट उतार दी और अब मैं चाची के सामने केवल चड्डी में आ गया था.

चाची घुटनों के बल बैठ गई और चड्डी नीचे करके मेरे लंड को चूसने लगीं.
तब तक मैंने चाची की ब्रा खोल कर उनके मम्मों को आज़ाद कर दिया.

तभी चाची ने मेरे लंड को पूरा बाहर निकाल और उसे अपने नर्म हाथों से सहलाने लगीं.

चाची मेरे लंड को सहलाते हुए बोलीं- साले, तेरा लंड तो बहुत बड़ा है … इससे चुदवाने में तो आज मजा आ जाएगा.

इतना कह कर चाची अपने मुँह में लंड लेकर चूसने लगीं. मैं चाची की चूचियां मसलने लगा और सोचने लगा कि चाची ने अभी भी अपनी पैंटी पहने हुई है. इसे और उतार दूं … तब देखता हूँ.

मैंने कहा- रीता, अपनी पैंटी तो हटा.
वो लंड चूसते हुए बोलीं- अभी रुक जा … मुझे कुल्फी चूसने में मजा आ रहा है.

मैंने तुरन्त उनके मुँह से अपना लंड बाहर निकाला और कहा- लंड चूसने का मजा चुत चुसवाने के साथ ले लियो.
ये कहते हुए मैंने उन्हें उठाया और उनकी पैंटी को नीचे कर दिया.

चाची की चुत पर एक भी बाल नहीं था.
चुत पर झांटें न देख कर मैंने चाची से पूछा कि क्या बात है मेरी जान … तेरी चुत तो एकदम साफ है.
तो चाची ने बताया- मैंने आज ही अपनी चुत की झांटों को साफ किया है.

मैंने कहा- मतलब सुबह से ही चुत चुदाई का मूड था.
वो हंसने लगीं.

फिर मैं चाची की चुत चाटने लगा.
मैं चाची की चुत की फांकों को अपने दांतों से खींच देता था, जिससे उनके मुँह से मादक सीत्कार निकल जाती थी.

दो मिनट तक चुत चूसने के बाद चाची बोली- साले अकेले अकेले सारा मजा लेगा क्या? मुझे भी तो कुल्फी चुसा.

मैं पलंग पर चची के साथ 69 की पोजीशन में आ गए. चाची लंड चूसने लगीं और मैं उनकी चूत.

कुछ देर बाद चाची झड़ गईं. मैं उनके चुत रस को पूरा पी गया.

अब चाची अपने चुत में लंड को लेने के लिए मचलने लगीं और बोलीं- अबे मादरचोद … साले सिर्फ चुत चाट कर ही रह जाएगा या मुझे चोदेगा भी!
मैं उनकी दूध मसलते हुए बोला- इतनी जल्दी भी क्या है मेरी रंडी … आज तो तेरी चुत को फाड़ कर भोसड़ा बना दूंगा.

चाची ने चुत पसारी और उस पर हाथ फेरते हुए बोलीं- तो आ जा ना भोसड़ी के … मैं तो कब से लंड के लिए तड़फ रही हूँ.

मैं चुदाई की पोजीशन में आया और अपना लंड चाची की चुत पर रख दिया.

चाची ने लंड हाथ में लिया और उसे अपनी चुत की फांकों में घिसने लगीं.
लंड काफी चिकना हो गया था.

तभी मैंने एक झटका दे मारा … लेकिन मेरा लंड फिसल गया. क्योंकि चाची की चुत काफी टाईट थी.

लंड फिसला, तो चाची हंसने लगीं- अरे बुद्धू … जरा सब्र कर … काफी दिनों से लंड अन्दर नहीं गया तो निगोड़ी चुत कसी सी हो गई है.

फिर चाची ने अपने हाथों से मेरे लंड को अपनी चुत पर सैट किया और अन्दर डालने को बोली.

मैंने फिर से एक जोर का झटका लगाया और इस बार मेरा आधा लंड चुत में घुस गया.

लंड के घुसते ही चाची चिल्लाने लगीं. दर्द से उनके आंखों में आंसू आ गए थे.
पर मैं ये सब देख कर भी नहीं रुका और मैंने एक और झटका दे दिया.
इससे मेरा पूरा लंड चाची की चुत में जड़ तक चला गया.

अब चाची दर्द से छटपटाने लगीं और लंड को बाहर निकलने के लिए बोलने लगीं.
साथ ही वो गाली भी दे रही थीं- आह मार दिया मां के लौड़े ने साले रंडी समझ कर चोद रहा है कुत्ते … बाहर निकाल कमीने चुत फाड़ दी मादरचोद ने.

उनकी गालियों का मुझ पर कोई असर नहीं पड़ रहा था. मैं और जोर जोर से चाची की चुत को चोदने लगा.

कुछ देर बाद चाची भी मेरा साथ देने लगीं.
अब चाची भी पूरे मज़े से मेरे लंड को अपनी चुत की गहराई में ले रही थीं. वो अपनी गांड उठा उठा कर चुदाई का मजा ले रही थीं.

साथ ही उनकी मादक सिसकारियों से पूरे कमरा में गूंज रहा था.

चाची मुझे जोश दिलाने के लिए गालियां भी दे रही थीं और जोर जोर से चोदने को बोल रही थीं- आह चोद मादरचोद … साले कितना अन्दर तक पेल रहा है आह भोसड़ी वाले तेज तेज चोद आह और जोर से चोदो … फाड़ दो मेरी चुत को बुझा दो इसकी प्यास को.

कुछ देर चोदने के बाद मैंने चाची को घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड पेल कर उनकी चुत को चोदा.

कोई 20 मिनट के बाद जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने चाची से पूछा कि मैं झड़ने वाला हूँ.

चाची ने मुझे लंड रस बाहर गिराने को कहा. पर मुझसे रुका ही न गया और मैं चाची की चुत में ही झड़ गया. चाची की चुत में मैंने अपनी पूरी मलाई को भर दिया था.

जब मैंने लंड निकाल कर उनकी चुत देखा, तो चाची की चुत से वीर्य के साथ खून भी बाहर आ रहा था.

चाची के चुत में झड़ने से चाची गुस्सा हो गईं और बोलीं कि मां के लौड़े अगर मैं प्रेग्नेंट हो गई तो क्या होगा?
मैं बोला- टेंशन मत ले मेरी जान … आज से तू मेरी रंडी है. आज रात तेरी चुत और गांड दोनों को फाड़ दूंगा और रात में तेरे लिए गोलियां भी ला दूंगा … जिससे तू मां नहीं बनेगी.
चाची हंस दीं और बोली- अरे हां मुझे गोलियों की तो याद ही नहीं थी.

कुछ देर बाद मैं उठा और अपने कपड़े पहन कर चाची को किस करके जाने लगा.

मैं चाची को रात में फोन करने को बोल कर घर आ गया.

फिर मैं शाम को मेडिकल दुकान जाकर गोलियां खरीद कर घर आया और चाची की गांड मारने के बारे में सोच सोच कर चाची के फ़ोन आने का वेट कर रहा था.

रात 11 बजे चाची का कॉल आया. चाची छत से अन्दर आने को बोलीं … क्योंकि चाची का कमरा जीने के बगल वाला था.

मैंने भी चाची को छत पर आने को बोला. उधर नीचे से एक दरवाजा था, जिसमें ताला लगा था.

फिर चाची छत पर लगे दरवाजे का ताला खोल कर ऊपर आ गईं. हम दोनों जल्दी से चाची के कमरे में आ गए.

चाची अभी नाइटी पहने हुई थीं और अन्दर कुछ नहीं पहनी थीं.

मैं कमरे में जाते ही चाची की गांड मसलते हुए उन्हें चूमने लगा और चाची को बेड पर पटक दिया.

उनके ऊपर चढ़ कर मैंने किस करते हुए चाची की नाइटी को खोल दिया.

चाची ने मेरे भी कपड़े खोल दिए, मुझे पूरा नंगा कर दिया, बोलीं- आज तेरे लंड को पूरी मस्ती से चूसूंगी.
ये कह कर चाची ने लंड मुँह में ले लिया.

मैं भी चाची के बालों को पकड़ कर अपना लंड चाची के मुँह में जोर जोर डाल रहा था.

करीब पांच मिनट के बाद मैं चाची के मुँह में ही झड़ गया.
चाची मेरा सारा मुठ पी गईं.

फिर हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए और चाची मेरा लंड और में चाची की चुत को चाटने लगा. कुछ मिनट के बाद मैंने चाची को सीधा किया और चाची की चुत चोदने लगा. बीस मिनट की घमासान चुदाई के बाद मैं चाची की चुत में झड़ गया और चाची के ऊपर ही ढेर हो गया.

कुछ देर चाची फिर से मेरे लंड को सहलाने लगीं और मुँह में लेकर चूसने लगीं. कुछ मिनट बाद फिर से मेरा लंड खड़ा हो गया.

मैंने चाची को घोड़ी बनने को बोला तो चाची तुरन्त घोड़ी बन गईं.

पर जैसे ही मैं उनकी गांड के छेद में उंगली डालने लगा, तो चाची मना करने लगीं, बोलीं- आज तक मैंने कभी गांड नहीं चुदवाई है.
मैं बोला- तो अब चुदवा लो.

चाची नहीं मान रही थीं, पर मैंने सोच लिया था कि आज चाची की गांड मारनी ही है.

मैं कुछ नहीं बोला और चाची की चुत में ही लंड डाल कर धक्का लगाने लगा.
कुछ देर बाद जब चाची पूरी जोश में आ गईं … तो मैंने तगड़ा धक्का लगाने के लिए अपने लंड को पूरा बाहर निकाला और एक जोर के धक्के के साथ अपना लंड चाची की गांड में डाल दिया.

चाची दर्द से छटपटाने लगीं और लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगीं.

पर मैंने उनकी कमर को जोर से पकड़ कर रखा हुआ था. मैंने चाची की गांड में लंड पेले हुए रुका रहा.

कुछ देर बाद चाची शांत हो गईं और मैं धीरे धीरे धक्का देने लगा.
फिर चाची को भी मजा आने लगा और अब वो अपनी गांड चुदाई में मेरा पूरा साथ दे रही थीं.

अब चाची बोले जा रही थीं- आह इसमें इतना मजा आएगा … मैंने कभी सोचा ही न था … आह और जोर से पेल आह और जोर से चोद … आज फाड़ दो मेरी गांड.
चाची की बातों सुन कर मैं भी बोल रहा था- हां … मेरी रंडी … आज तेरी गांड की ऐसी चुदाई करूंगा कि तेरी मां भी चुद जाएगी.

चाची भी अब पूरी जोश में आ गई थीं. वो मुझसे कहने लगीं कि भोसड़ी वाले पहले मुझे तो चोद लो … फिर मेरी मां को चोद लेना.
मैं- हां मेरी रीता रंडी … ये ले लंड खा मां की लौड़ी.

इसी तरह हमारी चुदाई का खेल चलता रहा. बीस मिनट के बाद चाची की गांड में मैंने तेज तेज धक्के लगाए और चाची की गांड के अन्दर ही लंड का रस छोड़ दिया.

एक मिनट तक लंड की पिचकारी खाली करने के बाद हम दोनों थक कर लेट गए.
मैं चाची की चूचियों से खेलने लगा.

तभी चाची ने कहा- क्यों बे साले … मेरी मां चोदने की बात कर रहे थे?
मैं तुरन्त बोला- नहीं मेरी रंडी … तेरी चुत का मजा छोड़ कर उस बूढ़ी की चुत थोड़ी न चोदूंगा.
फिर चाची हंस कर बोलीं- चल बता कि तुझे मेरी मम्मी को चोदने को मिलेगा … तो चोद दोगे उसे!

मैं कुछ नहीं बोल सका.

उस रात मैंने देसी चाची की चुदाई 3 बार की. सुबह 4 बजे मैं अपने घर आ गया.

अब तो रोज रात में चाची की चुदाई करने उनके कमरे में आ जाता हूँ.

चाची अब मेरी रंडी बन गई हैं. वो खुद मेरे लंड से मचल मचल कर चुदती हैं और मैं भी चाची को खूब मस्ती से चोदता हूँ.

आपको मेरी देसी चाची की चुदाई कहानी कैसी लगी, Comment karke jrur btaaye.

Physics wali ma’am ko unke ghar par choda – Part 2

हैलो फ्रेंड्स, मैं रिची एक बार फिर से अपनी टीचर चुदाई कहानी के साथ आपके सामने उपस्थित हूँ.
पहले भाग
Physics wali ma’am ko unke ghar par choda – Part 1
में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं मैडम के घर में था और मैडम मेरे शरीर को छूते हुए मेरे शारीरिक सौष्ठव की तारीफ़ कर रही थीं.
मैं समझ तो रहा था कि मैडम की चुत में खुजली हो रही है मगर मैं कोई भी जल्दबाजी नहीं करना चाहता था.

अब आगे Hindi Sex story टीचर चुदाई कहानी:

मैंने केक और जूस पी कर खत्म किया और मैडम से पूछा- क्या मैं जाऊं मैडम!

तो मैडम मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोलीं- इतनी जल्दी क्या है … मैं तो अकेली बोर हो रही थी. तुम दिखे, तो सोची तुमसे कुछ बात करके बोरियत दूर करूंगी. और तुम हो कि घर जाना चाहते हो.

मैं अब 99% पक्का हो गया था कि आज मैडम की चुत मिल कर रहेगी … बस मुझे 1% का कुछ भ्रम था. मगर मैं सौ प्रतिशत पुष्टि करना चाहता था.

फिर मैंने मैडम से कहा- मैडम आपका वजन कितना है?
मैडम बोलीं- याद नहीं … शायद 90 केजी होगा.
मैं बोला- क्या सच में … मुझे तो आप 70 केजी की ही लगती हैं.

वो हंसने लगीं और अचानक से मेरी जांघों में हाथ रखने के बजाए गलती से मेरे अंडरवियर में हुए सख्त लंड पर रख दिया.
लेकिन अगले ही पल मैडम ने जल्दी से हाथ हटा लिया.

अब ये जानबूझ कर लंड को छुआ था या उनकी स्टाइल थी, ये मैं नहीं समझ पाया.

मैडम- तुमको ये कैसे अंदाजा हो गया है कि मैं 70 किलो की होऊंगी?
मैंने कहा- वैसे ही अब मैंने आपको कोई तौला थोड़ी है जो सही सही बता देता.
मैडम बोलीं- तो एक काम करो तुम मुझे उठा कर वजन का अंदाज कर लो.

ये कहते हुए मैडम ने मुझे खड़ा होने के लिए कहा और मेरी बांहों में बांहें डालकर मुझ पर लद गईं.

आह … मेरी तो झक्की खुल गई. मैंने मैडम को अपनी बांहों में भींच कर उन्हें एक दो बार झुलाया और लटकाए हुए खड़ा रहा.

मैडम ने मुझसे पूछा- मुझे तौला?
मैंने कहा- मुझे तो आप बड़ी हल्की लग रही हो.

वो बोलीं- वो कैसे?
मैंने कहा- मैं जिम में सौ किलो वजन उठा कर वेटलिफ्टिंग करता हूँ, तो मुझे उससे तो आप बहुत हल्की लग रही हैं.

अब मैडम मेरे ऊपर से हट गईं और बोलीं- तुम्हें और केक खाना है?
मैं बोला- हां मैडम क्यों नहीं.

मैडम उठ कर और केक लाने जा रही थीं कि तभी मैंने उनसे पूछा- शौचालय कहां हैं मैडम?
वे बोलीं- बस सीधे से आगे चले जाओ.

मैं शौचालय गया और दरवाज़े को थोड़ा सा खुला रख कर मूतने के लिए लोअर की चैन खोलने लगा.

असल में मैंने ऐसा एक ब्लू फिल्म में देखा था.

मैं बस लंड निकाल हाथ में लिए उसे सिसकते हुए सहला रहा था. मुझे इस समय मैडम की गर्म सांसें ही याद आ रही थीं और नर्म चूचियों की छुअन मदहोश कर रही थी.

मैं बस ये चाहता था कि एक बार मैडम आकर लंड देख लें, बाकी बाद में मैं देख लूंगा.

मैं मैडम को पूरे जोश के साथ चोदने के लिए पागल हो गया था और कुछ देर तक उन्हें अपने मन में चोदते हुए शौचालय में लंड सहलाता रहा.

फिर वो ही हुआ, जो मैं चाहता था. मैडम मुझे छिप कर देख रही थीं, ये मैं देख चुका था.

इसलिए मैंने जानबूझ कर सिसकते हुए कहा- ओह निकिता मैडम, आप बहुत सेक्सी हैं. कितनी मस्त चूचियां है आपकी. आह बस मुझे एक बार चोद लेने दो … जिदगी भर आपकी गुलामी करूंगा.

उन्होंने मेरे मुँह से ये सुना और मुझे धक्का देते हुए शौचालय में अन्दर आ गईं.

मैं कुछ समझ पाता कि मैडम ने बिना कुछ बोले मेरे लंड को पकड़ लिया और सहलाते हुए बोलीं- तुम्हें पता नहीं है … मैं इस दिन के लिए कितनी बेताब थी. आखिर ये दिन बहुत जल्दी आ गया.

मैडम को ऐसे बोलते देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैं मैडम के दोनों गालों को पकड़ कर मैडम की रसीले होंठों को चूमने लगा. मैडम भी मुझसे लग गईं.

मैं ठहरा अनाड़ी … लेकिन मैडम तो खेली खाई माल थीं. उन्होंने मुझे चूमते-चूमते अपनी ज़ुबान को मेरे मुँह में डाल दी और कामवासना में मदांध होकर चुंबन शुरू कर दिए.

मैं भी मैडम की नर्म जुबान का रस चूसे जा रहा था. मेरे हाथ मैडम के मम्मों को दबाए जा रहे थे.

फिर मैडम बोलीं- चलो आओ … आराम से मजा करते हैं. तुम्हें कोई जल्दी तो नहीं है ना!
मैं बोला- जी नहीं मैडम अब काहे की जल्दी … अब तो आग बुझा कर ही जाऊंगा.

मैडम हंस दीं और बोलीं- किसकी आग बुझाएगा … मेरी या अपनी!
मैंने उनकी चुम्मी ली और कहा- आपकी आग तो कई बार बुझ चुकी होगी … मेरा तो उद्घाटन समारोह है.

मैडम कुंवारे लंड की सुनकर एकदम से खिल उठीं. मैं उन्हें थामे हुए सोफे के पास आ गया. मैडम ने मुझे खड़ा किया और मेरे सारे कपड़े उतारने लगीं.

मैंने कहा- मैं खोल देता हूँ.
मैडम बोलीं- जल्दी से खोल अब मुझे तेरा हथियार देखना है.

मैंने झट अपनी शर्ट और ट्राउज़र को पूरी तरह से उतार दिया और नंगा खड़ा हो गया. मैडम मुझे देख कर मुस्कुरा दीं और अगले ही पल घुटनों पर आ गईं.

मैं समझ गया कि लंड का कल्याण होने वाला है. लंड तो तनतना ही रहा था.

अगले ही पल मैडम मेरे लंड के टोपे को चाटने लगीं.
आह … क्या मस्त अंदाज़ में चाट रही थीं निकिता मैडम मेरे लंड को … मैं तो पूरा जोश में आ गया था.

फिर मैडम ने मेरे लंड को अपने मुँह में अन्दर तक लिया और चूसने लगीं.
मुझे ऐसा लग रहा था मानो यह काम मैडम बहुत अच्छे से जानती हैं.
मैं भी निकिता मैडम के बाल पकड़ कर लंड थोड़ा अन्दर तक घुसाने की कोशिश कर रहा था.

कोई दस मिनट तक मैडम ने मेरे लंड को चूस कर लथपथ कर दिया.

फिर मैडम बोलीं- बस तू ऐसे ही खड़ा रहना. मैं अभी दो मिनट में आई.

मैडम के जाते ही मैंने जिस्म की ताकत को समेटते हुए केक उठा कर एक ही बार में मुँह में भर लिया और दूसरे हाथ से जूस का गिलास उठा कर पी लिया.

मैंने ठान लिया था कि आज मैडम को जम कर चोदूंगा.

कुछ देर में मैडम वापस आईं.
वो अपने हाथ में कंडोम का पैकेट लेकर आई थीं. जिसे देख कर मैं समझ गया था कि मैडम के पास अपनी चुत चुदाई का पूरा इंतजाम रहता है.

फिर मैडम ने लंड को एक बार फी से चूसा और लंड के ऊपर खुद कंडोम लगा दिया.

अब वो खुद नंगी होने लगीं. मैडम ने नाइटी के अन्दर कुछ भी नहीं पहना था.

मैडम जैसे ही नंगी हुईं, मैंने मैडम को सोफे पर लेटा दिया.

पहले तो मैंने मैडम को जी भर कर चूमा. उनकी चूचियों को दबा-दबा कर खूब चूसा चाटा.

मैडम की मादक सिसकारियां निकलने लगीं. मैं मैडम के पेट पर आकर उनकी नाभि को चूमने लगा था.

उनकी नाभि भी इतनी गहरी थी कि मेरा मन किया कि उसी में अपना लंड रगड़ दूं. लेकिन मैंने मैडम की नाभि को चाटते हुए उनकी दोनों टांगों को खोला और मैडम की झांटों भरी चुत को देखा.

मैं फिलहाल वही करना चाहता था, जो मैंने ब्लू फिल्म में देखा था.

मैडम की दोनों टांगों के बीच में मैंने अपना सर रखा और निकिता मैडम की झांटों भरी चुत को चाटने लगा.

उस वक़्त जो निकिता मैडम सिसक रही थीं और ‘ओह आह उफ़ … कर रही थीं, उसे सुन कर मुझे बहुत मजा आ रहा था.

मैडम की नमकीन चुत चाटने के बाद मैंने निकिता मैडम की दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और उनकी चुत की फांकों में अपना लंड घुसा दिया.

हॉट मैडम की एक बार आह निकली और वो जोर-जोर से गांड हिलाने लगीं.

मेरे लंड में भी हल्की सी जलन हुई लेकिन चुत चुदाई के नशे में मैंने दर्द को भुला दिया. मैं तेजी से लंड चुत में अन्दर-बाहर करने लगा.

पांच मिनट में ही मैडम मुझसे कहने लगीं- ओह रिची … तुम बहुत एक्सपीरियंसड लग रहे हो.
ये सुन कर मैंने कहा- मैडम आजकल ब्लू फ़िल्में सब कुछ सिखा देती हैं मगर आज मेरे लंड का उद्घाटन हुआ है, ये आप सच मानिए.

वो मुझे चूमने लगीं और बोलीं- आह सच में मेरी चुदी हुई चुत को कुंवारा लंड मिल गया … ये तो मेरा नसीब है.

उनकी इस बात से मुझे और भी जोश आ गया और मैंने निकिता मैडम को 4-5 बार ज़ोर ज़ोर से दबा कर झटका लगाया और लंड बाहर खींच लिया.

मैडम ने पूछा- क्यों निकाला?
मैंने उनसे उल्टा लेटने के लिए बोला.

मैडम खुद जल्दी से कुतिया बन गईं.

मैं पूरे जोश में था और निकिता मैडम की गदराई हुई गांड को देख मैं उसे भी चाटने लगा.

मैडम मुझे गांड चाटने से मना करने लगीं, लेकिन मैं रुका नहीं.

अब मैंने मैडम के चूतड़ खोले और मैं 5 मिनट तक गांड के छेद को चाटा. मगर कुछ देर बाद मैडम ने गांड मारने के लिए मना कर दिया.

फिर उनकी चुत में थूक लगा कर घोड़ी की सवारी के लिए मैं मैडम के ऊपर चढ़ गया. उनकी चुत लपलप कर रही थी.

मैंने लंड को अच्छे से अन्दर घुसाया और मैडम ने आह की आवाज निकाल दी.

वो बोलीं- थोड़ा आराम से करना रिची.

मैं मैडम की दोनों चूचियों को पकड़े हुए था और धीरे-धीरे लंड ऊपर नीचे करने लगा.

कुछ ही झटकों के बाद मैडम कहने लगीं- हां रिची ऐसे ही … उफ … आह.

ताबड़तोड़ चुदाई चलने लगी. मैं और मैडम दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे.

मेरा मन ही लंड निकालने का नहीं कर रहा था. लेकिन मैंने घड़ी में टाइम देखा तो रात होने वाली थी.

शाम के 7:30 हो गए थे. मुझे निकिता मैडम के ऊपर अपना पानी झाड़ना था, तो मैं मैडम को बिना बोले मैंने धीरे धीरे से एकदम रफ्तार के साथ चोदना चालू कर दिया.

निकिता मैडम मुझसे कहने लगीं- आह रिची धीरे धीरे आह … मैं झड़ चुकी हूँ अब मुझे जलन हो रही है.

फिर मैंने एकदम से लंड निकाला और 3-4 बार मुठ मार कर लंड का माल निकिता मैडम की गांड के ऊपर झड़ा दिया.
मेरे लंड का आज ढेर सारा माल निकला था.

मैडम तृप्त हो गई थीं.

इसके बाद मैंने उन्हें चूमा और जाने की इजाजत मांगी.
मैडम बोलीं- अपने पापा का नम्बर दे जाना.

मैं डर गया कि क्या हो गया.
मैंने पूछा- क्यों?
मैडम बोलीं- कुछ नहीं तेरे पापा को फोन करके बोलूंगी कि रिची को मेरे पास घर भेज दिए करना. इसकी फिजिक्स कमजोर है … घर पर इसे कुछ अधिक पढ़ा कर होशियार कर दूंगी.
मैं हंस दिया.

मैंने मैडम को पापा का नम्बर दे दिया और घर आ गया.

इससे आगे की सेक्स कहानी को मैं फिर कभी बताऊंगा. आपको मजा आया होगा. Please comment karke jarur btaaye.

Part 1 – Physics wali ma’am ko unke ghar par choda – Part 1

Physics wali ma’am ko unke ghar par choda – Part 1



नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रिची है. मैं रांची, झारखंड का रहने वाला हूं.
मैं अपनी हॉट टीचर सेक्स स्टोरी आपके सामने लेकर आया हूँ.

मैं अब 30 साल का हूं और रेलवे में नौकरी करता हूं.

मेरा कद 5 फुट 9 इंच लम्बा है और मैं काफी तगड़ा हूं. मुझे फिट रहना पसंद है. इसलिए कसरत करना मेरा शौक और आदत है. वैसे तो मैं पहले दुबला पतला था और मुठ बाज था. जब मैं 19 साल का था, तभी से मुठ मारता आया था. अपने आस पड़ोस की लड़कियों की चूचियां और मटकती गांड देख मेरा लंड खड़ा हो जाता था.

जब मैं कॉलेज में गया, तो मुझे एक से बढ़कर एक लड़कियां दिखने को मिलीं.
लेकिन वह सब भी फीकी पड़ गईं, जब मैंने पहली बार अपनी फिजिक्स वाली मैडम निकिता को देखा. उनके गदराए जिस्म को देख मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया.

हॉट टीचर अपने होंठों में लाल लिपस्टिक और पारदर्शी साड़ी पहन कर जब-जब क्लास आती थीं, तो मैं और मेरा एक दोस्त उन्हें देख अपना लंड सहलाने लगते थे.

एक तो मेरा लंड वैसे ही लहसुन का तेल लगा-लगा कर मोटा और लम्बा हो गया था .. और चोदने के लिए हर वक्त बेकरार रहता था.

निकिता मैडम 48 साल के आस पास की थीं और कॉलेज के बाद अपनी कार में बैठ कर चली जाती थीं.
वह बहुत पैसे वाली थीं .. उनका पति रेलवे गुड्स का इंचार्ज जो था.

मैं निकिता मैडम को देख इतना तड़पता था कि रात में तकिए को अपने लंड से रगड़ कर चोद देता था और झड़ कर उसे गीला कर देता था.

एक दिन मेरे दोस्त ने मुझे एक जबरदस्त ब्लू फिल्म दी.
ये फिल्म इतनी कामुक थी कि मैंने बहुत जोश के साथ मुठ मार दी.

मैंने एक बात पर गौर किया कि औरतों को चोदने के लिए ज़बरदस्त स्टैमिना और हट्टा कट्टा होना बहुत ज़रूरी है.
बस मेरे अन्दर एक धुन सी सवार हो गई कि शरीर मजबूत बनाना है. चूंकि मेरे अन्दर मुठ मारने की आदत थी जो मेरे शरीर को कमजोर बना देती थी.

अब मैं एक दिन में तो मुठ मारना नहीं छोड़ सकता था, इसलिए मैंने पहले खुद को संभाला. अगले दिन से दौड़ना शुरू किया. मैं रोज़ सुबह 4 बजे जागने लगा था. दौड़ना कसरत करना ये मेरा नियम बन गया था. सुबह उठने के बाद मैंने 4 कच्चे अंडे यूं ही पी जाता था और फिर दौड़ने के लिए निकल जाता था.

एक रविवार के दिन मैं करीब 3:55 पर सुबह अंधेरे में ही दौड़ने निकल गया. मुझे बस इतना पता था कि निकिता मैडम मेरे घर के पीछे वाली एक कॉलोनी में रहती थीं, लेकिन निकिता मैडम का घर कौन सा था, ये मुझे पता नहीं था.

इसलिए मैं उस दिन उनके घर का पता लगाने के लिए पीछे कॉलोनी में गया था. मुझे कॉलोनी में गए तकरीबन 4 बज कर कुछ ही मिनट हुए थे कि एक घर से बाइक स्टार्ट होने की आवाज़ आई. मैं छिप गया और देखने लगा कि आखिर इतनी सुबह कौन बाइक स्टार्ट कर रहा है. तभी मुझे एक औरत और एक आदमी की आवाज़ आई. वो दोनों आवाजें मुझे जानी पहचानी सी लगीं, तो मैंने उन पर नज़र मार कर देखा.

मुझे नज़र आया तो मैं एकदम चकरा गया. वह कोई और नहीं, निकिता मैडम और कनिया कंप्यूटर मास्टर था. असल में वह कंप्यूटर मास्टर एक प्राइवेट मास्टर था, जो स्टूडेंट्स को कंप्यूटर सिखाता था.

मैं पूरा मामला समझ गया कि इन दोनों का चक्कर चल रहा है. उस समय निकिता मैडम जिस नाइटी में थीं, अगर कोई देख लेता .. तो उसी समय उनकी नाइटी उठा कर उन्हें वहीं के वहीं चोद देता. मैडम एकदम धंधे वाली रंडी लग रही थीं. उस वक़्त मेरा लंड तो तूफानी अंदाज में खड़ा हो गया था, लेकिन मैंने खुद को रोका.

इस घटना के बाद मुझे समझ आ गया था कि मैडम को लंड लेने की आदत है. इनको पटाने के लिए कुछ न कुछ करना पडेगा.

इसके बाद 3 महीने में मैंने दौड़-दौड़ कर बहुत स्टैमिना बना लिया था.

फिर मैंने सोचा क्यों न मस्सल हाउस (एक जिम) ज्वाइन कर लूं. क्योंकि मुझे तगड़ा और हट्टा-कट्टा बनना था.
उस वक़्त जिम के लिए 100 रुपया लगता था जो मेरे लिए कोई ख़ास बात नहीं थी.

मेरे घर वालों को लगता था कि लौंडा इसलिए कसरत कर रहा है कि पुलिस, आर्मी के लिए जाएगा.
लेकिन उन्हें क्या पता था कि लौंडा को तो बस निकिता मैडम को चोदना था.

मैंने जिम ज्वाइन किया और वहां के ट्रेनर से मदद ली, जो कि नहीं लेना था. वो मुझे ऐसे-ऐसे वर्कआउट करवाता था कि मैं फट कर चार हो जाता था.

फिर 3-4 महीने तक मैंने जम कर बॉडी बनाता रहा. इसी बीच मैं मैडम की हर बात को मान कर उनकी नजरों में अपनी अच्छे लड़के की छवि बनाने लगा था.

उसी साल अक्टूबर में मेरा +2 के पहले साल की परीक्षा शुरू हुई. मैं नकल करने की पर्ची बना कर ले जाता था. मेरे एकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडीज, अर्थशास्त्र के पेपर बहुत अच्छे गए थे.. बस इंग्लिश में मैं थोड़ा लुल साबित हो गया था.

फिर क्या किस्मत पाई थी मैंने, उसी दिन निकिता मैडम कक्ष निरीक्षक बन कर आई थीं.

मैं मैडम को देखने के चक्कर में ये भूल गया था कि मेरे जेब में नकल भरी पड़ी थी.

वैसे तो शुरूआत के एक घंटे तक मैं संभाल संभाल कर नकल निकाल कर लिखता रहा.

कुछ देर बाद मैंने एक सप्लिमेंट कॉपी मांगी, तो मैडम मेरे पास आईं और मुझे कॉपी दे दी. उस दिन निकिता मैडम ने क्या मस्त इत्र लगाया था, मैं एकदम मदमस्त हो गया था.

लेकिन तभी निकिता मैडम मेरी जेब की तरफ देखने लगीं, तो मैं बहुत घबरा गया.

उन्होंने नजरअंदाज करते हुए बस कॉपी पर हस्ताक्षर किए और चली गईं.

मैं एक वक़्त के लिए तो घबरा गया था कि आज रायता फ़ैल जाएगा.
लेकिन फिर भी मैं 8 मार्क्स के सवाल को जैसे भी करके छाप दिया और समय खत्म होने के बीस मिनट पहले मैं फ्री हो गया.
उस टाइम मैं अपने सारे पेपर समेट कर बैठा रहा.

एक लड़का मैडम से बोला कि उसे शौचालय जाना है.
मैडम बोलीं – पेपर टेबल पर रखो और चले जाओ .. बस 15 मिनट ही बाकी हैं.

लेकिन जब उस गधे ने अपनी जेब से रूमाल निकाला, उसी समय उसकी जेब से नकल का पुर्जा निकल गया और मैडम ने देख लिया.

फिर जो हुआ उसके बाद एक नहीं, दो नहीं, सात लड़के पकड़े गए. मैं इतना डर गया था कि मैं जेब में हाथ डाल कर अन्दर-अन्दर से थोड़ा जोर दे कर नकल फाड़ने लगा ताकि जेब खाली हो जाए और पुर्जा पैंट के अन्दर फंसा रहे.

मैडम बारी बारी से सभी की तलाशी ले रही थीं. जैसे-जैसे मैडम मेरे पास आ रही थीं, मैं वैसे-वैसे ही जेब को ज़ोर दे रहा था और अचानक से मेरा जेब फट गई और पुर्जा मेरे पैंट में अन्दर घुस गया.

वो तो अच्छा हुआ कि मेरी पैंट के पांयचे से पुर्जा नीचे नहीं निकला. ये महसूस करके मैं थोड़ा शांत रहा और मैंने चैन की सांस ली.

जब मैडम मेरे पास आईं तो बोलीं- उठो.
मैं उठ गया.

फिर मैडम बोलीं- तुम्हारे पास तो होगा ही. मैंने तभी गौर किया था.
मैं कहने लगा- नहीं मैडम, मेरे पास नहीं है.

लेकिन मैडम बहस करने लगीं और बोलीं- ठीक है, अपने हाथ ऊपर करो. मुझे चैक करना है.

मैं अब घबरा गया.

असल में मुझे अब पुर्जा से कोई समस्या नहीं थी, अब जो समस्या थी, वह ये कि मेरी जेब फट गई थी और ऊपर से मैंने अंडरवियर भी नहीं पहना था.

मैं मैडम को मना करने लगा. मैंने एक बार नहीं 4-5 बार उन्हें मना किया. मगर मैडम का शक इससे और बढ़ गया.

फिर मैं भी चुप हो गया और मैंने मन में सोचा कि लो डाल लो हाथ और पकड़ लो लंड.

जैसे-जैसे निकिता मैडम मेरी जेब में हाथ घुसाने लगीं, मेरा लंड टाईट होने लगा. फिर मैडम जैसे ही पूरा हाथ अन्दर डाला, उनका हाथ सीधे मेरे टाईट लंड से लड़ गया.

उन्होंने मेरा खड़ा और मोटा लंड स्पर्श किया और चुपचाप हाथ निकाल लिया.
वो मेरी तरफ देखने लगीं.

मैंने देखा कि मैडम का मुँह लाल हो गया था. मैंने नजरें नीचे कर लीं और मैडम ने इसके बाद तलाशी बंद कर दी.

अब मैडम ने जिन लड़कों की जेब से पुर्जा निकाले थे, वो उन्हें ही हेडमास्टर जी के ऑफिस लेकर चली गईं.

मुझे तो मज़ा ही आ गया था. जब मैडम ने मेरे लंड को छुआ. उसके बाद से मैं मैडम की नज़रों में आ गया था.

अब जब भी उन्हें कोई काम होता था, वह मुझसे ही कहती थीं.

मुझे अब बस निकिता मैडम के इशारे मिलने की देरी होती थी.
मैं मैडम से इतने अच्छे तरह से बात करता था कि वह मुझे 2-3 चॉकलेट भी दे देती थीं.

अब मैं जिम के वक़्त मैडम को सोचते हुए खूब जोश के साथ जिम किया करता था.

एक रविवार की शाम मैं जानबूझ कर मैडम की कॉलोनी में चला गया.

उस दिन मैंने बस एक ट्राउजर और शर्ट पहनी थी. उस दिन मुझ पर मेरी किस्मत मेहरबान थी.

मैं तो बस निकिता मैडम के घर के पास से जा रहा था, ये देखने कि कहीं वह कनिया कंप्यूटर मास्टर तो नहीं है.

तभी मैडम ने मुझे देख लिया और आवाज़ दे दी.
मैंने पीछे मुड़ कर देखा, तो कोई नहीं था.

मैडम बोलीं- ऊपर देखो.
मैंने मैडम को देख कर ‘हैलो मैडम ..’ बोला.

मैडम ने पूछा- इधर कहां जा रहे हो?
मैं बोला- बस अपने एक दोस्त के घर आया था.

मैडम बोलीं- ओह … आओ मैं तुम्हें कुछ देना चाहती हूं.

मैं तो जैसे सपने देख रहा था. उनकी बात सुनकर ऐसा लगा कि मैडम चुत देने बुला रही हैं.
लेकिन जो हकीकत थी वो सामने थी.

आज मुझे ऐसा मौका मिल गया था. मैंने एक पल की भी देर नहीं की और अन्दर चला गया.

मैंने उस समय मैडम को नाइटी में देखा. ये बिल्कुल वैसी ही नाइटी थी, जैसी मैंने उस दिन भोर में देखी थी.

नाइटी एकदम कंटाप .. ऊपर से मैडम ने अपनी नाक में नथ पहनी हुई थी. मैडम साली पूरी छिनाल लग रही थीं.

मेरा लंड टाईट हो गया था, वह तो नसीब अच्छा था, जो मैंने अंडरवियर पहना था. नहीं, तो मैडम पहले उसे ही देखतीं.

मैडम बोलीं- आओ रिची बैठो.
मैं सोफे पर बैठ गया.

फिर मैडम मुस्कुरा कर बोलीं- तुम्हें केक पसंद है ना!
मैं बोला- हां मैडम.

वो अपनी गांड

मटकाते हुए अन्दर गईं. मैडम ने एक ग्लास जूस और एक केक लाकर मुझे दिया.

मैडम मेरे पास आकर बैठ गईं और बोलीं कि रिजल्ट आने में अभी समय लगेगा.
मैं बोला- ओह .. कब तक?

जब कि ये बात मुझे भी पता था, फिर भी मैं अंजान बना रहा.

मैडम बोलीं- शायद 4 महीने लगेंगे.

फिर मैडम ने मेरे सीने पर गौर करते हुए कहा- तुम जिम करते हो क्या?
मैं बोला- जी मैडम.
मैडम ने मेरे हाथ को छुआ और बोलीं कि कितने मजबूत हैं तुम्हारे हाथ.

मैं इतना गधा तो नहीं था कि निकिता मैडम के इशारे को नहीं समझ सकता था.
लेकिन तब भी मैं वास्तव में पुष्टि करना चाहता था कि आखिर मैडम क्या चाहती हैं.

अब मैडम ने मुझे किस तरह से मजा दिया ये मैं अपनी इस हॉट टीचर सेक्स स्टोरी के अगले भाग में लिखूंगा.

Part 2 – Physics wali ma’am ko unke ghar par choda – Part 2

Pati Ne Kaha Kisi Se bhi chudwa bs bacha chaiye muje Fir Maine…

“मैं : – रमेश जी आप मुझे चोदो मेरे पति को बेटा चाहिए, आप चाहें तो मैं रोजाना रात को आपके पास आ सकती हूँ। रमेश जी : – पर ये बात आपके पति को मालूम हो गया तो। मैं :- पति ही बोले हैं किसी से भी चुदवाने को, आप मुझे अच्छे लगते हैं”

बेटे के लिए चुदाई : मेरा नाम संगीता है। मैं हरिद्वार की रहने वाली हूँ अपने पति के साथ दिल्ली में रहती हूँ। मेरा पति मुझे ऐसी दोराहे पर खड़ा कर दिया है जहाँ मुझे पति के होते हुए भी पति के कहने पर मुझे किसी गैर मर्द से चुदवाना पड़ा। दोस्तों कोई भी एक नेक औरत ये काम नहीं करेगी पर आपको क्या पता ऐसी कई औरतें हैं जो किसी ना किसी दबाब में ऐसे काम कर रही है जो नहीं करने चाहिए।

आज मैं आपको अपनी पूरी कहानी Hindi Sex Stories पर बताने जा रही हूँ। मेरी ये सच्ची कहानी है। कब बोला कैसे बोला क्यों बोला आखिर पति की क्या मज़बूरी थी जो की मुझे किसी और के पास भेजने में हिचकिचाया नहीं।

दोस्तों मेरी उम्र तीस साल है। मैं बदरपुर दिल्ली में रहती हूँ। मेरी दो बेटियां है। मैंने लव मैरिज शादी की है परिवार के खिलाफ होकर। शादी में मिली थी और इन्होने मुझे परपोज किया और था और मैं पागल हो गई शादी करने को। यहाँ तक की मैं इनसे ज्यादा पढ़ी लिखी हूँ। पर इनके झांसे में आ गई। जैसा की अधिकतर लड़के वो दिखने की कोशिश करते हैं जो होते नहीं हैं। मैं समझी कुछ और ये हैं कुछ। मैं फंस गई।

दिल्ली आई जो जो ख्वाब दिखाए थे एक भी पुरे नहीं हुए। बोले बड़े फ्लैट में रहते हैं कंपनी में मैनेजर हैं। यहाँ आकर देखि तो आठ फुट बाय आठ फुट के कमरे में रहते हैं। एक प्लास्टिक के प्लेट बनाने वाली कंपनी में काम करते हैं। मैनेजर हैं पर सिर्फ तीन मजदुर का। दोस्तों आप खुद सोचिये जो लड़की बिंदास हैं, खूबसूरत हैं, हॉट है, पढ़ी लिखी हैं, बदन मखमली है, सेक्स की देवी लगती हैं उसकी शादी ऐसे टुच्चे इंसान से हो जाये तो क्या करे एक औरत। माफ़ करना दोस्तों मेरा बन आपका दिमाग ख़राब करना नहीं है पर क्या करें अपना फ़्रस्ट्रेशन निकालने का यही मौक़ा है और कहानी सुनाने का भी। ये तो किसी और को बता भी नहीं सकती। घर वाले को भी नहीं, नहीं तो वो कहेंगे। चूत में खुजली हो रही थी तब ना ये गलत लड़के से शादी की हैं। दोस्तों बात भी सही है सेक्स और हवस इंसान को गलत काम और गलत रिश्ता रखने को मजबूर करता है.

दिल्ली आने के बाद मुझे फटाफट दो बच्चे हो गए। हालात ठीक नहीं रहे हालात दिन-ब-दिन बदतर होते गए। धीरे-धीरे करके मैं भी जॉब करने लगी क्योंकि पति की कमाई उतनी नहीं थी। घर से बाहर जब निकले तो पता चला दुनिया क्या होती है तब मुझे समझ आया कि मैंने जल्दबाजी में शादी कर ली और बहुत बड़ी गलती कर ली मेरे जैसे लड़की को तो बहुत अच्छा पति मिल सकता था पर शायद चूत की खुजली और जल्द चुदवाने के चक्कर में शादी कर ली। मुझे दिल्ली के काफी नॉलेज हो गई थी कई महिलाओं से भी मिली जो कि अपनी मस्त जिंदगी जी रहे थे कई ऐसे महिलाओं से भी मिले जो शादीशुदा होकर भी घर के बाहर रिश्ते रखे हुए थे।

1 दिन में पति पत्नी दोनों ने मिलकर ही सोचा तू जिंदगी ऐसे नहीं चलेगी एक बेटा होना बहुत जरूरी है क्योंकि इनके दोस्तों को बेटा था चार दोस्तों में से तीन दोस्तों को बेटा ही था तो पहले तो इनको लगा कि मेरी गलती है जो कि मैं बेटे को जन्म नहीं दे पा रही हूं फिर मैंने उनको यूट्यूब के चैनल दिखाएं और समझाया कि बेटा और बेटी होना और उस पर निर्भर करता है अब वह समझने लगे कि गलती उनकी है इसी वजह से बेटा नहीं हो पा रहा है। जहां में रहते थे पास में ही रमेश जी रहते थे रमेश जी बहुत अच्छे इंसान थे मेरे पति के दोस्त थे और मेरे पति के कम मेरे दोस्त अच्छे थे क्योंकि जब भी मुझे कोई बात पूछनी होती थी कोई सहायता लेनी होती थी तो मैं उनसे संपर्क करते तो उनका चर्चा अपने घर में भी करते रहती थी मेरे पति को लगता था कि शायद मेरा और रमेश जी का संबंध है पर ऐसी बात थी ना हम दोनों एक अच्छे दोस्त हैं धीरे-धीरे करके वह मेरे पति के भी दोस्त बन गए।

पहले तो उन्होंने मुझे समझाया कि हम दोनों ट्राई करते हैं अगर काम बन गया तो बहुत अच्छा है उन्होंने कुछ मार्केट से टेबलेट लेकर आए गोलियां खाई अपने लौड़े पर तेल लगाया। और दिन में 2 बार चुदाई करने लगे करीब 3 महीने तक हम दोनों ने मिलकर काफी कोशिश की पर इसका कोई फायदा नहीं हुआ मैं प्रेग्नेंट नहीं हो पाए अब मेरे घर में लड़ाई होने लगी। मैं कहती थी जब तक तुम मुझे खुश नहीं कर पाओगे जब तक तुम मेरी वासनाओं को शांत नहीं कर पाओगे जब तुम अपने वीर्य को लबालब मेरी चूत मैं नहीं भरोगे तब तक मैं कैसे प्रेग्नेंट होंगे और जब तक मैं प्रेग्नेंट नहीं होती तो कैसे बेटा और बेटी होगा।

एक दिन मैंने कह दिया कि शायद तुझ में ही कमी है इसी वजह से मैं प्रेग्नेंट नहीं हो पा रही तेरी उम्र ज्यादा हो रही है तो मुझे सही से चोद नहीं पा रहे हो उस समय मेरे पति बोले जब ऐसी बात है तो एक काम कर तू किसी और से ही चुदवा लो।

पहले तो गुस्से में बोले थे शायद मैं सही बोल रहा हूं दूसरे दिन भी वह मेरे से डिस्कस करने लगे रात को मैंने बोला वह सही बात है अगर तू किसी और से संबंध बना लेते हैं और बेटा पैदा होता है तो बेटा मेरा और तुम्हारा ही होगा किसी और का नहीं होगा फिर हम लोग यहां से कमरा खाली कर देंगे और रहेंगे। मुझे भी सही लगा अब मुझे दो दो लौड़े का स्वाद चखने को मिलेगा इससे बढ़िया क्या बात हो सकती हैं।

एक दिन की बात है दोनों बेटियां और मेरे पति मेरी माँ के यहाँ फंक्शन थे वह चले गए और मैं बहाना बना दी अपने माँ से की मेरी तबियत ठीक नहीं है। मैं दिल्ली में अकेली थी। मैं रात के करीब 9 बजे रमेश जी के घर पहुंच गई। रमेश जी दिल्ली में अकेले हैं। उनकी पत्नी गाँव में है। मन से हर एक बात को शेयर करते थे वहां जाकर मैंने उनको सारी बातें बताई और बोली कि मैं आपके साथ सेक्स करना चाहती हूं संबंध बनाना चाहते हैं ताकि मैं एक बेटे को जन्म दे सकूँ। किसी मर्द को जब चूत मिल रहा हो तो कौन मना करेगा।


मैं बोली रमेश जी आप मुझे चोदो मेरे पति को बेटा चाहिए, आप चाहें तो मैं रोजाना रात को आपके पास आ सकती हूँ। रमेश जी बोले : – पर ये बात आपके पति को मालूम हो गया तो। मैं :- पति ही बोले हैं किसी से भी चुदवाने को, आप मुझे अच्छे लगते हैं

फिर क्या था दोस्तों बात उनको समझ आ गई थी। उन्होंने कहा ठीक है मुझे भी चुत नहीं मिल रहा है मुझे चुत मिल जाये और आपको भी इसका फायदे मिले तो हर्ज क्या है ? और फिर दोनों हसने लगे। दोनों एक दूसरे को बाहों में भर लिए। दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। वो कहने लगे क्या बताऊँ आपके बारे में सोच कर कितने बार मूठ मारा हूँ पता है अब तक मैंने करीब दस किलो वीर्य आपके नाम से गिरा चूका हूँ बाथरूम में और पोछ चूका हूँ तौलिया में। तो मैं बोली अब इसकी नौबत नहीं आएगी अब आप सीधे मेरी चूत में डालना अपना वीर्य।

दोस्तों फिर क्या था धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे के कपडे उतारने लगे। वो भी खुश थे मैं भी खुश थी। ऐसा लग रहा था कुछ खोया हुआ मिल गया। उनका गठीला बदन सुन्दर चेहरा देखकर मैं अपने आप को संभल नहीं पाई और उनको वाइल्ड तरीके से चूमने लगी। दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। वो मेरी बड़ी बड़ी गोल गोल चूचियों को दबाने लगे। मेरी चूतड़ को सहलाने लगे। कभी कभी वो गांड में ऊँगली भी देते पर मैं मना कर देती। फिर वापस वो गांड और पीठ सहलाने लगते।

उसके बाद उन्होंने मुझे बेड पर लिटाया और फिर मेरी चूत चाटने लगे। मैं अपनी चूचियों को खुद ही दबा रही थी। और होठ मेरे सुख रहे थे। मैं मोअन कर रही थी पुरे कमरे में एक ही आवाज आ रही थी आह आह आह आह ओह्ह ओह्ह्ह ओह्ह आउच धीरे से प्लीज निप्पल दर्द करता है दांत लगाने से आह आह आह आ। और पहिए उन्होंने मेरी चूत में ऊँगली करने लगे। मेरी चूत गीली हो गई थी। वो जब भी ऊँगली घुसाते उनका ऊँगली गीली हो जाती वो अपने ऊँगली को मुँह में ले लेते और चाट जाते।

दोस्तों अब मैं और भी गरम हो गई थी क्यों की वो मेरी चूत को छेड़ रहे थे। मैं उनको इसारे से बोली चूत चाटो। वो तुरंत ही मेरी चूत चाटने लगे अब मैं उनके सिर को पकड़ ली और जोर जोर से चूत चटवाने लगी। अब मैं गांड उठा उठा पर उनमे मुँह में धक्के देने लगी। उन्होंने चूत चाट चाट कर साफ़ कर दिया था। फिर मैं बोली अब मुझे चोदो मैं पागल हो जाउंगी अगर थोड़े देर तक लौड़ा नहीं मिला तो। वो तुरंत ही अपना लौड़ा मेरी चूत पर लगाया और जोर जोर से पेलने लगे। मैं झटके से हिल रही थी। मेरी चूचियां धक्के से आगे पीछे हो रही थी।

इसके बाद जरूर पढ़ें चार लडकों को कमरे में बुलवाकर मैं चुदवाया बिना किसी प्यार दुलार के
दोस्तों वो मेरी चूचियों को मसल रहे थे। गांड में ऊँगली कर रहे थे। मैं भी अपने पैरों का फंदा बना ली थी। वो जोर जोर से मुझे चोदने लगे। मुझे तब एहसास हुआ चुदाई में बहुत मजा है मैं गलत फंस गई थी। पति तो चोद भी नहीं पाता है जितना रमेश जी मुझे चोद रहे हैं। दोस्तों मैं अब रमेश जी के ऊपर चढ़ गई वो निचे। उनका लौड़ा पकड़ी करीब ९ इंच का था। मोटा और काला मैं लौड़े के पकड़ पर अपने चूत पर लगाई और बैठ गई। पूरा का पूरा लौड़ा मेरी चूत में समा गया। करीब एक मिनट तक आँख बंद कर के बैठी रही। तभी उन्होंने निचे से झटका दिया और मेरे बदन में करंट दौड़ गया।

दोस्तों अब मैं ऊपर निचे होने लगी लौड़ा मेरी चूत में पूरा जा रहा था। वो मेरी दोनों बूब्स को पकड़ रहे थे मैं अब जोर जोर से चुदवाने लगी। करीब दस मिनट तक ऐसे ही चुदवाती रही। फिर मैं घोड़ी बन गई अब वो मुझे पीछे से चोदने लगे। मेरी चौड़ी गांड उनको बहुत पसंद आने लगा था वो बार बार मेरी चूतड़ पर थप्पड़ मारते। मैं एन्जॉय कर रही थी।

उन्होंने फिर मुझे लिटा दिया और अब जोर जोर से चोदने लगे। मैं थक रही थी। मैं दो तीन बार झड़ चुकी थी। अचानक उन्होंने आआ आआ आआ आए होऊ उफ्फ्फ आवाज निकलने लगे और सारा वीर्य मेरी चूत में गिरा दिए मैं अपना शरीर टाइट कर ली उनके पीठ पर अपना नाख़ून का निशान बना दी। और फिर दोनों ढीले हो गए और एक दूसरे को चूमते हुए सो गए।

मैं तक गई थी हिल भी नहीं पा रही थी। और गहरी नींद में चली गई। करीब एक घंटे बाद मेरी नींद आवाज होने के कारन उठी तो देखि मैं वैसे ही नंगी सो रही हूँ और रमेश बाबू मेरी जिस्म को निहार निहार कर शराब पि रहे थे। उन्होंने फिर से मेरी चुदाई की और फिर दोनों सो गए।

दोस्तों ऐसा अभी तक चल ही रहा है अभी तक प्रेग्नेंट नहीः हुई हु। अब पति कहते हैं शायद तुम सही से चुदवा ही नहीं रही हो। देखो तुम गांड मारने में और लंड चूसने में अपना समय बर्बाद नहीं करना बस चुदाई पर ध्यान देना अब मैं भी चुदाई पर ही फोकस कर रही हूँ। मैं आपको अपनी कहानियां नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर शेयर करते रहूंगी। आप प्लीज फिर से मेरी कहानियां पढ़ने जरूर आइयेगा इस वेबसाइट पर प्लीज।

Dever Ne Bedardi Se Choda Muje Dussehra Ke Din

दोस्तों जब किसी का पति साथ नहीं हो तो उसके साथ क्या क्या होता है आज मैं आपको अपनी कहानी इसी वेबसाइट यानी की Hindi Sex Stories पर सुनाने जा रही हूँ। ये कहानी कल की है आज मैं आपको पूरी बात बताउंगी की मेरा देवर कैसे मुझे चोदा दशहरा के दिन यानी दुर्गा पूजा के दिन।

मैं भी उसी रंग में रंग गयी क्यों की कोई लंड के बिना कितना दिन तक रह सकता है आखिर चुदने का मन तो सबको करता है इसलिए मैं भी उसके लम्बे मोटे लंड को देखकर बर्दाश्त नहीं कर पाई और दे बैठी अपनी चुत अपने से छोटे देवर को और पूरी रात चुदी अपनी गांड उठा उठा कर।

मेरा नाम काजल गुप्ता है मैं उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूँ। मैं गाँव में रहती हूँ हॉट हु सेक्सी हूँ। बड़ी बड़ी गोल गोल पर टाइट चूचियां है। गोल गांड और मोटे जांघ परन्तु कमरे बहुत पतली ही गोरी हूँ लम्बी चौड़ी और सुन्दर हूँ। जवानी भरपूर है इसलिए जब भी कोई मुझे आगे से देखता है उसकी नजर मेरी चूचियों की उभार पर होता है और जो मुझे पीछे से देखता है उसकी नजर मेरी गांड को गोलाई पर होता है।

मुझे कोई देख ले और मुझे रात में याद नहीं करे जब वो इंसान अपनी बीवी को चोदता है ऐसा हो नहीं सकता है। यानी को जब वो अपनी बीवी को चोदेगा या अपनी गर्लफ्रेंड को चोदेगा तो मुझे याद करेगा क्यों की मैं सेक्स की मल्लिका हूँ। पर मुझे एक साल से चुदाई का मौक़ा नहीं मिल पाया जब की दो साल ही मेरी शादी को हुआ है।

मेरे पति चाइना बॉर्डर पर है और सेना में अफसर है। तो मैं अपनी ससुराल में ही रहती हूँ। घर में माँ पापा के अलावा मेरा एक देवर है जो दिल्ली में पढाई करता है। पर दशहरा में घर आया और और भी ये कांड हो गया। और ये बात कल की ही है और मैं कैसे चुद गयी अब बता रही हूँ।

पापा मम्मी निचे फ्लोर पर रहते हैं। मेरा कमरा ऊपर फ्लोर पर है और वही पर देवर जी का भी कमरा है। कल व्रत खोली और खाना खाई तो मेरा पैर और शरीर में काफी दर्द होने लगा था। और मेरे सर में भी काफी दर्द हो गया था। तो ऊपर जल्दी ही अपने बेड पर आ गयी। देवर जी खाना खाकर अपने दोस्त के पास चले गए और वो वह से करीब ११ बजे रात में आये तब तक मम्मी पापा सो गए थे। वो दोनों जल्दी हो जाते हैं। मैं जगी थी।


वो मेरे कमरे में आये तो देखे की मैं थोड़ी परेशां हूँ। उन्होंने पूछा की क्या हुआ भाभी तो बता दी की व्रत के चलते ही पेन हो रहा है पुरे शरीर में। वो बोले मैं बाम लगा देता हूँ। मैं मना करते रही फिर भी वो अलमीरा से बाम निकाल लिए और आ कर मेरे सर पर लगाने लगे। मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था मैं लेटी थी और वो बैठे थे बेड पर। धीरे धीरे मैं निढाल हो गयी और हाथ पैर फैला दी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था उनका सहलाना।

और मैं कपडे भी ऐसी पहनी थी जो सेक्स थी पिंक कलर की नाईटी। उसपर भी मैं ब्रा नहीं पहनी थी। वो मेरी गोल गोल चूचियां बड़ी बड़ी चूचियां साफ़ साफ़ दिख रही थी। नाईटी के ऊपर ही मेरे निप्पल का साइज तक दिख रहा था और चूचियाँ तो साफ़ साफ़।

तो उनका मन शायद डोल गया और बिच बिच में वो मेरी चूची को छूने लगे। पहली बार तो मुझे लगा की गलती से हो गया होगा पर बाद में ऐसा लगा की नहीं वो जानबूझकर कर रहे हैं। क्यों की एक बार मैं अपना हाथ उनके लंड पर लगाई जानबूझ कर ताकि उनको लगे की गलती से लग गया। तो महसूस की लंड उनका काफी टाइट हो गया था। मैं समझ गयी वो क्या चाहते हैं।

मैं आँख खोल कर देखि तो वो बोले अब कैसा लग रहा है। मैं क्या बोलती मैं तो अब दो बीमारी से ग्रसित हो गयी अब वासना की भी लग चुकी थी। मैं बोली। सर का दर्द तो खत्म हो गया पर पुरे शरीर में दर्द हो रहा है। तो वो बोले मैं तेल लगा दूँ। उनकी बात में लड़खड़ाहट थी। मैंने कहा नहीं नहीं माँ को पता चल जाएगा या किसी को पता चल जाएगा तो वो क्या कहेंगे और मैं मुश्किल में आ जाउंगी।

इतने में वो तेल ले आये और बोले किसी को नहीं पता चलेगा। और उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया और मेरे पैर में पहले तेल लगाए और मालिश किये फिर उन्होंने जांघ तक नाईटी उठाई और वह तक तेल लगाई। उनके हाथ लगत्ते ही मेरी चूत गीली होनी शुरू हो गयी। और फिर उन्होने कहा मैं तो चाहता हु आपके पीठ में भी लगा दूँ पर कैसे लगाऊं। दोस्तों अब असली खेल हुआ था शुरू।


मैं बोली जब दरवाजा बंद ही कर दिए हो और ये भी कसम खाये हो कोई नहीं जानेगा और रात के एक बजने बाले हैं फिर क्या करना। मैं उल्टा हो गयी और बोली लगा दो तेल। उन्होंने मेरी नाईटी ऊपर कर दी गांड बड़ी बड़ी गोल गोल देखकर वो तो पागल हो गए। हाथ थरथराने लगा उनकी बोली में भी थरथराहट हो गयी और हाथ काँप रहे थे मेरे जिस्म को देखकर। पीठ पर उन्होंने दो तीन बार ही बात फेरा होगा तेल लगा कर की उन्होंने तुरंत ही मेरी पेंटी में गांड की तरफ हाथ घुसा दिया और मेरी चूतड़ को सहलाने लगे।

अब वो दबाने लगा गांड को मैं उल्ट गई तो मेरी बड़ी बड़ी चूचियाँ देखकर वो पागल हो गए। उनकी आँख खुली ही रह गयी उन्होंने तेल हाथ में लिए और मेरी चूचियों पर लगाना शुरू कर दिया। अब तेल तो गया तेल लेने मेरी चूचियां तन गयी मेरे होठ लाल हो गए। मेरी आँख लाल लाल होने लगी। और फिर क्या करती मेरे जिस्म में ज्वाला भड़क गयी थी। मैं अपनी तरफ खींच लिया और उनका बाल पकड़ कर उनके होठ पर होठ रख दी और दोनों भी वाइल्ड हो गए।

पागल हो गयी दोनों के लिप लॉक हो गए। मेरी बड़ी बड़ी चूचियां वो पकड़ पर दबाने लगे मैं लंड पकड़ ली। तुरंत ही उन्होने अपने कपडे उतार दिए मैंने भी पेंटी निकाल दी और नाईटी ऊपर से बहार कर दी। वो मेरे ऊपर चढ़ गए पहले उन्होंने ऊपर से निचे तक मेरे जिस्म को अपनी जीभ से छाता चाहे कान हो गर्दन हो होठ हो चुकी हो निप्पल हो मेरी नाभि हो चुत हो चुत के बाल हो जांघ हो घुटना से पैर की उंगलि से तलवे तक।

इतने में भी मैं पागल हो गयी और मैं उनके लंड को अपनी मुँह में ले ली और चूसने लगी। अब वो निचे की तरफ और मैं ऊपर की तरफ वो अपनी लंड को मेरी मुँह में दे दिए और वो खुद अपना मुँह मेरी चुत पर ले गयी वो मेरी चाट रहे ते चुत और मैं उनकी लंड को चूस रही थी।

ओह्ह्ह्हह्ह चूत से सफ़ेद सफ़ेद क्रीम निकलनी शुरू हो गयी। मैं पागल हो गयी उनका लंड मेरे पति के लंड से मोटा और बड़ा था तो जल्द से जल्द अपनी चुत में चाह रही थी। मेरी चुत में अपना वीर्य डाले ताकि मेरी वासना को शांति मिल सके पर देवर जी मेरी चूत को चाटे जा रहे थे। वो अपनी उँगलियाँ डालते तो कभी जीभ डालते। ऐसा लगता था वो कुछ खोद पर मेरी चुत से निकाल रहे हों और फिर खा रहे हो।


पर मेरे से रहा नहीं गया मैं अपना पैर फैला दी। और बोली मत तड़पाओ मेरी जान। वो भी अब मेरे पैर के बिच में आकर दोनों टांगो को अलग अलग किया और फिर अपना लंड का सुपाड़ा मेरी चूत पर लगाया और जोर से घुसा दिया। पूरा लौड़ा मेरी चुत में समा गया। मेरी मुँह से सिर्फ आह आह आह आह ओह्ह्ह ओह्ह्ह कीआवाज निकल रही थी।

वो झटके देते तो मेरी चूचियां हिल जाती और मैं दो इंच ऊपर की और चढ़ जाती। और फिर वापस अपनी जगह पर जोर जोर से धक्के दे रहा था और मेरी चूत की गर्मी शांत हो रही थी। कभी वो मेरी होठ को चूसता तो कभी दूध पीता कभी गांड में ऊँगली डालता तो कभी वो मेरी बगल यानी कांख चाटता।

ओह्ह्ह्हह्ह मजा आ रहा था। मजे ले रही थी दे रही थी। फिर मैं देवर को निचे कर के मैं ऊपर चढ़ गयी और उनका लंड चुत में और बैठ गयी। पूरा लंड मेरी चूत में समा गया और फिर चुदवाने लगी। हम दोनों एक दूसरे को पूरी रात खुश करते रहे। कभी ऊपर से कभी निचे से कभी लेट कर कभी बैठ कर। मेरी चूत को गर्मी करीब सुबह पांच बजे शांत हुए थी।

फिर क्या था दोस्तों आज दिन में भी मेरी चुदाई की देवर जी ने और आज की रात फिर से होगी। मैं अपनी जवानी के एक कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर जल्द से जल्द सुनाने जा रही हूँ। आप रोजाना आईये इस वेबसाइट पर कहानियां पढ़िए जहा असली और हॉट सेक्स कहानी होती है।

Aunty Ki Gaand Chaati Aur Gande Tarike Se Chudai

दोस्तो, कैसे हो सभी लोग!

आज मैं एक नई गंदी सेक्स कहानी चुआई की पेश करने जा रहा हूं. यह मेरी और मेरी आंटी की है. आपको पढ़कर बहुत मजा आएगा. लंड वालों का लंड खड़ा हो जाएगा और चूत वालियों की चूत गीली हो जाएगी. लड़कियां अपनी चूत में उंगली डालने लगेंगी. ये बहुत गरम सेक्स स्टोरी है.

दोस्तों आप सबको पता ही होगा, मेरा लंड 8 इंच का है … और मुझे गंदी चुदाईयां बहुत पसंद हैं. खासकर मुझे औरतों की चूत चाटना और गांड में जीभ डालना, उनकी बगलों को चाटना और उनका पेशाब पीना. यह सब मुझे बहुत पसंद है.

ये गंदी सेक्स कहानी चुआई की कुछ महीने पहले की है. उस समय दिसंबर 2019 चल रहा था. मुझे कुछ काम से दिल्ली जाना था. मुझे अपनी परिचित की एक आंटी की याद आई. इन आंटी से मेरी फोन पर बात होती रहती थीं और वो मुझ पर काफी फ़िदा थीं.

मैंने उनको फोन लगाया और उनसे बोला कि आंटी मुझे कुछ काम है तो दो-तीन दिन मैं आपके घर रुकूंगा.
उन्होंने कहा- बेटा कोई प्रॉब्लम नहीं है … तुम मेरे घर कभी भी आ सकते हो.

उनकी बात सुनकर मैं सुबह अपने घर से दिल्ली के लिए निकल पड़ा. मैं शाम को दिल्ली पहुंच गया. दिल्ली पहुंच कर मैंने आंटी जी को फोन किया.

उन्होंने बोला कि दिल्ली पहुंच गए?
मैंने कहा- हां आंटी मैं दिल्ली आ गया हूं … मुझे आप लेने आ जाइए.
उन्होंने बोला- बेटा अभी तो कोई है नहीं … आप ऐसा करो मेट्रो स्टेशन पर जाओ और टोकन लेकर मेट्रो से आ जाओ.
मैंने कहा- ठीक है. आप पता दे दीजिए.

आंटी ने मुझे पता बताया और मैं मेट्रो से उनके दिए पते पर जाने लगा. मैं मेट्रो स्टेशन से नीचे उतरा और मैंने रिक्शेवाले को वो पता बताया.

रिक्शेवाले ने मुझसे बोला- भैया 50 रूपए लगेंगे.
मैंने कहा- कोई बात नहीं भैया … आप मुझे कितनी देर में पहुंचा दोगे?
उसने बोला- मैं 20 मिनट में पहुंचा दूंगा.
मैंने कहा- ठीक है … जल्दी चलो.

वैसे भी दोस्तो, शाम के 7:00 बज चुके थे और मैं 7:30 बजे उनके घर पहुंचा.

जैसे ही मैं उस गली में आया, तो मैंने आंटी को फोन किया.

मैंने कहा- आंटी जी मैं आ चुका हूं, आपने जहां बताया था मैं वहां पर आ गया हूँ.
उन्होंने बोला- ओके इसी गली में सीधे आ जाओ … तीन नंबर वाला मकान है … आ जाओ. मैं बाहर रेलिंग पर मिलूंगी.

जैसे ही मैं गली में चलने लगा तो थोड़ी दूर चलने के बाद मुझे आंटी दिखाई दे गईं. मैं उन्हें देख कर खुश हो गया.

मैंने जाते ही आंटी जी के पैर छुए. मैं जैसे ही आंटी के पैर छूने नीचे झुका, तो उनके पैरों से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी. ऐसा लग रहा था कि अभी ही चाट जाऊं. पर क्या करता दोस्तो, मैं चुपचाप रह गया और अन्दर जाकर सोफे पर बैठ गया.

आंटी मेरे लिए चाय बना लाईं और मैं चाय पीने लगा.

मैंने आंटी जी से बोला- आप भी चाय ले लीजिए न.
उन्होंने बोला- बेटा मैं चाय नहीं पीती.
मैंने कहा- थोड़ी सी पी लीजिए.

उन्होंने कहा- चाय अच्छी नहीं होती … इससे फिटनेस सही नहीं रहती.
तो मैंने कहा- आप चिंता मत करें … मैं सब सही करवा दूंगा.
उन्होंने कहा- ओके आप जिद कर रहे हो तो पी लेती हूँ.

फिर आंटी जी ने एक कप में चाय ले ली और पीने लगीं.

चाय पीने के बाद उन्होंने कप को नीचे रख दिया और वो बाहर जाने लगीं. आंटी जैसे ही अन्दर गईं … मैंने अपनी आदत के चलते उनका झूठा गिलास उठा कर मुँह में लगा लिया और थोड़ी बची चाय पी ली. ये उन्होंने मुझे पीछे मुड़कर देख लिया और मुस्कुरा दीं.

आंटी बोलीं- मेरी झूठी चाय थी … तुमने क्यों पी ली?

मैं समझ गया था कि आंटी मुस्कुरा रही हैं.

मैंने बोला- मुझे आपकी झूठी चाय पीना अच्छा लगा.

उन्होंने कहा- सच में … क्या-क्या पी सकते हो?
मैंने कहा- मैं सब कुछ पी सकता हूं.

इस तरह की बातों से दोअर्थी बातों का दौर शुरू हो गया था. आंटी नॉटी होने लगी थीं.

मेरी उनके साथ कुछ छिपे हुए शब्दों में खुली खुली सी बात हुई, तो उन्होंने हंस कर बोला- कोई बात नहीं शाम को बात करेंगे, अभी अंकल पार्क से घूम कर आ रहे होंगे. मुझे उनके लिए खाना बनाना है. तुम घर में बैठो, मैं अभी आती हूँ.
मैंने कहा- ठीक है.

आंटी जी मुझे घर छोड़ कर सब्जी लेने के लिए बाजार चली गईं.
आधे घंटे बाद आंटी वापस घर आ गईं और तब तक अंकल जी भी घर पर आ गए थे.

आंटी जी ने उनके लिए खाना बनाया और मैंने उन दोनों से कुछ देर बात की.
अंकल जी की आज नाईट ड्यूटी थी, सो वे चले गए.

आंटी जी ने मेन दरवाजे पर कुंडी लगाई और बोलीं- हां अब बताओ तुम क्या क्या पी सकते हो?
मैंने समझ लिया कि आंटी चुदने के मूड में आ गई हैं.

अपने लंड को सहलाते हुए मैंने उनसे बिंदास कहा- मुझे बहुत गंदा काम करना पसंद है.

उन्होंने बोला- मुझे भी ये सब पसंद है. तुम शरमाओ मत और खुल कर बताओ.
मैंने आंटी से बोला- आंटी जी मुझे आपकी गांड के छेद में अपनी पूरी जीभ डाल कर चाटना है, आपकी चूत भी चाटनी है … और बगलें भी चाटनी हैं.

आंटी मदहोशी भरे स्वर में बोलीं- और क्या चाटना पसंद है?
मैं- मुझे आपके पैर भी चाटने हैं और अपना 8 इंच का लंड आपकी गांड में डालना है और चूत भी चोदनी है.
आंटी ने बोला- बस करो … अब बोलो मत बस सीधे काम पर लग जाओ. मुझे भी तुम्हारे जैसे लड़के की जरूरत है.
मैंने आंटी से बोला- ओके आप खड़ी हो जाइए.

वो खड़ी हो गईं.

मैंने आंटी की साड़ी उतार कर फेंक दी. फिर पेटीकोट ब्लाउज खोल कर आंटी को ब्रा पैंटी में खड़ा कर दिया. मैं आंटी के मादक जिस्म को निहार रहा था. सच में आंटी बड़ा मस्त माल थीं.

आंटी ने उंगली से मुझे करीब आने का इशारा किया तो मैं आंटी के करीब गया और घुटने के बल बैठते हुए आंटी उनकी जांघों को अपनी जीभ से चाटने लगा. फिर धीरे से चूत को पैंटी के ऊपर से ही सूंघा और उनकी पेंटी को अपने मुँह से खींच कर उतार दिया. आंटी की चूत सफाचट थी. मैं उनकी चूत को सूंघने लगा.

दोस्तो, क्या बताऊं आंटी की चूत से बहुत अच्छी महक आ रही थी. मैंने आंटी की चूत में जीभ फेर दी.

आंटी की चूत एकदम से गरमा गई थी. उन्होंने मुझे अपने साथ बिस्तर पर खींच लिया और मैं उनके ऊपर चढ़ गया. आंटी ने मेरे लंड को हाथ से पकड़ा और चूत की फांकों में लगा लिया. मैंने चूत की फांकों पर लंड को घिसना शुरू कर दिया था.

इससे आंटी की मदमस्त आह निकल गई और मैं उनकी चूत को लगातार छेड़ने लगा.

कुछ देर बाद मैंने उनसे बोला- आप मेरे मुँह पर बैठ जाओ … मुझे आपकी चूत चाटनी है.
वो खुश थीं तो झट से राजी हो गईं.

अब मैं जमीन पर लेट गया और आंटी मेरे मुँह पर अपनी चूत लगा कर बैठ गईं. आंटी कमर हिलाते हुए मुझसे अपनी चूत चटवा रही थीं.

कुछ देर बाद आंटी बोलीं- मुझे सूसू आ रही है.
मैंने बोला- मुझे पेशाब पीने का मन कर रहा है.

उन्होंने ओके कह कर मुझसे पूरा मुँह खोलने को बोला. मैंने आ कर दिया और आंटी जरा सा उठ कर मेरे मुँह में पेशाब की धार मारने लगीं.

दोस्तो, मुझे औरत की गरम पेशाब पीना बहुत पसंद है. आंटी का गरम गरम मूत पीने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था.

फिर मैंने उनको खड़ा किया और कुतिया बना दिया. मैं पीछे से आंटी की गांड सूंघने लगा, फिर मैंने अपनी जीभ से आंटी की गांड का छेद चाटा.

ये सब मैंने दस मिनट तक किया.

फिर मैं आंटी से बोला- आप दोनों हाथों से अपनी गांड के छेद को चौड़ा कर लो … मैं आपकी गांड में अपनी जीभ डालूंगा.
उन्होंने ऐसा ही किया.

मैंने आंटी की गांड के छेद में अपनी लम्बी जीभ डाल दी. आह थोड़ा कसैला स्वाद आ रहा था, पर मुझे अच्छा लगा. मैंने देर तक तक आंटी की गांड चाटी.

फिर मैंने उनको सीधा होने को बोला और मैं लेट गया.

मैं बोला- आप मुझे अपने पैर चाटने दो. आंटी मेरे ऊपर 69 में लेट गईं. मैंने उनके पैर दस मिनट तक चाटे.
आंटी बोलीं- अब मेरी बारी है.

मैं ओके कहा, तो उन्होंने मेरा लंड पकड़कर अपने मुँह में ले लिया और लंड चूसने लगीं.

करीब दस मिनट बाद आंटी ने कहा- तेरा लंड बहुत मोटा है … आज बहुत मजा आएगा. मैं पूरी रात चुदूंगी.
मैंने कहा- हां आंटी मैं आपको आज सोने नहीं दूंगा.

आंटी अब चुदने के लिए रेडी थीं. मैंने उनको नीचे झुका कर उनकी चूत में अपना लंड घुसा दिया. आंटी तड़प रही थीं.

मैं उनको तेज चोद रहा था.

करीब दस मिनट के बाद मैंने उनसे कहा- आंटी, अब आप मेरे लंड पर बैठ जाओ.
वो मेरे लंड पर बैठ कर चुदने लगीं.

आंटी की चुदाई में बहुत मजा आ रहा था. करीब बीस मिनट तक मैंने आंटी को ऐसे ही चोदा. इसके बाद मेरे लंड से माल निकल गया और हम ऐसे ही लेटे रहे.

करीब दस मिनट बाद मैंने बोला- आपकी चूत में पानी बहुत है … लाओ चाट कर साफ़ कर दूं.

आंटी ने अपनी चूत मेरे मुँह पर लगा दी. अब मैं उनकी पूरी बॉडी को अपनी जीभ से चाट रहा था और उनकी बगल में मुँह डालकर पसीना पी गया.

अब आंटी की गांड चोदने को बारी आ गई थी.

मैंने कहा- आंटी क्या मैं आपकी गांड मार लूं?
आंटी ने हां कर दी,
मैंने- ओके आप थोड़ा झुक जाओ.

आंटी गांड मराने के लिए झुक गई थीं.

मैंने क्रीम लगा कर उनकी गांड में लंड डाला और काफी देर तक आंटी को चोदा.

गांड मारने के बाद मेरा हुआ नहीं था, तो मैं उनकी चूत चाटने लगा.

आंटी से मैंने कहा- आंटी बड़ी प्यास लग रही है प्लीज़ फिर से अपनी पेशाब पिलाओ न!
उन्होंने हंस कर बोला- साले कुत्ते … तू ये सब बहुत पीता है … चल बाथरूम तुझे टट्टी भी खिलाऊंगी.
मैंने कहा- फिर तो मुझे मज़ा आ जाएगा.

फिर मैं आंटी के साथ बाथरूम में गया और नीचे फर्श पर लेट गया. वो मेरे ऊपर बैठकर मूतने लगीं. मैं उनकी सारी पेशाब पी गया.

इसके बाद मैंने आंटी की तीन बार गांड मारी और दो बार चूत की चुदाई की.
लगभग सुबह पांच बजे तक मैंने आंटी कपो नॉनस्टॉप चोदा. फिर हम दोनों सो गए.

जब मैं सुबह उठा, तो आंटी और एक दूसरे को देख हंस रहे थे.

मैंने आंटी से कहा- आंटी आपकी गांड मुझे बहुत अच्छी लगी … क्या आपकी कोई फ्रेंड है, मुझे उनकी भी गांड मारनी है.
उन्होंने बोला- हां मेरी फ्रेंड है. उसको बड़ा लंड चाहिए.

मैं- क्या वो आठ इंच का लंड ले लेंगी.
उन्होंने बोला- वो साली बहुत बड़ी रांड है. तुमको उसे सुबह से रात तक चोदना होगा.
मैंने कहा- ठीक है आंटी फिर तो मजा आएगा.

मैं उनसे बोला- आप उनको बुला लो.
आंटी ने बोला- वो इधर नहीं आएगी.
तो मैंने कहा- ओके मैं ही उनके पास चला जाऊंगा.

आंटी ने उससे फोन से पूछा कि जवान लौंडे का लंड लेना है. उन्होंने ‘हां जल्दी भेजो’ कह कर फोन काट दिया.

मेरी आंटी ने कहा- ठीक है, मेरी बात हो गई है, तुम चले जाओ. उसके पति घर पर नहीं हैं. वो बाहर गए हैं.

मैं आंटी की सहेली के दिए गए पते पर चला गया. मैंने उनमें दरवाजे की बेल बजाई.

एक 35 साल की औरत निकली. उसे देख कर ऐसा लगा कि इनको यहीं पर रगड़ दूं.

जब उन्होंने मेरा नाम लिया और पूछा- आप वही हो?
मैंने उनसे बोला- आंटी मुझे उन्होंने भेजा है. चूंकि मेरी आंटी ने उन्हें पहले ही बता दिया था कि ये लड़का बहुत मस्त चूत चाटता है और अच्छे से खुश कर देगा.

उन्होंने मुझे बैठने को भी नहीं बोला.वो सीधे बोलने लगीं- तुम यहां पर बैठने के लिए नहीं आए हो, जल्दी से मेरी गांड में अपनी जीभ डालकर मेरी सेवा करो.

मैंने अपने कपड़े उतारकर उनके कपड़े भी अलग कर दिया और कुत्ते की तरह उनकी गांड के छेद में मैंने अपनी लंबी जीभ डाल दी और गांड चाटने लगा.

काफी देर तक गांड चाटने के बाद मैं उनकी चूत चाटने बैठ गया. मैं देर तक आंटी की चूत को चाटता रहा.

उन्होंने मुझसे पूछा- गरम कोल्डड्रिंक पियोगे.
मैंने कहा- हां पियूंगा.

तो उन्होंने एक आधा लीटर की पानी की खाली बॉटल ली और बोलीं- रुको, तुम्हारी आंटी ने कुछ कहा था.

फिर वो बाथरूम में गईं और थोड़ी देर बाद बाहर आ गईं. मैंने देखा कि बॉटल पूरी भरी हुई थी.

आंटी ने बोतल मुझे दी और कहा- ये मेरी पेशाब है. लो तुम पी लो, फिर मेरी चुदाई करो.

मैंने पूरी बॉटल पी ली और उनको बोला- आंटी अब आप मेरे मुँह पर बैठो.

वो मेरे मुँह पर बैठकर चूत चुसवाने लगीं.

कुछ देर बाद बोलीं- अब तुम अपना लंड दिखाओ.

मैंने अपना लंड उनके हाथ में दिया. वो लंड देख कर डर गईं और बोलीं- अरे बापरे … इतना बड़ा लंड. इतना मोटा लंड तो मैंने कभी अपनी चूत में नहीं लिया. पता नहीं तेरी आंटी ने कैसे ले लिया.

मैं हंस दिया और उन्होंने भी मुस्कुराते हुए मेरा लंड लेकर अपने मुँह में ले लिया. आंटी लंड चूसने लगीं.

बहुत देर तक लंड चूसने के बाद उन्होंने कहा- काफी चटाई हो गई. अब तुम मुझे चोदो.
मैंने कहा- ठीक है मालकिन … जैसी आपकी मर्ज़ी.

फिर मैंने आंटी को लिटाया और पैर ऊपर करके कंधों पर रखकर लंड डालकर चोदने लगा.

करीब आधा घंटा तक मैंने आंटी को भरपूर चोदा. फिर मेरा रस निकल गया. इसके बाद हम लोग नहाये.

कमरे में आकर आंटी मेरे साथ नंगी ही लेट गईं. मैंने उनकी बगलें चाटीं और कहा- मैं आपकी मालिश कर देता हूं.

आंटी ने हाँ कह दी और मैंने उनको लिटा कर तेल लगाकर मालिश करना चालू कर दी.

आंटी की थकान मिटने लगी. मैं भी उनको पूरी रात चोदने के मूड में था.

हुआ भी यही … मैंने पूरी रात में चार बार आंटी की चूत चुदाई की और दो बार गांड मारी.

सुबह मैं अपने काम से चला गया.

ये मेरी आंटी की चूत गांड की गंदी सेक्स कहानी चुआई की थी. आपको कैसी लगी … तो comment करके मुझे जरूर बताना.

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