Jaipur Mai Pyasi Bhabi Ki Chudai

मेरे सभी प्यारे मित्रों को नमस्कार। मेरा नाम डॉ. ऋषि है.

कहानी को प्यार देने के लिए आप सभी आज मैं आपके लिए अपनी एक और मोटा लंड सेक्स स्टोरी लेकर आया हूं. मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी ये आज की कहानी भी पसंद आयेगी.

यह बात कुछ दिनों पहले की है. जब मैं बैठा बैठा मोबाइल में गेम खेल रहा था. मेरे पास एक दोस्त की फेसबुक रिक्वेस्ट आई. मैंने वह स्वीकार कर ली. उसके बाद एक भाभी की रिक्वेस्ट भी आई. मैंने उसे भी स्वीकार कर लिया.

भाभी ने खुद ही बात शुरू की. उससे बातें करने पर चला कि वह जयपुर की रहने वाली है. उसने अपना नाम अनु बताया.
मैंने पूछा कि अनु जी आपकी शादी हो गयी है तो वो कहने लगी कि मुझे ‘जी’ कहकर मत बुलाओ. केवल अनु कहो.

फिर उसने बताया कि उसके पति गाड़ी चलाते हैं. अभी तक भी अनु को कोई बच्चा नहीं हुआ था. उसके बाद मेरी उनसे रोज ही बातें होने लगीं. अब हम खुल कर बातें करते थे और सेक्स के बारे में भी बेहिचक बात कर लिया करते थे.

मैं अनु भाभी के बारे में आपको कुछ बता देता हूं. उसकी उम्र 27 साल थी. देखने में सुंदर थी. उसका साइज 38-36-38 का था. उसी ने मुझे बताया था. कुल मिलाकर अनु भाभी एक चोदने लायक मस्त माल थी.

एक दिन फिर वो मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछने लगी तो मैंने मना कर दिया कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.
फिर वो बोली- तो कभी पहले रही है?
मैंने कहा- हां आपके जैसी एक सुंदर भाभी थी पहले.

वो बोली- आपको लड़कियों में इंटरेस्ट नहीं है क्या?
मैंने कहा- मुझे तो अनु भाभी में इंटरेस्ट है.
वो बोली- अच्छा! ऐसा क्या है अनु भाभी में?

मैं बोला- आपकी आंखें भी बहुत मस्त हैं. आपके होंठ कितने प्यारे हैं. आपके गाल कितने गोरे हैं.
वो बोली- अरे बस बस … बहुत है. समझ गयी मैं.

इस तरह से भाभी और मेरे बीच खुल कर बातें होने लगीं.
वो पूछने लगी- आपने कभी सेक्स किया है?
मैं- हां किया है.

वो बोली- कैसे कैसे किया?
मैंने भाभी को पूरी सेक्स स्टोरी सुना दी.
उस दिन मैंने उसको फोन पर ही गर्म कर दिया था. उसकी आवाज बहुत सेक्सी लग रही थी.

एक दिन भाभी ने मुझसे मेरा व्हाट्सएप नम्बर मांग लिया. उसके दो दिन बात उसका मैसेज आया- आप कभी जयपुर नहीं आते हो क्या?
मैं कहा- आता हूं. मगर आपके पति भी तो होंगे घर पर?

वो बोली- हां हैं, मगर उनसे कुछ होता नहीं है. वो तो सबुह जाते हैं और शाम को आते हैं और फिर खाना खाकर सो जाते हैं.
फिर वो बोली- आपके ‘उसका’ साइज क्या है?
मैंने कहा- किसका?

भाभी बोली- उसी का!
मैं बेशर्म होकर बोला- लंड का साइज पूछ रही हो क्या?
वो शरमा गयी और उसने हम्म … करके जवाब दिया.

मैंने कहा- 8 इंच का मोटा लंड सेक्स के लिए मजेदार है.
वो बोली- इतना बड़ा? आपके मोटा लंड सेक्स में बहुत मजा आयेगा.
मैंने कहा- देख लो. इतना ही बड़ा है मेरा.
वो बोली- क्या आप पिक्स भेज सकते हो अपने हथियार की?
मैंने कहा- ओके.

भाभी से बातें करते हुए मेरा लंड तन चुका था और मैंने उनको अपने खड़े लंड की फोटो भेज दी जिसका टोपा कामरस में चिकना हो चुका था.
पिक देखते ही भाभी खुशी से उछल पड़ी और बोली- आह्हह … इतना मस्त मोटा लंड है आपका. काश आप मेरे हस्बैंड होते.

मैंने भाभी की इस बात पर मुठ मारना शुरू कर दिया. उस दिन के बाद से भाभी मुझसे ऐसे बात करने लगी जैसे मैं ही उसका पति हूं.
फिर एक दिन मुझे जयपुर जाना था तो मैंने उनको बता दिया कि मैं आपके शहर आ रहा हूं. वो ये जान कर खुश हो गयी.

वो बोली- कहां मिलोगे?
मैंने कहा- आप ही बताओ?
वो बोली- वर्ल्ड ट्रेड पार्क में मिलेंगे.

जयपुर पहुंच कर मैंने अपना काम वहां से खत्म किया और वर्ल्ड ट्रेड पार्क चला गया.
वहां मुझे रेड कलर की साड़ी पहने हुए अनु भाभी मिली. उसको देख कर तो मेरी आंखें फैल गयीं. बहुत ही सेक्सी माल थी यार वो … देखते ही लौड़ा बेचैन हो उठा.

फिर वो घर चलने के लिए कहने लगी. फिर मैं उनके साथ उनके घर चला गया. मुझे पता नहीं था कि भाभी पहले से तैयारी में थी. मैं उनके घर गया तो उन्होंने मुझे बैठाया और चाय वगैरह पिलाई. मेरे लिए नाश्ता भी लेकर आई.

फिर हम लोग बैठ कर बातें करने लगे.
बातें करते हुए भाभी ने मेरे हाथ पर हाथ रख दिया. मैंने भी उनके हाथ पर रख दिया अपना हाथ. मेरा लंड खड़ा होने लगा. मैंने धीरे से भाभी के हाथ को अपने तने हुए लंड पर टच करवा दिया तो भाभी के होंठ खुल गये.

मैंने तुरंत उनकी गर्दन में हाथ डाला और उनके होंठों को चूसना शुरू कर दिया. भाभी ने भी बिना किसी विरोध के मेरा साथ देना शुरू कर दिया.

हम लोग 20 मिनट तक तो किस ही करते रहे. मैं भाभी के साथ रोमांस करना चाह रहा था. सीधा सेक्स पर कूदना नहीं चाह रहा था.

मैंने वैसा ही किया. मैंने भाभी को खड़ा करके उनके गले पर किस किया. गले से लेकर मैं उनके लिप्स को चूसता, गले को चूसता, कानों को चूमता और कभी उनके माथे को चूमता. वह अब धीरे धीरे गर्म हो रही थी.

फिर मैंने उसको वहीं सोफे पर लिटा लिया और उसकी साड़ी का पल्लू खींच कर उतारने लगा. धीरे धीरे मैं भाभी की साड़ी खोलने लगा. ब्लाउज में फंसे भाभी के बूब्स एकदम से फटने को हो रहे थे. उनके सीने में चल रही तेज सांसों के साथ भाभी के मोटे मोटे स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे जो मुझे पागल बना रहे थे.

अब भाभी ब्लाउज और पेटीकोट में थी. मैंने उनका ब्लाउज भी खोल कर उतार दिया. भाभी ने नीचे से ब्रा नहीं पहनी थी और उनके स्तन झूल कर एकदम से बाहर लटकने लगे. मैंने उसकी मोटी मोटी चूचियों को हाथों में भरा और भींचने लगा.

स्तनों को दबाने से भाभी और ज्यादा सिसकारने लगी. वो मेरे लंड को टटोलने लगी. मैंने भाभी का हाथ अपने लंड पर रखवा दिया और भाभी मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड को हाथ में भर कर मुठ सी मारने लगी.

जब उससे रहा न गया तो बोली- जल्दी करो ना ऋषि … मुझसे अब रुका नहीं जा रहा है. मैं बहुत दिनों की प्यासी हूं. मुझे आपका लिंग अपनी चूत में लेना है. मेरी चूत बहुत गर्म हो चुकी है.

फिर मैंने उनको उठाया और बेड पर ले गया. मैंने उसकी चूचियों को जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया. वो जोर जोर से सिसकारने लगी- आह्ह … पी लो … पी लो … इनको … आह्ह बहुत दूध भरा है इनमें … सारा निचोड़ लो राजा … आह्ह … और जोर से चूसो … अम्म … आह्ह।

वो मेरे को बोल रही थी कि प्लीज जल्दी करो यार … मगर मैं कहां सुनने वाला था. मैं रोमांस का भूखा था. मैं उनके गले पर वापस चला गया. गले से लेकर किस करने लगा और उनको जोर जोर से उनके लिप्स पर किस करने लगा. कभी उनके कानों को काट रहा था तो कभी फिर से गले को चाटने लगता.

फिर मैं दोबारा बूब्स चूसने लगा और फिर चूमते हुए नीचे नाभि को किस किया. उनकी नाभि को जीभ से चोदने लगा. वो जोर जोर से सिसकारियां लिये जा रही थी.

अब मुझसे भी नहीं रुका जा रहा था. फिर मैंने उनका पेटीकोट खोला और उनकी जांघों को किस करने लगा. मैंने उनको पहले तो खूब चूसा. फिर उसकी पैंटी को नीचे करके उसकी चूत को नंगी कर दिया.

भाभी की नंगी चूत को देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया और मैंने भाभी की चूत को जोर जोर से चाटना शुरू कर दिया. भाभी एकदम से पागल होने लगी. उससे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था. मैं ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर उसकी चूत पर जीभ चला रहा था.

बहुत ज्यादा गर्म होने के कारण भाभी मेरे सिर के बालों को नोंचने लगी थी और मुझे भी इसमें मजा आ रहा था. भाभी को तड़पाने में मुझे अलग ही खुशी मिल रही थी.

करीबन 10 मिनट तक मैंने भाभी की चूत को चाटा और वो तेज तेज हांफते हुए झड़ गयी. उसके बाद वो शांत हो गयी.
फिर मैं अपनी पैंट की बेल्ट खोलने लगा. बेल्ट खोल कर मैंने शर्ट उतारी और फिर पैंट भी नीचे कर दी. मेरे लंड ने मेरे अंडरवियर को गीला कर दिया था.

मैंने भाभी को लंड चूसने के लिए कहा तो उसने मेरे कच्छे को नीचे किया और मेरे 8 इंची लंड को अपने मुंह में भर कर चूसने लगी. वो मेरे लंड को भूखी शेरनी की तरह चूस रही थी. मैं तो सातवें आसमान में था. बहुत मजा दे रही थी अनु भाभी मेरा लंड चूसते हुए.

अब मैं जोश में आकर उसके बालों को पकड़ कर आगे पीछे करने लगा. वह भी पागलों की तरह मेरे 8 इंच के लंड को पूरे गले तक ले रही थी. करीबन 20 मिनट बाद मैं झड़ गया. अनु भाभी ने मेरे लंड का सारा पानी पी लिया.

उसके बाद मैं लेट गया. वो मेरे लंड के साथ खेलने लगी. मेरा लंड सिकुड़ गया था. भाभी ने मेरे सोये हुए लंड को एक बार फिर से मुंह में लिया और चूसने लगी. दस मिनट तक उसने पूरा मन लगा कर मेरे लंड को चूसा और मेरा लौड़ा एक बार फिर से तन गया और चुदाई के लिए तैयार हो गया.

अब मैंने भाभी की चूत में उंगली दे दी और चलाने लगा. वो सिसकारने लगी और तड़पते हुए बोली- मेरी जान निकालोगे क्या … अब चोद दो रिशु … मैं और नहीं रुक सकती हूं.

फिर मैंने भाभी की जांघों को चौड़ी करके फैलाया और उसकी चूत पर लंड का टोपा घिसने लगा. वो पागल होकर मेरे होंठों को खाने लगी. खुद ही मेरी गांड को पकड़ कर अपनी चूत की ओर धकेलने लगी.

मैंने भी उसकी प्यास बुझाने के लिए लंड को चूत पर सेट किया और गच्च से लंड उसकी चूत में घुसा दिया. भाभी की चीख निकल गयी लेकिन वो फिर भी बर्दाश्त कर गयी. मेरे लौड़े ने उसकी चूत को फैला दिया था.

फिर मैं धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. पांच मिनट के अंदर ही भाभी ने लंड का मजा लेना शुरू कर दिया. वो अब सिसकारते हुए चुदने की गुहार लगा रही थी- आहह… और जोर से रिशु… आह्ह… ठोक दो मेरी चूत को … आह्हह … आई … स्स्स … आह्हह … ऊईई … और तेज चोदो मेरी जान।

मैं तेजी से भाभी की चूत में लंड को पेलने लगा. उसकी चूचियों को भींचने लगा. उसके होंठों को चूसते हुए उसकी चूत की जबरदस्त चुदाई करता रहा.

दर्द के मारे भाभी रो पड़ी मगर उसको चुदाई में मजा भी उतना ही मिल रहा था. 20 मिनट तक मैंने उसको रगड़ रगड़ कर चोदा. किसी वहशी जानवर की तरह मैंने उसकी चूत को चोद चोद कर फाड़ दिया. उसके बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया.

मैंने उसकी चूत का बैंड बजा दिया. वो बुरी तरह से थक गयी थी. हम कुछ देर तक बेसुध होकर पड़े रहे. फिर हम नंगे ही सो गये. दो घंटे के बाद आंख खुली तो मैं बेड पर नंगा पड़ा था.

अनु भाभी ब्रा और पैंटी में घूम रही थी. उसने चाय बना ली थी और फिर हमने साथ में चाय पी. मैं उसकी चूचियों को छेड़ने लगा. हम दोनों फिर से गर्म हो गये और मैंने एक बार फिर से उसकी चूत बजा डाली.

उसके बाद शाम हो गयी और हम दोनों फ्रेश हो गये. रात का खाना खाकर हम बेड पर पहुंच गये. मैं रात को भाभी के घर पर ही रुकने वाला था. उस रात मैंने भाभी की चूत पांच बार चोदी. उसकी चूत को सुबह तक चोद चोद कर सुजा दिया.

फिर सुबह मैं निकल गया. मुझे हॉस्पिटल जाना था. इस तरह से अनु भाभी को चुदाई का मैंने पूरा सुख दिया और वो बहुत खुश हो गयी. वो आज भी मुझे उस दिन की चुदाई के लिए याद करती है मगर मुझे उसके पास जाने का समय नहीं मिल रहा है. जैसे ही उससे दूसरी मुलाकात होगी मैं आप लोगों को जरूर बताऊंगा.

मोटा लंड सेक्स स्टोरी आपको कैसी लगी मुझे जरूर बताना दोस्तो. मुझे आप सब लोगों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा ताकि मैं अपनी आगे आने वाली स्टोरीज़ को बेहतर बना सकूं.
थैंक्यू दोस्तो।

Teri Meri Prem Kahani

मेरी प्रेम कहानी: मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते हैं. मैं भी उन्हें प्यार करती हूँ. लेकिन शादी से पहले मुझे एक लड़के से प्यार हो गया था. उसे मैं भुला नहीं पायी.

मेरा नाम दिव्या है, मैं दिल्ली से हूं।
आज मेरी शादी को पूरा एक साल हो गया है. मेरे हस्बैंड मुझसे प्यार करते हैं, मैं भी उनसे प्यार करती हूं.

लेकिन आज यहां मैं आई हूं आप लोगों को अपनी जिन्दगी की एक ख़ास घटना सुनाने को। यह मेरी प्रेम कहानी है शादी से पहले की.

उस समय का बात है जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी. एक लड़का था जो हमेशा मुझे देखता था. जब मैं उसकी तरफ देखती थी तो मुझे उसकी आंखों में मेरे लिए सच्चा प्यार झलकता था.

बहुत समय तक हमारे बीच यही चलता रहा। एक दूसरे से कुछ कहते नहीं थे … बस देख लिया करते थे। हम चाहते थे पास आना … पर डरते थे।
मैंने सोचा कि वह ही शुरुआत करेगा. पर उसने कुछ नहीं किया.

बहुत समय तक मैंने उसका इन्तजार किया लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. फिर मैंने ही कुछ सोचा, मैंने किसी बहाने उसके पास जाना था क्योंकि उसकी आंखों में मुझे मेरे लिए सच्चा प्यार और भरोसा नजर आता था।

फिर एक दिन मैंने एक कागज पर अपना नंबर लिखा और कॉलेज जाते ही उसकी बेंच पर रख दिया. मैं जानती थी कि उसका कॉल जरूर आएगा.

और ऐसा ही हुआ. शाम को उसका कॉल आया. मैं अपने घर की छत पर उसके फोन का इन्तजार कर रही थी.
नया नंबर देखकर मैंने फोन उठाया और बहुत धीमी सी आवाज में हेलो बोली।

बस यही पहली शुरुआत थी हमारे प्यार की!

तब हमारे बीच बहुत सारी बातें हुई. हम एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे; हम मिलने भी लगे।
एक दूसरे का हाथ थामे वह सड़क पर घूमना … प्यार भरी नजरों से एक दूसरे को देखना।

एक दिन मुझे बुखार हो गया। मैं उससे कॉल पर बात नहीं कर पाई। मैं जानती थी कि उसने मेरे फोन का बहुत इन्तजार किया होगा.

जब मेरी हालत में थोड़ा सुधार हुआ तो मैंने उसको कॉल किया. उसने मुझसे सारी बातें पूछी, मेरी तबीयत … मेरे हालात।
मैंने उससे कहा कि मुझे कुछ पैसे चाहिएँ.
उसने मुझसे कहा- बताओ कितने चाहिएँ?

मैंने कहा- सिर्फ दो हजार भेज दो.
उसने कहा- ठीक है, भेज रहा हूं. पर तुम अपना ध्यान रखना।

मेरा इतना ध्यान रखना सिर्फ उसको आता था.

कुछ दिनों बाद मैं ठीक हो गई, मैंने उसको कॉल किया और एक जगह मिलने के लिए बुलाया. मेरा मन उसको अपनी बांहों में भरने का कर रहा था. मैं जाकर सीधे उसके गले लग गई. मैं और वो एक दूसरे की बांहों में बहुत देर तक चिपके रहे।

आज मेरा उससे बहुत प्यार करने का मन कर रहा था. मैंने उससे कहा- आज मैं पूरा दिन फ्री हूं, चलो किसी होटल में चलते हैं.
उसने आंखें झुका कर हम्म ही कर दी.

अब इसे हम दोनों का प्यार कह लीजिए या प्यार में हुआ सेक्स! पर हम एक दूसरे को और नजदीक से जानना चाहते थे, एक दूसरे को टूट कर प्यार करना चाहते थे।

हमने एक होटल में रूम लिया और हम पूरा दिन वहां रहे। होटल में जाकर हम दोनों बेड पर एक दूसरे से चिपक गए.

मैंने धीरे धीरे उसकी शर्ट को उतारा, उसकी नंगी बालों वाली छाती पर अपने हाथों को फिराना शुरू किया. उसने आनन्द से आंखें बंद कर ली थी.

फिर मैंने उसके माथे पर किस किया और उसके सारे जिस्म पर किस करती चली गई. मुझे बस आज उसकी और मेरी एक नई कहानी बनानी थी.
हम दोनों प्यार में इतने डूबे थे।

फिर उसने मुझे बेड पर सीधा लेटा दिया. मेरे शर्ट और सलवार को धीरे-धीरे करके उतारा. मेरा सारा गोरा बदन उसके सामने था. अब मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी में उसके सामने लेटी थी। उसने मेरे बालों को अपने हाथों से सहलाया। मेरे सारे बदन पर अपनी उंगलियों फिर आई मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर उसने मेरी ब्रा और पेंटी भी उतार दी और मेरे बूब्स को हल्के हल्के चूसने लगा. मैंने अपने हाथ को उसके सिर पर फिराना शुरू कर दिया. वो कभी कभी मेरी नंगी कमर पर भी अपना हाथ फिरा रहा था.
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

यह पहली बार था कि मैं सेक्स कर रही थी, वरना आज तक सिर्फ सेक्स विडियो में ही देखा था।

फिर उसने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। और अपना लंड मेरी कुंवारी बुर पर लगाने लगा. उसने थोड़ी कोशिश की अपने लंड को मेरी कसी बुर के अंदर डालने की!
पर लंड अंदर गया नहीं!

मैंने उससे कहा- बेबी, पहले मुंह से करो ना … गीली हो जाएगी तो फिर आराम से करना … तब चला जाएगा.
उसने ऐसे ही किया. मेरे बूब्स से किस करते करते नीचे मेरी बुर तक चला गया. वह मेरी सारी बुर को मुंह में लेकर चूसने लगा.

मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी लेकिन अंदर ही अंदर अच्छा भी लग रहा था. मैंने यह बुर चटायी का सीन वीडियो में देखा था तो मुझे भी एक बार करना भी था, इसलिए मैंने उससे बोला था.

मैं बेड पर बाल खोलकर लेटी थी और बस उसके नंगे जिस्म को देख कर आनंद ले रही थी. मैं कभी उसको देखती तो कभी बुर चटायी में मिलने वाले मजे के कारण आंखें बंद कर के लेट जाती.

फिर कुछ देर बाद मैंने उसको अपनी ओर खींचा. अब तक उसके मुख की लार से मेरी बुर पूरी गीली हो गई थी. उसका लंड भी प्रिकम छोड़ कर हल्का गीला हो गया था.

हम दोनों प्रेमी इस पोजीशन में आ चुके थे कि अब एक दूसरे में समा जाएं. वो मेरे ऊपर आक र अपने लंड को मेरी बुर के छेद पर सेट करने लगा और मैंने उसकी मदद की.
फिर उसने सीधा हल्के से धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. मुझे बहुत दर्द हुआ तो मैंने अपने हाथों से उसके कंधों को पीछे की तरफ धकेला चाहा ताकि ज्यादा अंदर तक ना जा सके.

लेकिन धीरे-धीरे फिर मुझे मजा आने लगा. अब मैंने अपनी पूरी टांगें अपने प्रेमी के लंड के स्वागत में खोल दी थी और मैंने उसकी कोली भर ली।
वह भी ‘दिव्या दिव्या’ कर रहा था और मुझे बहुत प्यार कर रहा था.

हमने सिर्फ इसी पोजीशन में सेक्स किया और हम दोनों झड़ गए.

फिर हम दोनों ने अपने अंडर गारमेंट्स पहन लिए और ऐसे ही एक दूसरे के पास बैठ गए. बहुत सारी फिर प्यारी बातें की।

अबकी बार उसको मैंने बेड की तरफ धक्का दे दिया उसके लंड पर अपना हाथ फिराने लगी. मैंने पोर्न वीडियो में देखा था और उसी तरह मुझे एक बार लंड मुंह में लेना था.
फिर मैंने उसको मुंह से मजा दिलाया, मैंने उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. धीरे-धीरे मैं उसको मजा दिलाने लगी.
वह मेरे बालों पर और मेरी कमर पर अपना हाथ फिरा रहा था.

फिर से हम दोनों तैयार थे एक दूसरे में खोने के लिए। फिर वह पीछे की तरफ लेट गया और मुझे अपनी ओर खींचा. वह बेड पर सीधा लेट गया, मैं अपने घुटनों को मोड़कर उसके ऊपर जाकर बैठ गई. फिर हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. ऐसे ही किस करते करते कब उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया, मुझे पता ही नहीं चला. बस मजा आ रहा था, पहली बार किसी के साथ मैं सेक्स कर रही थी.

उसने मेरे बालों को पीछे से खोल दिया. मेरी नंगी कमर पर मेरे बाल बिखरे पड़े थे और मेरी कमर पर उसके हाथ चल रहे थे. हम दोनों एक दूसरे को ऐसे ही किस करते रहे.

कुछ देर बाद उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटा दिया और पीछे से मेरी चूत में ही लंड डाला. मेरे बालों को मेरे कंधे से हटाकर वहां किस करने लगा. हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था … हम एक दूसरे में खो जाना चाहते थे.

हमने इसी तरह मजा लिया. वह इसी तरह मेरी चूत में झड़ गया और मैं भी ऐसे ही उल्टी लेटे-लेटे झड़ रही थी तो मैंने बेड की चादर को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अपने मुंह की आवाज को रोकने के लिए अपना मुंह बेड में धंसा दिया।

कुछ देर तक हम दो प्रेमी चुदाई के बाद वैसे ही तेज तेज सांसें भरते रहे. फिर मैंने हल्के से अपना चेहरा उसकी तरफ किया, उसने मेरे चेहरे पर किस किया.

उसने पीछे से मुझे अपनी बांहों में भर रखा था. झड़ने के बाद भी बहुत देर तक हम ऐसे ही लेटे रहे।

बहुत समय बीत गया था तो अब मुझे घर जाना था. मेरी मम्मी पापा मेरी बाट देख रहे होंगे.
मैंने उससे कहा- डियर मुझे जाना होगा.
उसने कहा- ठीक है, जाओ. और मैं भी चलता हूं.

उसने मुझे घर के पास छोड़ दिया और वह भी अपने घर चला गया.

फिर हमने रात को कॉल पर बात की. उस पूरे दिन का नजारा हमारी आंखों के सामने घूम रहा था. उस पूरी रात हमने उस दिन के बारे में ही बात की कि हमने कैसे कैसे इंजॉय किया.

उस दिन सेक्स करने के बाद मैं भी और वह भी एक दूसरे के बहुत दीवाने हो गए थे. ऐसा लगता था जैसे अब एक दूसरे के बिना नहीं रह पाएंगे.

लेकिन हमारी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कुछ समय बाद मेरा कॉलेज कंप्लीट हो गया. कॉलेज कंप्लीट होते ही पापा ने मेरे लिए लड़का देख लिया. हमारे घर का माहौल कुछ ऐसा था कि मैं पापा की बात को कभी ना नहीं कह सकती थी.
जहां पापा ने चाहा … मुझे शादी करनी पड़ी.

आज मैं अपने हस्बैंड के साथ हूं … खुश हूं. पर शायद जैसे उसके साथ रहती वैसे नहीं।

प्यार तो करते हैं हम एक दूसरे को हस्बैंड वाइफ … लेकिन कुछ वैसा प्यार नहीं है जैसा उसके साथ था।

‘मैं शादी कर रही हूं.’ सुनते ही उसने सिर्फ एक बार मुझसे पूछा था कि यह सच है क्या?
फिर उसके बाद उसने मुझे कभी संपर्क नहीं किया. मैं भी नहीं कर पाई।
किस मुंह से करती?

आज कभी किसी चीज की जरूरत होती है तो उसकी याद बहुत आती है। वो था जो मेरे लिए हमेशा खड़ा रहता था। आज पता नहीं कहां इस दुनिया की भीड़ में वह खो गया है.
पता नहीं …
पर यह है उसकी और मेरी कहानी।
तेरी मेरी प्रेम कहानी एकदम सच्ची

Pehli Baar Chut Chodan

मेरी सेक्स लाइफ स्टोरी में पढ़ें कि कॉलेज के दिनों में मुझे चूत की तलब लगी. मेरे दोस्त ने अपनी सेटिंग को मेरे रूम में चोदा तो मैंने उस लड़की को ही पटा कर कैसे चोदा?

HindiSexStory पढ़ने वालों को मेरा नमस्कार।
मेरा नाम अनिल है और मैं भोपाल में रहता हूं। मैं कई साल से की क

मेरी जिन्दगी में भी एक लड़की आई थी. मैंने सोचा कि आपके साथ अपनी चुदाई के अनुभव भी बांटूं ताकि मेरा मन भी कुछ हल्का हो जाये.

मेरी सेक्स लाइफ स्टोरी सात साल पहले की है जब मैं थर्ड ईयर में था। मुझे लड़कियों के साथ कुछ भी एक्सपीरियंस नहीं था. मगर मैं बहुत सोचता था कि काश मेरी भी एक गर्लफ्रेंड होती जिसके साथ मैं सेक्स करता।

मेरे एक दोस्त निखिल की गर्लफ्रेंड माया उसके घर के पास ही रहती थी. निखिल मुझे माया के मैसेज दिखाता था और बताता था कि उसने उसे कैसे पटाया। मैं उसकी बातों में रुचि नहीं लेता था। ऐसे ही बात करते करते उसने उसे बाहर मिलने के लिए राजी कर लिया।

उसे माया के साथ अब सेक्स करना था लेकिन निखिल के पास रूम नहीं था. चूंकि मैं अकेले ही रहता था तो निखिल ने मुझसे माया को मेरे रूम पर ले आने की इजाजत मांगी. दोस्त के नाते मैंने भी हां कर दी.

एक दिन वो लोग आये. निखिल की गर्लफ्रेंड देखने में ज्यादा अच्छी तो नहीं थी लेकिन काम चलाने के लिए ठीक ठाक थी.
उसका रंग हल्का सांवला था. फिगर भी कुछ खास नहीं था. गांड ठीक ठाक थी मगर चूचियां काफी गोल और टाइट लग रही थीं. चूचियों का आकार भी उसके बदन के हिसाब से काफी अच्छा था.

वो सादे कपड़े पहन कर आयी थी लेकिन हल्का मेकअप भी किया हुआ था. उसके पहनावे को देख कर लग रहा था कि उसके परिवार का गुजारा बहुत ज्यादा अच्छा नहीं है. 34-30-32 का फिगर था उसका. कुल मिलाकर टाइम पास के लिए ठीक लड़की थी.

उनके आने के बाद मैं बाहर चला गया. मैंने रूम को बाहर से लॉक कर दिया जैसा कि निखिल ने मुझसे करने के लिए कहा था.

एक घंटे के बाद आकर मैंने रूम खोला.

रूम से निकलते हुए माया मेरी ओर देख रही थी. मैं भी उसके पूरे जिस्म का नाप ले चुका था. अब चूंकि उन दोनों ने मेरे ही रूम में चुदाई की थी तो ठरक मुझे भी चढ़ने लगी. मैंने सोचा कि काश माया की ही चूत चोदने के लिए मिल जाये.

फिर जाते हुए निखिल ने माया को मेरा फोन नम्बर दे दिया और उससे कहा- ये बेचारा अकेला है, इसकी भी कोई सेटिंग करवा दे.
माया ने मुझे अपना नम्बर भी दे दिया.
उसके बाद वो दोनों चले गये.

उनके जाने के 2 घंटे के बाद मैंने माया को कॉल किया.
मैं- हैलो, कैसी हो माया?
माया- ठीक हूं, आप बताओ?
मैं- मेरा तो आपको पता ही है, आपके फ्रेंड सर्कल में कोई लड़की है क्या जो मुझसे दोस्ती कर सके?

माया- पहले ये बताइये कि मैं आपको कैसी लगी?
मैं- आप तो बहुत अच्छी लगी मुझे। क्या मुझसे भी कोई लड़की दोस्ती कर सकती है क्या?
माया- हां क्यूं नहीं, आप कहो तो हम दोनों दोस्त बन जाते हैं?

मैं- क्या आपको मैं अच्छा लगा?
माया- हां, मुझे तो आप अच्छे लगे.
माया के मुंह ये सुन कर मैं खुश हो गया.

मैंने पूछा- क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?
वो बोली- हां, ठीक है.
मैं- तो फिर निखिल से बात कर लो. उसको बता दो कि तुम मेरे साथ आना चाहती हो ताकि बाद में कोई दिक्कत न हो.

वो बोली- ठीक है, मैं बात कर लेती हूं और आपको दोबारा से कॉल करूंगी.
देर रात में फिर उसका कॉल आया.
वो बोली- निखिल को कोई प्रॉब्लम नहीं है इससे.

निखिल एक लड़कीबाज़ बंदा था. उसको माया में ज्यादा कुछ इंटरेस्ट नहीं था शायद. उसे माया की चूत चोदनी थी सो वो चोद चुका था. इसलिए उसको माया के मेरे साथ आने से कोई दिक्कत नहीं थी.

मैंने माया से कहा- गुड, तो फिर क्या इरादा है आपका?
वो बोली- आप बताइये?
मैंने कहा- परसों आ जाओ रूम पर?
वो बोली- ठीक है।

दो दिन बाद वो मेरे रूम पर आने के लिए फोन करने लगी. मगर उस वक्त मेरा भाई मेरे रूम पर आया हुआ था. इसलिए माया से मिलने के लिए मुझे कोई और जगह चाहिये थी.

मैंने अपने एक दोस्त से बात करके उसका रूम ले लिया. आज मुझे घबराहट नहीं हो रही थी. मेरे अंदर आत्मविश्वास था और उत्साह भी था.

रूम पर जाने के बाद हम दोनों ने कुछ देर बातें की. वो ज्यादा खुल नहीं पा रही थी. मेरा भी पहली बार था तो मैं भी ज्यादा कुछ पहल नहीं कर पा रहा था.

फिर मैंने उसके कंधे पर हाथ रख दिया. उसने कुछ नहीं कहा. दूसरे हाथ में मैंने उसका हाथ ले लिया और उसको अपनी जांघ पर रखवा कर अपने हाथ से सहलाने लगा.

वो कुछ नहीं कर रही थी. फिर मैंने उसके बूब्स को छेड़ दिया. वो थोड़ी असहज हो गयी.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- कुछ नहीं.

फिर मैंने उसके मुंह को अपनी तरफ घुमाया और उसको किस करने लगा. माया ने मेरा साथ देने की कोशिश की लेकिन मिनट भर के बाद ही वो अलग हो गयी.

मेरा लंड खड़ा हो गया था. मैंने उसके हाथ को अपने लंड पर रखवाना चाहा लेकिन उसने मेरा लंड नहीं पकड़ा.

उसके बाद मैं उसके सूट को ऊपर करने लगा. मगर उसने वो भी ऊपर करने नहीं दिया. चूंकि मेरा पहली बार था तो मैं कोई जबरदस्ती नहीं करना चाह रहा था उसके साथ. मगर वो बहुत नखरे कर रही थी.

वो बोली- आप ऊपर से ही कर लो.
फिर मैंने उसको लिटा लिया और उसके बदन को चूमने लगा. उसके गालों और गर्दन को चूमा और उसकी चूचियों पर किस किया. मैंने उसकी चूचियों को दबाया और उसकी जांघों को सहलाया. वो धीरे धीरे गर्म तो हो रही थी लेकिन कुछ खुल कर नहीं कर रही थी.

मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा तो मेरे लंड में तूफान सा उठ गया. मैं उसकी सलवार को खोलने लगा लेकिन उसने मना कर दिया. फिर मैं दोबारा से उसके बूब्स को दबाने लगा.

दो मिनट दबाने के बाद वो बोली- अच्छा ठीक है, मुझे काफी देर हो गयी है यहां आये हुए. अगर मैं ज्यादा देर रुकी तो किसी को शक हो जायेगा.
मैंने कहा- मगर यार, हमने कुछ किया ही नहीं. थोड़ा सा तो करने दो?
वो बोली- नहीं, बाद में कर लेना. अभी मुझे जाना है.

वो मेरे लंड को तड़पता छोड़ कर चली गयी. उसके जाने के बाद मैंने बाथरूम में जाकर मुठ मारी और बुझे मन से वहां से चला आया.
उसी दिन शाम को भाई निकल गया. मैंने उसके जाते ही माया को फोन किया.

मैं बोला- तुम कल मेरे रूम पर आ सकती हो क्या?
वो बोली- हां, आ जाऊंगी.
मैं- कितने बजे?
वो बोली- सुबह 11-12 बजे के आस-पास।

अगले दिन मैंने उसे अपने रूम पर बुलाया। बम दोनों बेड पर बैठ गये. थोड़ी देर बातें करने के बाद मैंने उसके हाथ को पकड़़ कर चूमा और दूसरे हाथ को उसकी कमर में डाल कर उसे अपनी ओर खींचा. वो थोड़ा पीछे हटने की कोशिश करने लगी.

आज मैंने सोच लिया था कि इसकी चूत को चोद कर ही रहूंगा. मैंने उसकी चूची पर हाथ रखा और दबाते हुए उसके होंठों को किस करने लगा. वो मेरा साथ देने लगी. उसको शायद मजा आने लगा और वो खुद ही मेरे मुंह में जीभ डालने लगी.

मैं भी उसको पूरी शिद्दत से चूसता रहा. पांच मिनट तक किस करने के बाद मैंने उसे बेड पर लिटा दिया. उसकी गर्दन को चूमा और चूची दबाते हुए उसकी चूत को एक हाथ से सहलाने लगा. वो अपनी टांगें फैलाने लगी. मैं जान गया कि आज ये चुदासी लग रही है.

फिर मैंने उसके कपड़े निकालने शुरू किये. उसको धीरे धीरे मैंने चड्डी और ब्रा में कर दिया. उसकी ब्रा पर मुंह रख कर उसकी चूचियों को चूसने लगा. साथ ही एक हाथ से उसकी चड्डी के ऊपर से चूत को सहलाता रहा. उसकी चड्डी गीली होना शुरू हो गयी थी.

फिर मैंने उसकी ब्रा भी निकलवा दी और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा. बारी बारी से मैं उस जवान लड़की के स्तनों को मुंह में लेकर चूस रहा था. फिर मैंने उसकी चड्डी निकाल दी. उसकी चूत को किस किया और उसमें उंगली करने लगा. वो थोड़ी उचकी और मैंने उसकी चूची भींच दी. फिर एक हाथ चूची पर और दूसरे हाथ की एक उंगली उसकी चूत में करके मैं उसको मजा देने लगा.

जल्दी ही वो सिसकारने लगी. मैंने फटाक से अपने कपड़े निकाले और पूरा नंगा हो गया.

वो मेरे सामने बेड पर नंगी पड़ी हुई तड़प रही थी और अपनी चूचियों को खुद ही सहला रही थी. मैंने जल्दी से कॉन्डम का पैकेट फाड़ा और अपने लंड पर कॉन्डम लगाने लगा.

मेरा पहली बार था इसलिए एक्साइटमेंट में हाथ कांप रहे थे. ठीक से कॉन्डम भी नहीं चढ़ा पा रहा था.
वो देख कर हंस पड़ी और बोली- कॉन्डम भी नहीं लग रहा है आपसे, चुदाई कैसे करोगे?

फिर मैंने जल्दी से कॉन्डम पहना और उसकी चूत पर लंड लगा दिया. मैंने एक धक्का दिया और आराम से लंड उसकी चूत में चला गया. उसकी चूत बिल्कुल भी टाइट नहीं थी. फिर मैं उसे चोदने लगा. दस मिनट तक उसको चोदा और फिर झड़ गया.

माया के साथ सेक्स करने में मजा तो आया लेकिन जितना मैं उत्साहित था उतना नहीं आया.

उस दिन फिर वो चली गयी.

उसके बाद कई बार मैंने उसको अपने रूम पर बुलाया और बिना कॉन्डम लगाये हर पोज में कई बार पेला.

वो कॉलेज जाने के बहाने मेरे पास आती थी और दिन भर मेरे पास रुकती थी। उसका टिफिन मैं पूरा खा जाता था। सेक्स करने के बाद मैं उसे कहीं बाहर खाना खिला देता था।
इस तरह करके हफ्ते में दो से तीन बार मैं उसे बुला लेता। उसके साथ मैंने अपनी पूरी कामवासना शांत की।

बात करने से पता चला कि उसे उसके घर में उसका भाई बहुत मारता था क्योंकि उसके नम्बर अच्छे नहीं आते थे. उसके पापा सब्जी बेचा करते थे और उसका भाई अपने पैसों से उसकी पढ़ाई का खर्च उठाता था. माया के परिवार में उसकी मां ही थी जो माया को सपोर्ट करती थी.

उसकी स्थिति पर मुझे दया आती थी इसलिए मैं उसके साथ अच्छे से बात करता था. मेरी कोशिश यही रहती थी कि जब तक वो मेरे साथ रहे, खुश रहे। कई बार अपनी परेशानियों और समस्याओं का जिक्र वो मुझसे किया करती थी.

कई बार उसने मरने की बात भी कही थी. मैं उसको उम्मीद देता था. ऐसे करते करते आठ महीने बीत गये. हम कई जगह घूमने भी गये. भरी बरसात में उसकी चूचियों को दबाया, उसको स्मूच किया. उसके साथ कई अच्छी यादें जुड़ीं.

मेरा मानना है कि वो समय माया की जिन्दगी का सबसे खूबसूरत समय रहा होगा. माया मेरी जिन्दगी की पहली लड़की थी इसलिए मैं उसको अपना बेस्ट दे रहा था. उससे रोज देर देर तक बातें होती थीं.

आखिरी बार जब मैंने उसकी चूत मारी तो मैंने उसकी चूत में ही अपना वीर्य निकाला. फिर उसको गर्भनिरोधक गोली लाकर दी. माया के साथ आठ महीने देखते देखते ही गुजर गये.

एक दिन अचानक ही मेरी मौसी की लड़की खुशबू ने मुझे कॉल किया. वो 19 साल की थी. करीबन डेढ़ साल पहले मैंने उसको प्रपोज किया था लेकिन उसने मना कर दिया था. उसने भाई बहन के रिश्ते का हवाला दिया था.

मगर अब मैं उससे प्यार की बातें कर रहा था. मैं उसे बहुत पसंद करता था. उसकी चुदाई के लिए सुनहरे सपने देखता था. मगर माया भी मेरी जिन्दगी में थी और वो रोज सवाल जवाब करके मुझे अपने कंट्रोल में रखने की कोशिश कर रही थी.

शायद अब माया को भी लगने लगा था कि मैं उसको प्यार नहीं करता हूं और केवल उसकी चूत चुदाई के लिए उसके साथ रहता हूं. उसको अहसास हो गया था कि वो बस मेरी शारीरिक जरूरत को पूरा कर रही है. कई बार मैं उसको ‘आई लव यू’ भी कहा करता था लेकिन सच कहूं तो मुझे पता ही नहीं था कि प्यार क्या होता है।

अब मैंने माया से दूरी बनाने का फैसला कर लिया था. उसके रहते मैं खुशबू को नहीं पा सकता था. जब मैंने उसे छोड़ने की बात की तो उसको बहुत दुख हुआ और वो मेरे सामने बहुत रोई.

बाद में मुझे भी बहुत दुख हुआ इस बात को लेकर क्योंकि माया ने उस वक्त मेरा साथ दिया था जब मेरी जिन्दगी में कोई लड़की नहीं थी और मैं सेक्स और उससे जुड़े अहसासों के लिए तड़प रहा था. माया को धोखा देने की ग्लानि से उबरने में मुझे दो साल लग गये.

खुशबू के साथ मेरा टांका फिट हो गया. मैं अपनी मौसेरी बहन की चुदाई के मजे लेने लगा. मगर वो बहुत दूर रहती थी. कई बार मैं उसको टाइम नहीं दे पाता था और कई बार वो मेरे लिए उपलब्ध नहीं हो पाती थी. इसलिए गुजरते वक्त के साथ उसने मुझे छोड़ दिया.

मुझसे अलग होने के बाद उसने अपना नया ब्वॉयफ्रेंड बना लिया. मैंने उसको मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी. मैं फिर से अकेला हो गया. मैं दोबारा से माया के करीब जाने की कोशिश करने लगा लेकिन अब वो भी मुझे भाव नहीं दे रही थी.

कुछ दिनों के बाद उसकी शादी भी हो गयी. अब माया अपनी जिन्दगी में व्यस्त होकर खुश है और मैं वैसे ही तनहा। चुदाई का पहला मजा मुझे माया ने ही दिया. इसलिए मैं उसे नहीं भूल पाता हूं. मुझे अब चूत की तलब बहुत सताती है इसलिए आजकल मुठ मार कर ही काम चला रहा हूं.

तो दोस्तो, यही थी मेरी मेरी सेक्स लाइफ स्टोरी. आपको मेरी जिन्दगी की कहानी कैसी लगी? मुझे इसके बारे में अपने कमेंट्स में जरूर बताना. मुझे आप लोगों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा. मुझे आप नीचे दी गयी मेरी ईमेल पर भी अपने मैसेज भेज सकते हैं.

मेरी मेरी सेक्स लाइफ स्टोरी पढ़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद।

ShadiShuda Ladki Ke Doodh Ka Swaad

मैरिड वुमन सेक्स कहानी में पढ़ें कि चाची के घर एक शादीशुदा लड़की किराये पर आई. उसके मोटे चूचे देख मैं मचल जाता. मुझे उसके स्तनों का दूध पीने का मौका कैसे मिला?

नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम राहुल है. मैं अपनी एक और आपबीती आपके साथ साझा कर रहा हूं आज. अगर आपने मेरी पिछली
पढ़ी है तो उसमें मैंने आपको बताया था कि मैं अपनी चाची के साथ पुणे में रहता हूं और सफर के दौरान मैंने बस में चाची की चूत चोद दी थी. उसके बाद से चाची के साथ मेरे सेक्स संबंध बन गये थे.

फिर कुछ दिनों के लिए मैं अपने गांव में चला गया था. गांव में मैं तीन महीने तक रहा. इसी बीच मैंने अपनी मां की चुदाई भी कर डाली. वहां पर खूब सारी मस्ती की और फिर वापस पुणे में आया.

मां को छोड़कर आने का मन तो नहीं कर रहा था लेकिन मजबूरी में आना पड़ा. वो भी नहीं चाहती थी कि मैं उसे छोड़ कर पुणे वापस जाऊं लेकिन काम भी तो करना था. इसलिए मेरा वापस आना जरूरी था.

मगर मैं खुश भी था क्योंकि तीन महीने के बाद मैं फिर से अपनी चचेरी बहन श्वेता और अपनी गायत्री चाची से मिलने वाला था. श्वेता मुझे काफी याद करती थी. अक्सर मुझे अपने नंगे बूब्स और चूत की फोटोज भेजा करती थी।

वो अपनी नंगी चूत और चूचियां दिखा कर कहती कि ये दोनों मेरे लंड को बहुत याद कर रही हैं. उसकी चूत और चूचियां देख कर मेरा लंड फटने को हो जाता था. उसका सारा जोश मुझे अपनी मां की चुदाई करके निकालना पड़ता था.

मेरी चाची भी ऐसे ही फोटोज भेजती थी। उसका भी असर मां को ही झेलना पड़ता था. इसी के चलते बेचारी मां दिन में 3-4 बार चुद जाती थी। तीन महीने तक चोद चोद कर मैंने अपनी मां की चूत का भोसड़ा बना दिया था.

आखिरकार अब मैं पुणे पहुंच गया था. मैं घर आया तो घर का दरवाज़ा खुला हुआ था. अंदर से किसी अन्जान लड़की की आवाज आ रही थी जो काफी मीठी थी. मैं अंदर गया तो एक खूबसूरत सी लड़की हमारे घर पर बैठी हुई थी.

उसका रंग गोरा था, लंबे खुले बाल, नाजुक सी कमर और बड़े बड़े बूब्स थे. उसकी गांड भी बहुत बड़ी थी. देखने में जवान ही लग रही थी लेकिन बाद में ध्यान गया कि उसकी मांग में सिंदूर भी है. इतनी सुन्दर लड़की शादीशुदा निकलेगी मुझे ये बात हजम नहीं हो रही थी.

मन ही मन सोच रहा था कि इसके पति की किस्मत कितनी अच्छी है. वो तो इसको पाकर खुश रहता होगा. मेरी चचेरी बहन श्वेता उसके साथ गप्पें मार रही थी. जैसे ही श्वेता की नजर मुझ पर गयी तो वो खुशी से झूम कर मेरे गले से लिपट गयी.

श्वेता के कड़े निप्पल मेरी छाती में चुभ रहे थे. मस्ती में मैंने भी उसी के बदन की आड़ लेकर उसकी एक चूची को दबा दिया.
फिर मैं वहां से जाने लगा तो उसने मुझे रोका और उस नयी लड़की से मेरा परिचय करवाया.

उसका नाम नेहा था और वो हमारे घर पर किराएदार के रूप में रहने के लिए आयी थी. चाची ने ऊपर वाले माले का रूम जो पहले मेरा हुआ करता था वो उस लड़की को दे दिया था. मेरा सामान श्वेता के रूम में शिफ्ट कर दिया गया था.

अब मुझे समझ में आया कि श्वेता इतनी खुश क्यों हो रही थी. उसको अब रोज ही मेरा लंड चूसने के लिए मिलने वाला था. उसके बाद मैं श्वेता वाले रूम में चला गया. उस रात मैंने श्वेता के साथ खूब मजे किये.

रात भर दोनों एक दूसरे के गर्म जिस्मों के साथ खेलते रहे. कभी 69 पोजीशन में तो कभी घोड़ी की पोज में मजा लिया. कभी वो मेरे मुंह पर चूत रगड़ती तो कभी मैं उसके मुंह में पूरा लंड घुसा देता था. रात भर जाग कर उसने अपनी खूब चुदवाई. तीन बार जबरदस्त तरीके से झड़े हम दोनों.

सुबह 10 के करीब मेरी आंख खुली और मैं नहाने चला गया। नहा-धो कर मैं श्वेता संग नाश्ता कर रहा था।

इसी बीच मैंने श्वेता से पूछा- अरे श्वेता, वो नेहा क्या करती है?
वो बोली- अभी तो वो नौकरी की तलाश में है. बेचारी काफी मजबूर है. उसके आगे पीछे कोई नहीं है. दो साल पहले उसकी शादी हुई थी. एक साल का बच्चा भी है. उसके पति ने उसे दहेज के लालच में घर से निकाल दिया.

नेहा की कहानी सुन कर मुझे बहुत दुख हुआ.

इतने में ही नेहा सीढ़ियों से नीचे आती हुई दिखाई दी. उसकी नजर मुझसे मिली और मेरी उससे. दोनों ने एक दूसरे को स्माइल देकर हैलो किया.
मेरी नजर में नेहा की इज्जत काफी बढ़ गयी थी.

नाश्ते के बाद मैं उठ कर अपने रूम में चला गया. नेहा घर पर ड्रेस सिलने का काम भी किया करती थी. वो चाची और श्वेता के पास अक्सर अपने ड्रेसेज दिखाने आया करती थी.

एक दिन उसने चाची से ड्रेस पहन कर दिखाने की जिद की. वो अपनी ड्रेस लेकर श्वेता वाले यानि हम दोनों के रूम में चली गयी.

उस वक्त मैं अंदर रूम में ही था और कुछ लिखने के लिए बैठा हुआ था. मेरी पेन बेड के नीचे गिर गयी और मैं उसको उठाने के लिए नीचे झुका. पेन बेड के बीच में थी. मैं उसको निकालने बेड के नीचे घुस गया. उतने में ही नेहा ने अंदर आकर दरवाजा बंद कर लिया.

वो अपने कपड़े उतारने लगी. मैंने बेड के बाहर मुंडी निकाल कर देखा तो वो मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी और अपनी शर्ट खोल रही थी. ये देख कर मैं तो चौंक गया. इसी बीच मैंने अपनी पैंट की जेब से फोन निकाला और अपने फोन का कैमरा ऑन किया और वीडियो रिकॉर्ड करने लगा.

अब वो ऊपर से केवल ब्रा में खड़ी थी. उसकी कमर पर उसकी पैंट से बाहर निकली पैंटी की पट्टी दिख रही थी.

उसकी सेक्सी फिगर देख कर मेरा लंड तन गया और मैं अपनी पैंट की जिप से उसको बाहर निकालने की कोशिश करने लगा. लंड पूरा तना हुआ था इसलिए एक हाथ से निकालने में दिक्कत हो रही थी.

नेहा के बदन पर अब पैंट और ब्रा थी. उसके बूब्स तो दूध से भरे हुए लग रहे थे. उसने अपनी ब्रा ठीक की और पैंट का हुक खोल कर पैंट नीचे सरका दी. अब तो मेरे पसीने छूट गए।

मुझे अब कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। इतना ज्यादा गोरा शरीर! इतनी अच्छी फिगर! बड़े बड़े बूब्स! इतनी बड़ी गांड़ मैं अपनी लाइफ में पहली बार देख रहा था। उसने उस वक्त लाल रंग की ब्रा पहनी थी. आगे की तरफ से जालीदार, बहुत ही बारीक पट्टी वाली और बहुत ही सेक्सी।

उसने नीचे काले कलर की पैंटी पहनी थी जो पैंट निकालते समय आधी नीचे हो गई थी। उस वजह से उसके कूल्हे मुझे दिख रहे थे। उसने आगे की तरफ से अपना हाथ पैंटी में डाला और 2 उंगलियां अपनी चूत में डाल दीं. 2-3 बार अंदर बाहर करने के बाद उसने वो उंगलियां अपनी जीभ से चाट लीं.

मैं तो मदहोश हो रहा था और लंड को जोर जोर से मसल रहा था. इतनी उत्तेजना बहुत दिनों के बाद महसूस की थी मैंने। बस अब मेरा पानी निकालने ही वाला था। उतने में मेरा संतुलन बिगड़ गया और मेरा हाथ धाड़ से बेड पर लगा. नेहा डर कर एकदम से पीछे मुड़ गयी.

वो मुझे बेड के नीचे देख कर घबरा गयी. उसने अपने हाथों से अपने बदन को छुपाने की कोशिश की और गुस्से से बोली- तुम यहां क्या कर रहे हो?
मैंने भी अन्जान बनते हुए कहा- मेरी पेन बेड के नीचे गिर गई थी. वो निकाल रहा था। मगर आप यहां कब आईं?

नेहा अभी भी गुस्से में थी और शरमा भी रही थी।
मैंने कहा- आप इतना शरमा क्यों रही हो? आप आराम से मेरे आगे कपड़े बदल सकती हो। श्वेता और चाची भी मेरे आगे ही अपने कपड़े बदलती हैं. आप भी तो मेरी बहन जैसी हो। आपसे मैं उम्र में काफी छोटा हूं। आप शर्माइए मत, आराम से कपड़े बदलिये।

वो मुझे बाहर जाने के लिये कहने लगी मगर मुझे तो पूरा सीन देखना था. इसलिए मैंने बहाना बनाया कि अगर मैं बाहर गया तो चाची को शक हो जायेगा कि इतनी देर से मैं और आप एक ही बंद कमरे में क्या कर रहे थे?

उसको भी ये बात समझ आयी और वो मान गई. उसने मुझे रूम में रुकने दिया और मैं अपना मोबाइल लेकर बैठ गया. अब वो मेरी ओर मुंह करके ही कपड़े बदलने लगी क्योंकि वो दोनों ओर से फंस चुकी थी.

नेहा की चूचियां काफी टाइट लग रही थीं. वो अपनी नयी कमीज ट्राई कर रही थी. उसकी पीले रंग की नयी कमीज में से उसकी जालीदार लाल ब्रा भी दिख रही थी.
मैंने कहा- नेहा दीदी, मैं एक बात कहूं?

उसने गर्दन हिलाकर हां कहा। अब जबकि मैं उनको दीदी कह चुका था तो वो अब काफी खुल चुकी थी।
मैंने कहा- आपके कमीज में से आप की वो लाल वाली दिख रही है।
वो बोली- तो क्या करूं? मेरे पास पीले रंग की ब्रा नहीं है.

मैं उठ कर श्वेता की अलमारी में गया और एक पीले रंग की ब्रा निकाल कर उसको दे दी. वो खुश हो गयी और ब्रा पहनने लगी. मगर उसकी लाल ब्रा का हुक फंस गया था. जल्दी से निकल नहीं रहा था. मैंने उठ कर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया.

मेरा लंड अभी भी पूरे तनाव में था. उसने मेरे लंड को देख भी लिया मगर कुछ बोली नहीं. फिर उसने अपनी ब्रा उतार दी. उसकी गोरी गोरी चूचियों पर उसके भूरे रंग के निप्पल दिखने लगे. दिल कर रहा था कि उसके बूब्स को जोर से पकड़ कर भींच दूं और उसके निप्पलों को चूस चूस कर काट लूं.

नेहा अब श्वेता की ब्रा पहन रही थी. उसको श्वेता की ब्रा काफी टाइट आ रही थी. मैं उसकी हेल्प करने लगा. मगर उसके स्तन इतने बड़े थे कि ब्रा के कप उसकी चूचियों के लिए बहुत छोटे पड़ रहे थे. उनको टच करते करते मुझसे रहा न गया और मैंने उसके बूब्स को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया.

मैं ऐसे पकड़े हुए था कि उसको लग रहा था कि मैं उसके स्तनों को ब्रा के अंदर फंसाने की कोशिश कर रहा हूं. बहुत ही भरी हुई और टाइट चूचियां थी उसकी. इतना मजा मुझे किसी और के बूब्स को पकड़ने में नहीं आया था.

उनको मसलते मसलते मैंने पूछा- ये इतने सख्त क्यों हैं?
फिर अचानक से उसकी चूचियों से दूध निकल पड़ा. दूध की धार मेरे होंठों पर लगी. इतना मीठा दूध था उसका कि क्या बताऊं. मैंने आज तक किसी लड़की का दूध नहीं चखा था.

फिर पता नहीं उसे क्या हुआ कि वो मुझसे दूर हो गयी और उदास हो गयी.
फिर मेरे पूछने पर वो शादीशुदा लड़की बोली- मेरा बेटा एक साल का ही हुआ है और वो अभी मेरे पति के पास है. अभी जब तक फैसला नहीं हो जाता है मेरा बेटा मुझे नहीं मिल पा रहा है. मेरी छाती में दूध तो बनता है लेकिन उस दूध को पीने वाला कोई नहीं है. इसीलिए मेरी छाती इतनी बड़ी हो गयी है.

मैंने उसके दूध को हाथ से निकालने की सलाह दी.
वो बोली- उसका कोई फायदा नहीं है.
फिर मैंने कुछ सोच कर उसके स्तन को मुंह में भर लिया और बच्चे की तरह उसकी चूचियों का दूध खींचने लगा.

कुछ ही पल में उसको अच्छा लगने लगा. अपने दूध पिलवाते हुए वो मेरे बालों में हाथ फिराने लगी. मैं जोर जोर से उसके स्तनों को चूस रहा था. एक दूध को पीने के बाद मैंने दूसरे पर मुंह लगा दिया. मगर उसकी चूचियों का दूध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था.

नेहा सिसकारियां ले रही थी- आह … आह … आह … आह … करते हुए मेरे बालों को सहला रही थी. उसकी कामुक आवाजें कमरे में गूंजने लगी थी. उसके स्तन को पीते हुए मेरा एक हाथ अब नेहा की पैंटी की ओर जा रहा था.

मैं धीरे से उसकी पैंटी पर हाथ रख कर उसकी चूत को सहलाने लगा. उसने कोई विरोध नहीं किया. वो अपनी टांगों को बल्कि अब फैलाने लगी थी. फिर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया. उसके पैरों को सीधे किया और उसकी पैंटी को निकाल दिया.

अब वो मेरे सामने पूरी नंगी लेटी हुई थी. मैं उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चाटने लगा. उसके मुंह से कामुक आहें निकल रही थीं. कई देर तक वो भी मेरे होंठों को चूसने का मजा लेती रही और फिर मेरे सिर को नीचे की ओर धकेलने लगी. मैं जान गया कि उसका इशारा क्या था.

मैंने उसके दोनों पैर फैला दिए. उसकी चूत पर अपनी जीभ लगाई और चाट लिया. उसकी गुलाबी रंग की चूत कई महीनों से चुदी नहीं थी। पैरों के नीचे से हाथ ले जाकर मैंने उसके बूब्स पकड़ लिए और मजबूती से उसके बूब्स पकड़ कर उसकी चूत चाटने लगा।

वो मछली की तरह तड़पने लगी। थोड़ा थोड़ा रुक रुक कर मैं अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर तक डाल रहा था। उसकी चूत हल्का हल्का पानी छोड़ रही थी. उसकी चूत से निकल रहे रस को भी मैं पी रहा था.

अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था. झटके से मैं उठा और मैंने अपनी पैंट खोल कर अंडरवियर समेत नीचे कर दी और अगले ही पल अपने 7 इंची लंड को उसकी चूत पर सटा दिया. बिना देर किये मैंने एक झटका दिया और मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया.

तभी मैंने तुरंत ही एक दूसरा झटका भी दे दिया. मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में फंस गया और वो चिल्ला पड़ी. मैंने तभी उसके होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया और उसने गूं-गूं की आवाज करते हुए मेरी पीठ पर नाखूनों से खरोंच दिया. उसको दर्द हो रहा था मगर मैंने उसको दबोचा हुआ था.

इतने में ही श्वेता रूम की ओर भाग कर आई. मगर दरवाजा बंद था. वो नेहा को आवाज देने लगी तो मैं बोल पड़ा- कुछ नहीं हुआ. पैंट का हुक बहुत टाइट था.
श्वेता समझ गयी कि अंदर नेहा की चुदाई चल रही है.

मैंने नेहा की चूत में हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू किये. उसको मजा आने लगा और वो मेरा साथ देने लगी. अपनी गांड हिला हिला कर चुदवाने लगी.

कुछ ही देर की चुदाई के बाद वो मेरे ऊपर आ बैठी और मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूत में ले लिया और खुद ही चुदने लगी. वो अपनी कमर को हिलाते हुए कामुक आवाजें निकालने लगी.

उस रात मैंने बहुत देर तक उसकी चुदाई की. उसके स्तनों का सारा दूध निचोड़ निचोड़ कर पीया.

उस दिन के बाद से शादीशुदा लड़की नेहा ने कई बार मुझसे चुदवाई है और वो काफी खुश रहने लगी है. अब जब भी उसका मन करता है वो मेरे पास आ जाती है और उसकी चूचियों में भरा हुआ दूध मुझे पिला कर अपने बूब्स खाली करवा लेती है.

जिस रात को चाचा घर पर नहीं रहते हैं उस दिन तो हम चारों ही मिल कर मजा लेते हैं. एक ही बेड पर नेहा, श्वेता और चाची तीनों ही अपनी चूत चुदवाती हैं. मुझे भी तीन चूतों के बीच में एक लंड होकर इतना मजा आता है कि बस क्या बताऊं. जिन्दगी जैसे जन्नत सी लगने लगी है. बारी बारी से मैं तीनों को चोद चोद कर खुश किया करता हूं.

दोस्तो, इस तरह से मैंने एक शादीशुदा लड़की के चूचों से दूध पीया. उसका दूध पीने का मेरा अनुभव बहुत ही मजेदार रहा. आपको ये मैरिड वुमन सेक्स कहानी मजेदार लगी? मुझे अपनी प्रतिक्रियाओं के जरिये जरूर बतायें.

Desi Aunty Ki Chut Chudai Ka Maza

सभी दोस्तों को नमस्कार, मेरा नाम मेरा नाम राज शर्मा है. मैं मथुरा का रहने वाला हूं और HindiSexStories का बहुत बड़ा फैन हूँ.
आज मैं भी बहुत हिम्मत करके अपने इस अनुभव को आप सभी के सामने रखने का प्रयास कर रहा हूँ.

मैं जो सेक्स कहानी आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहा हूं. उसको पढ़ कर मुझे उम्मीद है कि सब भाई लोग हाथ से लंड हिलाना शुरू कर देंगे. और सारी महिलाएं अपनी चूत में उंगली करना चालू कर देंगी.

यह Hindi Sex स्टोरी एक सत्य घटना पर आधारित है. मेरे जीवन का जीवन का सुनहरा पल है.

उस समय मेरी उम्र 20 साल हुआ करती थी. मैं नया-नया पढ़ने दिल्ली आया था. ग्रेजुएशन के फर्स्ट ईयर के दिन थे. मैं पहली बार अपने घर से दूर अकेला रहने आया था.

इधर मैंने एक कमरा किराए पर लिया था. मुझ अकेले लड़के को ये कमरा बहुत मुश्किल मिला था. जिधर मुझे ये कमरा किराए पर मिला था. उस फैमिली में अंकल आंटी और उनके दो छोटे-छोटे बच्चे थे.

पहले ही दिन से आंटी को देख कर लगता नहीं था कि वो आंटी दो बच्चों की अम्मी हैं. आंटी का फिगर 34-30-36 का था. आंटी बहुत ही सेक्सी माल थीं. मेरा लंड तो उन्हें देख कर ही खड़ा हो गया था.

मगर मुझे अभी कमरा लेना था. तो मैंने बड़ी शराफत का परिचय दिया और अंकल आंटी के पैर छू कर उन्हें अपने शरीफ होने का परिचय दिया.
मेरे इस बात से अंकल मेरी तरफ से बड़े खुश थे कि लौंडा शरीफ घर से लग रहा है.

यह मुझे बात उनके हाव भाव से मालूम पड़ गई थी.

मुझे जल्दी ही मालूम चल गया था कि आंटी की उम्र 30 साल थी और अंकल की उम्र आंटी से काफी ज्यादा थी. आंटी की शादी जल्दी हो गई थी. उस समय आंटी की उम्र केवल 24-25 साल की ही लग रही थी. वो एकदम अप्सरा जैसी लगती थीं. उनकी चूचियां एकदम गोल थीं.

धीरे-धीरे मैं उनके घर में एक फैमिली मेम्बर की तरह रहने लगा. मैं ज्यादा से ज्यादा कोशिश करता था कि आंटी से ज्यादा बात करूं.

आंटी भी मेरे व्यवहार से पूरी तरह से खुश थीं और मेरा अच्छी तरह से ख्याल भी रखती थीं. उनके व्यवहार से मुझे लगता ही नहीं था कि मैं घर से बाहर आ गया हूं.

मैं उन्हें दिल ही दिल ही दिल में प्यार करने लगा था. मैंने उनके नाम से कई बार सपनों में उनके साथ प्यार किया था.

फिर एक ऐसी घटना हुई, जिसने मेरे जीवन का मुझे पहला सेक्स अनुभव कराया.
एक दिन रात को आंटी के कमरे की लाइट जल रही थी. उनके कमरे से ‘आह … धीरे करो …’ की कामुक आवाजें आ रही थीं.

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने एक स्टूल लगाकर उनके कमरे के रोशनदान से अन्दर झांकने की कोशिश की. मैंने देखा कि आंटी अपने पति के साथ संभोग कर रही थीं. उन दोनों ने एक भी कपड़ा नहीं पहना हुआ था.

आंटी एकदम नंगी झुकी हुई थीं और अंकल उनको डॉगी स्टाइल में चोद रहे थे. चुदाई के समय आंटी की दोनों चूचियां बड़ी तेजी से आगे पीछे हो रही थीं. मुझे आंटी की चुदाई देखने में कुछ डर भी लग रहा था. मेरा लहू बड़ी तेजी से मेरी धमनियों में दौड़ने लगा था.

डर तो था लेकिन उनकी चुदाई न देखने को लेकर मेरा दिल नहीं मान रहा था.

फिर अंकल ने आंटी को बिस्तर पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गए. मगर तभी अंकल झड़ गए और आंटी को देख कर लग रहा था कि वो अभी भी प्यासी थीं. क्योंकि अंकल झड़ने के बाद एक तरफ लुढ़क गए थे और आंटी अपनी चुत में उंगली करते हुए खुद को शांत करने में लगी थीं.

मैंने आज पहली बार आंटी को इस रूप में चुदते हुए देखा था.

मेरा मन कर रहा था कि उनके दरवाजे पर लात मार कर अन्दर जाकर आंटी को चोदना चालू कर दूँ. लेकिन ये सम्भव नहीं था.
मैंने अपने आपको संभाला और वहां से अपने कमरे में चला आया.

बाद में मुझे मालूम पड़ा कि आंटी अंकल की दूसरी पत्नी थीं. अंकल की उम्र आंटी से 20 साल ज्यादा थी.

उस रात पहली बार मैंने आंटी को इस रूप में देखा था.

अगले दिन से मेरा आंटी को चोदने का मन करने लगा था. लेकिन डर लग रहा था कि कहीं वो मेरे घर वालों से शिकायत ना कर दें. इसलिए मैंने किसी भी प्रकार की कोई रिस्क नहीं ली.

मेरी चाहत आंटी को चोदने की बन गई थी और मैं सोचता रहता था कि किस तरह से आंटी की चुत हासिल कर सकूँ.

फिर एक दिन उनका देवर उनके घर पर आया. उस समय उनके घर पर मैं, उनका देवर, व आंटी ही थीं.

मैं नहाने गया था, पर अचानक से आवाज आना बंद हो गई. मैं शुरू से ही बड़ा कमीना था.

मैंने बाल्टी में पानी चला दिया और धीरे से बाहर निकला और देखा कि फ्रिज के पीछे उनका देवर भाभी की चूत चोद रहा था उनकी साड़ी उठाकर.

बस मैं चुपचाप ये सब देख कर वापस आ गया और सही समय का इंतजार करने लगा.
उस रात को मैंने अपने हाथ से अपने को संतुष्ट किया.

अगले दिन मैं कॉलेज नहीं गया. उस समय मैं और सिर्फ आंटी घर पर थीं. अंकल कहीं बाहर गए हुए थे और वे शाम से पहले घर वापस नहीं आने वाले थे.

मैंने हिम्मत की और सीधे जाकर आंटी के गाल पर किस कर दिया और उनकी चूचियां मसलने लगा.
उस दिन पता नहीं कैसे मेरा डर खत्म हो चुका था.

मेरी हरकत होते ही आंटी ने मुझे धक्का दिया और मेरे गाल पर एक थप्पड़ मार दिया.

उनकी इस प्रतिक्रिया से मेरी तो फट गई थी. लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी.

आंटी चिल्ला कर बोलीं- ये क्या कर रहा है?
मैंने बोला- जो कल आप कल कर रही थीं. वही कर रहा हूँ. मुझे सब पता है कि कल आपका देवर आपकी चुदाई कर रहा था.

मेरी बात सुनकर उनके चेहरे पर कोई परेशानी का भाव दिखाई नहीं दे रहा था. ये मेरे लिए एक घबराने वाली बात थी.
आंटी बोलीं- तो?
मैंने उनसे बोला- तो मैं आपके पति को सब कुछ बता दूंगा.
उन्होंने बोला कि चल ठीक है बता देना. और मैं तुम्हारे घर पर अभी फोन करती हूं.

उनकी इस बात से मेरी तो फट गई.. मानो मेरे पैरों तले जमीन ही नहीं रही.

मैंने तुरंत आंटी के पैर पकड़ लिए- आंटी मुझे माफ कर दो, आगे से ऐसी गलती नहीं होगी.

बहुत देर बाद वह मेरी बात मान गईं. लेकिन मैं अब उनसे नज़रें नहीं मिला पा रहा था. मैं सहम गया था, इसलिए चुपचाप अपने कमरे में चला गया.

दो दिन तक चुपचाप मैं अपने कमरे में ही रहा.

तीसरे दिन अचानक उनके पति मेरे कमरे में आए और मुझसे बोले- यह सब कुछ सही नहीं हो रहा मानव.

अंकल की बात सुनकर मेरी गांड फट गई थी. मैं सोचने लगा था कि कहीं आंटी ने अपने पति को सब कुछ बता तो नहीं दिया.

मैंने घबराते हुए बोला- क्या हुआ अंकल?
अंकल बोले कि तुम जो पढ़ाई करते हो. वो सब ठीक है. मगर ऐसी भी क्या पढ़ाई कि तुम थोड़ी देर के लिए भी हमारे कमरे में नहीं आते हो.

अंकल की ये बात सुनकर मेरी जान में जान आई.
मैं ‘हूँ हां..’ कहते हुए अंकल से बात करने लगा.
वो भी मुझसे बात करने लगे.

उस दिन अंकल मुझे अपने साथ ले गए और हम दोनों ने साथ में खाना खाया. आंटी खाना परोसते हुए मेरी तरफ देख रही थीं, मगर मैं अब एक बार भी उनकी तरफ नहीं देख पा रहा था. खाना खाने के बाद मैंने अंकल आंटी के पैर छुए और कमरे में आ गया.

उस दिन अंकल रात की शिफ्ट में काम करने गए थे.

उसी रात पता नहीं मुझे क्या हुआ कि अचानक से मैं रात में आंटी के कमरे में चला गया.

आंटी उस समय गहरी नींद में सोई हुई थीं और उनके बच्चे उनके साथ के बेड पर सोए हुए थे. आंटी अलग तखत पर सोई हुई थीं.

मैंने धीरे से जाकर आंटी के तखत पर उनको छूने की कोशिश की. आंटी गहरी नींद में सो रही थीं. तभी पता नहीं मैं कैसे आंटी की साड़ी को धीरे धीरे ऊपर करने की कोशिश करने लगा. उनका पेट अब खुला हुआ था, जिस पर मैंने आंटी के पेट को छुआ.

कुछ देर बाद मैं आंटी की चूत के दर्शन करने में कामयाब हो गया. मेरे हाथ कांप रहे थे.
मैंने धीरे से उनके ऊपर आने की कोशिश की और उनकी चूत में एक उंगली कर दी.

अब आंटी उठ गईं और मुझे धक्का देने लगीं.

पर आज मेरी पकड़ इतनी मजबूती थी कि वो चाह कर भी मुझसे अलग नहीं हो पा रही थीं.

मैंने तुरंत अपना कच्छा उतारा और अपना खड़ा लंड उनकी चूत में डाल दिया.

एक ही झटके में मेरा पूरा का पूरा लंड आंटी की चूत में घुस गया था. उनको बहुत तेज दर्द हुआ, लेकिन बच्चों की वजह से वह कुछ जोर से आवाज नहीं कर पाईं.

मैंने अब सोच लिया था कि आंटी की मां की चूत … ये मुझे घर से निकालेगी बाद में मैं पहले ही इसके घर से चला जाऊंगा.

अब मैं आंटी की चुत में ताबड़तोड़ झटके पर झटके दे रहा था. मुझे आंटी की चुत इतनी टाईट लग रही थी मानो मुझे जन्नत मिल गई हो.

कोई पांच मिनट की चुदाई के बाद अब धीरे-धीरे आंटी को भी मजा आने लगा था. वो अपनी मादक आवाजें निकालते हुए मेरा साथ देते हुए चुदाई का मजा लेने लगी थीं.

कोई 20 मिनट की चुदाई में मेरे लंड से रस निकलने वाला था. मैंने अपना सारा रस उनकी चूत में ही निकाल दिया.

मुझे बाद में पता चला कि इस दौरान आंटी की चुत से भी दो बार मलाई निकल चुकी थी.

आंटी को छोड़ने के बाद मैंने उनसे माफ़ी मांगी और कहा- आंटी यदि आपको बुरा लगा हो तो मैं सॉरी बोलता हूँ. मगर न जाने क्यों मैं आपको चोदे बिना रह नहीं पाया था. यदि आप कहेंगी तो मैं अभी ही आपके घर से अपना सामान लेकर चला जाऊंगा.

आंटी ने कुछ नहीं कहा. मैं उनके कमरे से जाने लगा.

फिर मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं आपके घर में रह सकता हूँ?
आंटी ने कहा- मुझे एक आई पिल लाकर दे देना.
मैं समझ गया कि आंटी मुझसे ज्यादा नाराज नहीं हैं.

मैंने उन्हें अगले दिन गोली लाकर हाथ में दे दी.

इसके बाद मैं कुछ दिन तक डर डर कर रहा कि आंटी कुछ बवाल न कर दें. मैं अकेले में उनके पास जाता और उनसे सामान्य बातचीत करने की कोशिश करता रहता.

इसी बीच एक दिन उनका देवर फिर से आया और मैंने कुछ देर बाद सुना कि आंटी ने अपने देवर से झगड़ा कर लिया था. ये झगड़ा किस बात को लेकर हुआ था, ये मेरी समझ में नहीं आया.

जब वो घर से चला गया, तो आंटी ने मुझे आवाज दी- मानव सुनो.

मैं उनके पास गया तो आंटी मुझसे लिपट गईं और बोलीं- आज से मैंने अपने देवर से भी नाता तोड़ लिया है. अब मुझे बस तेरा सहारा है.
ये सुनकर मैं खुश हो गया और आंटी को गले से लगा कर प्यार करने लगा.

उस दिन अंकल की नाईट शिफ्ट थी.
तो आंटी ने कहा- मैं आज रात ग्यारह बजे तेरे कमरे में आऊंगी.

इसके बाद आज वो रात आ गई थी, जिसका मुझे बहुत दिनों से इंतजार था. आंटी मुझसे खुल कर चुदने की बात कह चुकी थीं.

इस रात का मुझे बहुत दिनों से इंतजार था. मैंने कमरे में गुलाब की पत्तियां व रूम फ्रेशनर लाकर रख दिया. मैंने अपने कमरे में गुलाब की पत्तियों से अपने बिस्तर को सजा दिया था.

मुझे दिन काटना बड़ा मुश्किल हो रहा था. मुझे रात के 11:00 बजे तक इंतजार करना था. इतनी बेचैनी हो रही थी मानो घड़ी रोक दी गई थी.

ठीक 11:00 बजे आंटी मेरे कमरे में आ गईं.

जैसे ही आंटी मेरे कमरे में आईं, मैंने उन्हें अपनी बांहों में ले लिया और बहुत जोर से गले लगाया.

उसके बाद मैंने उन्हें ऐसे मिठाई व दूध पिलाया जैसे कि वो मेरे लिए अप्सरा बन कर आई हों.

मेरे पूरे बिस्तर पर गुलाब की खुशबू और रूम फ्रेशनर की खुशबू महक रही थी. मैं उनके लिए गुलाब के फूल का गुलदस्ता और जुड़े में लगाने के लिए बेला की लड़ियां भी लाया था. एक चॉकलेट भी लाया था क्योंकि उस समय मेरे पास ज्यादा पैसे नहीं हुआ करते थे.

इससे व्यवहार से आंटी बहुत खुश हुईं और बोलीं- जो इज्जत तुमने आज मुझे दी है. उसे देख कर मैं खुश हो गई हूँ. मुझे तुम आज इतना प्यार दो कि मैं अपने पति को भी भूल जाऊं.

मेरा शुरू से यह मानना है कि आप हमेशा दूसरों की इज्जत करोगे, आपको प्यार ही मिलेगा.

मैंने आंटी को अपने हाथ से चॉकलेट खिलाई और उनके माथे पर पहली चुम्मी ली. फिर धीरे-धीरे मैंने आंटी के पूरे चेहरे पर किस किया. उन्होंने अपनी आंख बंद कर ली थीं.

फिर मैंने आंटी के होंठों पर होंठ रख लंबा किस किया. अब हम दोनों गरम हो चुके थे. फिर मैंने धीरे से आंटी का ब्लाउज उतार दिया और उनकी चूचियों को हाथ से दबाने लगा. आंटी की मस्त आवाजें निकलना शुरू हो गई थीं. इस समय हमारी जन्नत की सैर हो रही थी.

इसके बाद मैंने उनकी ब्रा को भी उतार दिया और मम्मों को धीरे धीरे अपनी जीभ से चाटने लगा. आंटी मेरे सर को अपने मम्मों पर दबाते हुए मुझे अपने निप्पल चुसवा रही थीं.

फिर मैंने आंटी की पूरी बॉडी चूमना शुरू किया. मैं ऊपर से किस करते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगा. फिर मैंने बिस्तर के नीचे से एक थर्मस में रखे हुए बर्फ क्यूब निकाले और उनकी नाभि में पर सैट कर अपनी जीभ से चाटने लगा.

इससे आंटी एकदम से गरमा गईं और उन्होंने मेरे बालों को बहुत जोर से पकड़ लिया. मैं समझ गया कि आंटी का काम हो गया.

फिर मैं उनको उलटा करके उनकी पूरी पीठ पर किस करने लगा. आंटी की हालत और खराब हो रही थी.

वो कह रही थीं- आह जल्दी-जल्दी कर ना … इतना क्यों तड़फा रहा है. मेरे से सब्र नहीं हो रहा है, तू जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दे.
मैंने बोला- अभी तो शुरुआत है जानू.

अब मैंने अपने और आंटी के सारे कपड़े उतार दिए. फिर मैं उनके पैर की तरफ से किस करते हुए उनकी चूत तक आ गया.

आंटी अपनी गांड उठाते हुए मुझसे चुत चटवाना चाह रही थीं. तभी मुझे मेरे दिमाग में एक आईडिया. एक दूसरी चॉकलेट जो पिघल चुकी थी, उसे मैंने आंटी की चूत में डाल दी और उसे जीभ से चाटने लगा.

चॉकलेट में अब अलग ही टेस्ट आ रहा था. मैंने कम से कम दस मिनट तक आंटी की चूत चाटी. फिर हम दोनों 69 में आ गए. दस मिनट में आंटी की चुत से और मेरे लंड से सारा रस निकल गया. जिसे हम दोनों ने पी लिया.

फिर थोड़ी देर तक ऐसे ही हम दोनों एक दूसरे की बांहों में पड़े रहे. चूमाचाटी करते रहे.

फिर चुदाई का दौर शुरू हुआ. मैंने तरह तरह की चीजें लंड पर लगा कर आंटी की चुत को चोदा इसमें शहद. आइसक्रीम चॉकलेट जैम आदि कई चीजें थीं.

अलग अलग स्टाइल में हम दोनों ने 35 मिनट तक सेक्स किया.
दूसरी बार में मैंने आंटी की चुत को शहद लगा कर चूसा और फिर से उनकी मस्त चुदाई की.

उस रात हम दोनों ने 3 बार चुदाई का मजा लिया.
फिर हम साथ में नहाए.

उस रात की चुदाई के बाद तो आंटी मेरी बहुत बड़ी फैन हो गई थीं. उस दिन के बाद मैं उनके साथ जब चाहे तब सेक्स कर लेता था. आंटी मुझे मना नहीं करती थीं.

मैंने आंटी के साथ डेढ़ साल चुदाई का मजा लिया. उसके बाद हम अलग हो गए.

हमको अभी भी कभी कभी मौका मिलता है तो सेक्स कर लेते हैं.

इस दौरान मैंने आंटी की गांड भी मारी थी. हम दोनों के बीच में काफी प्यार हो गया था. आंटी को तीसरा बच्चा होने वाला था, जो मेरे बीज से होने वाला था. यह बात सिर्फ मुझे और आंटी को ही पता है. अभी इस कहानी के माध्यम से आप लोगों को भी पता चल गया है.

अभी मैं विवाहित इंसान हूं और मेरा एक बच्चा भी है. लेकिन सही मायने में मेरे दो बच्चे हैं. मेरा दिल अपने उस बच्चे से मिलने को बहुत करता है, लेकिन मेरी किस्मत साथ नहीं देती है. इस बात से मैं बहुत दुखी भी रहता हूं.

तो दोस्तों ये मेरी सच्ची सेक्स कहानी थी, जो मैंने आप सभी के सामने रखी. आपको अच्छी लगी हो तो फीडबैक जरूर देना. मेरी ईमेल आईडी पर आप मुझसे संपर्क में रआपने अपना कीमती समय दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद.

मेरी HindiSexस्टोरी आपको कैसे लगी. मुझ़को Comment करके जरूर बताइए.

Instagram Par Mili Teacher Ko Choda

ऑनलाइन मिली टीचर लड़की को मैंने फ्लर्ट करना चालू किया. हमारी गर्म बातें होने लगीं. एक दिन उसने मेरा नम्बर माँगा और मुझे फोन किया. उसके बाद चुदाई तक बात कैसे पहुंची?

दोस्तो, आपका क्या हाल है, आशा है आप सब ठीक होंगे. मेरा नाम मोहित बरनाला है, मैं दिल्ली में रहता हूँ.

मैंने पंजाब की रहने वाली टीचर लड़की के साथ कैसे सेक्स सम्बन्ध बनाएं … पहले उसकी चर्चा कर लेता हूँ.

दोस्तो, सीमा बहुत हॉट है. उसका रंग गोरा है, बूब्स बड़े बड़े हैं और उसकी गांड बहुत ही ज्यादा मस्त है. मैं उसको ऑनलाइन मिला था. मेरी उससे इंस्टाग्राम पर मुलाकात हुई थी. मैं उसकी हर फोटो को लाइक करता … और अच्छे अच्छे कमेंट करता. इस पर उसका मुझको थैंक्स लिख कर आता. इसी तरह से हमारी बातें होने लगीं.

मैंने उसके साथ बातों बातों में फ्लर्ट करना चालू कर दिया. उससे बातें हुईं, तो पता चला कि वो एक स्कूल टीचर है और बरनाला पंजाब में अकेली रहती है. उसको घूमने फिरने का बहुत शौक है. मेरे नाम के आगे बरनाला देख कर वो मुझे पसंद कर रही थी.

कुछ ही दिनों में हमारी काफी बातें होने लगीं. मैंने भी उसे अपने बारे में सब कुछ बताया. उसके साथ जब खुली बातें होने लगीं, तो मैंने उसे अपनी सेक्स कहानी के बारे में बताया. उसका मन देख कर मैंने अपनी सभी स्टोरीज उसको इंस्टाग्राम पर उसको भेज दीं.

मैंने उससे पूछा कि कहानी पढ़ कर बताना कि कैसी हैं.
तो उसने मेरी कहानियों को पढ़ा और कहा- सभी कहानियां बहुत अच्छी लगीं.
मैंने उससे पूछा- सिर्फ अच्छी लगीं या कुछ और भी कहना चाहोगी?
उसने कहा- मैं तुम्हारी फोटो देखना चाहती हूँ.

मैंने अपनी असली फोटो अब तक इंस्टाग्राम पर नहीं डाली थी.

उसकी बात सुनकर मैंने उसे अपनी फोटो सेंड कर दी. उसने मेरी तारीफ़ की और मुझे भी अपनी एक हॉट सी फोटो भेजी.
मैंने उसे एक चुम्बन का इमोजी भेज कर उसकी गरम जवानी की तारीफ़ की. वो खुश हो गई.

अब हम दोनों ने रोज फोटो शेयर करनी शुरू कर दीं. उसने भी रोज अपनी एक ताज़ी हॉट फोटो मुझे सेंड करनी शुरू कर दी.
इस तरह हमारी गरम बातें होने लगीं.

एक दिन उसने मेरा नम्बर मांगा … और मैंने उसको अपना मोबाइल नंबर दे दिया.
उसने अपना नम्बर देने के लिए मुझको फोन किया. इस तरह से मेरे पास उसका नम्बर आ गया. मैंने उसका फोन उठा कर उससे बात करनी शुरू कर दी.

मैं- हैलो सीमा जी … आप कैसी हो?
उसने कहा- मैं ठीक हूँ, आप कैसे हो?
उसके बाद मैंने कहा- एकदम मस्त … आपकी आवाज बहुत मीठी है.
उसने मुझको थैंक्स कहा.

उसने पूछा- और क्या चल रहा है?
मैंने कहा- फोटो भेज कर बताऊं?
वो बोली- हां बताओ.

मैंने उसी वक्त व्हाट्सअप पर अपनी नंगी फोटो सेंड कर दी.

मेरा खड़ा लंड देख कर सीमा मुस्कुरा कर बोली- वाह, काफी मस्त है तुम्हारा.
मैंने कहा- आपको पसंद आया इसके लिए थैंक्स. मुझे भी आपकी ऐसी ही तारीफ़ करने का मन है.

ये सुनकर सीमा ने अपनी नंगी फोटो मुझको सेंड कर दी. इस फोटो में वो एकदम नंगी खड़ी थी. उसके बड़े बड़े बूब्स थे और उसकी चुत बिल्कुल साफ़ थी.

उसकी चुत पर एक भी बाल नहीं था. चुत का रंग हल्का ब्राउन था और बूब्स के निप्पल छोटे छोटे बहुत क्यूट थे. उसकी गांड बाहर को निकली हुई थी.

उसे देख कर मेरा मन कर रहा था कि अभी के अभी सीमा की चुत पर अपना मुँह लगा दूं और उसकी चुत का सारा जूस सारा पी जाऊं.

उसने कहा- क्या ख्याल है?
मैंने सीमा से कहा- यार सीमा मेरा तो मन कर रहा है कि तुम्हारे मम्मों को चूस चूस कर लाल कर दूँ और तुम्हारी चुत में अपनी जीभ डाल कर खूब चोदूं. सीमा मैं तुम्हारी चुत का पूरा रस पी जाना चाह रहा हूँ. तुम्हारी चुत की मलाई को खा जाना चाहता हूँ. साथ ही तुम्हारी गांड को भी चूसना चाहता हूँ.
इस पर सीमा ने बोला- तो आ जाओ … मना किसने किया है … आओ और पी जाओ … मेरा सब कुछ तुम्हारा है. जो भी तुम्हारी इच्छा है, वो मेरे साथ कर लो.

उसकी बता सुनकर मैं राजी हो गया और हम दोनों में मिलने का प्रोग्राम बन गया.

मैं तयशुदा प्रोग्राम के हिसाब से बरनाला आ गया.

उधर पहुंच कर मैंने सीमा को फोन किया- स्वीट हार्ट कहां हो?
उसने कहा- मैं घर पर हूँ.
मैंने कहा कि मैं बरनाला के रेलवे स्टेशन पर आ गया हूँ.
उसने किलकारी मारते हुए बोला- क्या सच!
मैंने कहा- हां.
उसने कहा- तुम उधर ही रुको … मैं आती हूँ.

मैंने उसका इंतज़ार किया.

सीमा मुझको एक्टिवा से लेने आ गई और मैं उसके साथ एक्टिवा पर बैठ कर उसके घर चला गया.

हम दोनों घर आ गए. मैंने घर में घुसते ही उसको अपनी बांहों में भर लिया. वो भी मुझसे लिपट गई. मैंने उसको अपनी गोद में उठा लिया. सीमा के चूतड़ बहुत सेक्सी थे. मेरे खड़े लंड ने उसकी गांड की दरार में घुसना शुरू कर दिया था.

मेरा लंड और भी ज्यादा टाइट हो गया था. हम दोनों में लम्बा किस किया. इसके बाद मैं उसे अपनी गोद में लेकर सोफे पर बैठ गया और उसके मम्मों से खेलने लगा.

उसने मुझसे खाने का पूछा तो मैंने हां कह दिया. उसने फोन पर खाना आर्डर कर दिया.

हम दोनों एक दूसरे में मदहोश थे. सीमा ने मेरी गोदी से उठ कर मेरा हाथ पकड़ा और मुझे बेड पर लाकर बैठा दिया. मैं बैठा तो मैंने उसे अपनी तरफ खींच लिया और वो मेरी गोद में आकर बैठ गई. उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मैंने उसे चूमते हुए महसूस किया कि सीमा की सांसें बहुत गर्म हो चली थीं.

सीमा मेरे होंठों को चूसने लगी, मैं भी उसके होंठों को चूसने लगा.

तभी मैंने उसकी जींस में हाथ डाल दिया और उसके चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा. वो मुझसे एकदम से चिपक गई, इससे उसकी गांड और भी ज्यादा खुल गई.

मैंने भी सीमा को अपनी बांहों में जोर से जकड़ लिया और उसको चूमने लगा. फिर मैंने उसको अपने नीचे लिटा लिया, उसकी आंखों को चूमा, उसके गालों को चूमा, उसके रसीले होंठों को चूमा.

इसके बाद नीचे आते हुए मैंने उसकी चूचियों को चूमा, उसकी चूचियों को हाथों में पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया. वो मचल उठी, तो उसकी टी-शर्ट को उतार दिया. मैं उसके मम्मों को चूमने लगा. उसके मम्मों का रंग दूध जैसा था. मैंने उसके एक मम्मे को अपने मुँह में भर लिया और निप्पल चूसने लगा. वो मस्ती से अपनी चूची पकड़ कर मुझे चुसवाने लगी.

अभी मैं आगे बढ़ता कि तभी दरवाजे की घंटी बज गई. सीमा ने अपने आपको ठीक किया और बाहर देखने चली गई.

खाना आ गया था. उसने खाना लिया और बेडरूम में आ गई. वो खाना रख कर किचन में चली गई, उधर से बर्तन और पानी लेकर आ गई.

हमने साथ में खाना खाया. सीमा को मैंने अपने हाथों से खाना खिलाया. सीमा मुझको खिला रही थी. खाना खाने के बाद सीमा बर्तन रसोई में रखने चली गई. मैं रूम में बेड पर लेट गया. सीमा कुछ पल बाद रूम में आ गई.

उसने जींस टी-शर्ट उतार कर एक बहुत ही सेक्सी गाउन डाला हुआ था. इसमें सीमा बहुत हॉट लग रही थी. उसे देख कर मैं बेड से खड़ा हुआ और सीमा के पास आकर उसके हाथों को चूमा. उसने मुझे हग कर लिया.

सीमा बोली- मोहित, मुझे आज अपना बना लो … मेरी प्यास बुझा दो.
मैंने कहा- सीमा अब तुम मेरी हो … आगे भी तुम मुझे अपना बनाकर रखोगी. प्रॉमिस करो.
उसने प्रॉमिस किया.

मैंने उसके एक करके करके सारे कपड़े निकाल दिए. उसके बाद उसने भी मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. फिर मैं उसके पूरे जिस्म को चूमने लगा. पहले मैंने उसके माथे पर किस किया, फिर उसको आंखों पर चूमा. उसकी नाक पर किस किया. उसकी सांसें बहुत गर्म थीं और आंखों में बहुत सारा प्यार था.

इसके बाद मैंने उसके गालों पर किस किया और जब मैं उसके होंठों पर आया तो उसने मेरे होंठों को अपने होंठों से दबोच लिया. वो मेरे साथ बिल्कुल चिपक गई और मेरे होंठों को अपने होंठों का रस पिलाने लगी. मैं भी उसके होंठों का रसपान करने लगा. होंठों से होंठ लड़ रहे थे और हमारी एक दूसरे की बांहें आपस में एक दूसरे को जकड़ रही थीं. हम दोनों एक दूसरे में समाना चाहते थे. हमारी टांगें एक दूसरे की टांगों से लिपटी हुई थीं. मेरा लंड उसकी चूत से टकरा रहा था और अन्दर घुसने की कोशिश कर रहा था. लंड बिल्कुल टाइट था और उसकी चुत में घुस जाने के लिए बेचैन था.

सीमा ने भी अपनी चूत के दरवाजे को खोल दिया और खड़े खड़े ही मेरे लंड को अपनी चूत के अन्दर समां लिया. लंड लेते ही वो मेरी कमर में टांगें डाल कर झूल गई और लंड उसकी चुत में अन्दर तक चला गया.

इस समय हम इस तरह से चिपके हुए थे कि हवा भी बीच में से नहीं गुजर सकती थी.

धीरे धीरे सीमा ने मेरे लंड पर झूलना शुरू कर दिया. मैंने उसे गोद में उठा लिया और बेड पर लिटा दिया. उसकी चूत से ढेर सारा पानी बह रहा था. मैं अपनी जीभ उसकी चूत के पास लेकर गया और उसकी चूत का रसपान करने लगा. पानी का टेस्ट नमकीन था. फिर मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत को चाट कर साफ़ किया.

सीमा मेरे सिर को अपनी चूत के अन्दर दबाने लगी और मैं अपनी जीभ को उसकी चूत की गहराई तक लेकर जाने लगा. सीमा सिसकारियां भरने लगी और दो मिनट में ही झड़ गई.
उसकी चूत का वनीला जूस मेरे मुँह पर लग गया. मेरा मुँह सीमा के जूस से पूरा सन गया था. ये देख कर सीमा हंसने लगी.

फिर मैंने खड़े होकर अपना चेहरा साफ़ किया और सीमा की तरफ देखा. सीमा के मुँह पर वासना की लाली थी और आंखों में चमक थी. वो बिस्तर पर चुत पसारे पड़ी थी.

मुझे देखकर वो अपनी बांहें फैलाते हुए बोली- मोहित मुझे आज न जाने कितने दिन बाद बहुत अच्छा लगा.

मैं उसकी बांहों में जाकर उसके ऊपर लेट गया. सीमा ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और चूमते हुए बोली- मोहित आई लव यू … मुझे बहुत अच्छा लगा.
मैंने कहा- अभी तो शुरुआत है जान … अभी तो पूरी रात बाकी है.

वो हंसने लगी. फिर हम साथ में खड़े हुए और बाथरूम में चले गए. सीमा ने शॉवर चालू कर दिया. हम दोनों साथ में नहाने लगे. मैंने बाथरूम से शॉवर जैल उठा लिया और सीमा की बॉडी पर डाल दिया. फिर मैं अपनी बॉडी से उसकी बॉडी को मसलने लगा. सीमा के मुलायम चूचे जब मेरी छाती को मसलते, तो मुझे बहुत अच्छा लगता. सीमा ने भी मेरे लंड पर जैल लगाया और अपनी चूत से उसको मसलने लगी. मुझको बहुत मजा आ रहा था और मैं अपनी हाथों से उसकी बॉडी को मसल रहा था.

तभी सीमा नीचे बैठ गई और मेरे लंड को अपनी मम्मों के बीच में लेकर लंड को मसलने लगी. उसके बाद मैं बाथरूम के फर्श पर लेट गया और सीमा मेरे ऊपर बैठ गई. उसने अपने चूतड़ों में शॉवर जैल लगाया और मेरे मुँह से लेकर मेरे पैरों तक हिप मसाज देने लगी.

जब उसकी गर्म गर्म चूत और गांड मेरे बदन से रगड़ खाते, तो मुझे बहुत सुकून मिलता. मैं तो समझो जन्नत में था.

इस तरह दस मिनट तक सीमा ने अपने चूतड़ों से मेरी पूरी बॉडी की मसाज की. मेरा लंड भी बहुत खुश था … वो हवा में हिचकोले ले रहा था. जब चूत लंड के ऊपर घिसती, तो मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर जाने की कोशिश करता. लेकिन बेचारा नाकाम रहता. उसके बाद सीमा ने शॉवर ऑन कर दिया. पानी की बूंदें हमारे ऊपर गिरने लगीं और सीमा मेरो बॉडी को अपनी हाथों से मसलने लगी. मैं उसकी बॉडी पर हाथ फेरने लगा.

कुछ मिनट तक हम इस तरह ही मजा करते रहे. फिर सीमा ने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और अपनी चूत को मेरे मुँह पर रगड़ने लग गई. उसकी चिकनी चूत से जैल की बहुत अच्छी महक आ रही थी. मैं मदहोश हो रहा था. इसी मदहोशी में मैं उसकी चूत को चाटने लगा. सीमा भी मेरे लंड को अपनी गले तक उतारने लगी. सीमा मेरे लंड को निगल लेना चाहती थी और मैं उसकी चूत को भूखे शेर की तरह चाट और चूस रहा था.

फिर सीमा खड़ी हो गई और मैं नीचे लेटा रहा. सीमा ने मेरे लंड को अपनी हाथ से पकड़ा और अपनी चूत पर सैट करके एक झटके में सारा लंड चुत के अन्दर ले लिया. वो लंड पर बैठ कर आगे पीछे हिलने लगी.

उसके मुँह से कामुक सिसकारियां निकल रही थीं- ओह ओह अहा अहा … कितना अन्दर तक मजा दे रहा है.

मैं भी अपने लंड से उसको ऊपर की ओर उछाल रहा था. जब लंड और चूत आपस में टकराते … तो पच पच की मधुर आवाज आने लगी थी. इस सेक्सी आवाज से बाथरूम गूंज रहा था और मैं पूरा जोर लगा कर सीमा को चोद रहा था.

दस मिनट बाद सीमा की स्पीड बढ़ने लगी. ऐसा लग रहा था कि वो झड़ने वाली है. तभी उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मैंने लंड से अपनी चुदाई स्पीड और तेज कर दी. मैं जोर जोर से सीमा की चूत मैं लंड को गहराई तक ले जाने लगा.

सीमा सिसकारती हुई बोली- आं … आह और जोर से मोहित … और जोर से … मैं गई … आह!

सीमा की चूत ने मेरे लंड को जकड़ लिया और झड़ने लगी. मैंने अपनी स्पीड में कोई कमी नहीं आने दी. मैं जोर जोर से लंड अन्दर बाहर करता रहा.

इतनी देर में सीमा झड़ कर खाली हो गई. उसने मुझको अपनी बांहों में जकड़ लिया और हांफने लगी. मैंने भी उसको जोर से हग कर लिया और लंड उसकी चूत के अन्दर ठांस कर मैं भी पड़ा रहा. मैं अभी बाकी था.

फिर मैंने सीमा को नीचे लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच आ गया. उसकी टांगों को ऊपर उठाया और अपने लंड को उसकी चूत पर सैट करके अन्दर डाल दिया. मैं जोर जोर से झटके देने लगा. सीमा मस्त होने लगी. मैं उसकी चूचियों को मसलते हुए उसके ऊपर लेट गया. उसने भी मुझे दबोच लिया.

मैं जोर जोर से लंड चुत में अन्दर बाहर करने लगा और उसके होंठों को चूस रहा था. वो भी मेरे साथ फिर से गर्म हो गई थी. मेरे साथ अपनी गांड को ऊपर उठा रही थी. चुदाई के साथ हम एक दूसरे के होंठों चूस रहे थे.

पांच मिनट बाद हम दोनों साथ में झड़ गए और एक दूसरे को जोर से अपनी बांहों में भर लिया.

सीमा तृप्त हो चुकी थी. मैं भी मस्त हो गया था. हमारे ऊपर शॉवर की बूंदें अब भी गिर रही थीं.

फिर मैं उठा और शॉवर बंद कर दिया. सीमा ने आंखें बंद कर लीं. मैंने उसे गोद में उठाया और कमरे ले आया.

हम दोनों बिस्तर पर गिरते ही सो गए.
यहां पर मैं अपनी सेक्स स्टोरी को विराम दे रहा हूँ. दोस्तों आपको सीमा की चुदाई की कहानी अच्छी लगी हो, तो मैसेज जरूर करना. इसके बाद मैं अपनी अगली सेक्स कहानी पेश करूंगा.

Principal Ki Premika Teacher Ki Chut Chudai

मेरे स्कूल की एक सेक्सी टीचर प्रिंसीपल से सेट थी, चुदाई करवाती थी. मैं भी उस टीचर की चूत मारना चाहता था. मुझे पहले मैडम की गांड मारने का मौक़ा मिला. कैसे?

दोस्तो, अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. मेरा नाम राजवीर है और मैं हरियाणा के अम्बाला का रहने वाला हूँ.
मैं मर्दों को लंड हिलाने का सुझाव और औरतों को चूत में उंगली डाल कर पानी निकालने का सुझाव देना चाहूँगा.

दोस्तो, अन्तर्वासना के मंच पर ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, जो मैं आप सभी के साथ साझा करने जा रहा हूँ.

ये बात तब की है, जब मैं 19 साल का था और बारहवीं कक्षा में पढ़ता था, हमारे स्कूल में एक शिक्षिका हुआ करती थीं. जिनका नाम था ज्योत्सना.

दोस्तो, पहले मैं आपको मैडम के फिगर के बारे में बता देता हूँ. मैडम का फिगर 34-30-36 का था … वो बड़े गजब की माल लगती थीं. उनके बड़े ही तीखे नैन नक्श और मदमस्त जिस्म को देख कर उन्हें काम की मूर्ति कहा जा सकता था.

जब वो चलती थीं, तो उनके छत्तीस इंच के चूतड़ ऐसे मटकते थे कि बस ज़ोर से पकड़ कर मसल ही डालो सालों को … और अपना खड़ा लंड सीधा बिना झटके के अन्दर उतार दो.

दूसरी तरफ मैडम भी कुछ कम नहीं थीं. उन्हें स्कूल के लड़कों के इन इरादों का अच्छे से पता था, तभी वो जानबूझकर लड़कों को देखते ही अपनी चाल बदल देती थीं. उनकी चाल देख कर ही लौंडे समझ जाते थे कि मैडम जानबूझ कर गांड हिला रही हैं.
मगर प्रिंसीपल सर के डर के कारण कोई भी उनसे कुछ नहीं कह पाता था.

प्रिंसीपल सर का डर क्यों था ये आपको इस सेक्स कहानी में आगे पता चल जाएगा.

वो जब काले रंग के सूट में स्कूल आती थीं, तो मन करता था कि उसी वक़्त पकड़ कर मैडम को चोद दूं. … पर कर नहीं पाया. फिर कुछ ऐसा हुआ कि सब कुछ ओता चला गया. मुझे मालूम ही नहीं था मेरी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

गर्मियों का मौसम था, स्कूल की छुट्टी हुई ही थी. सारे टीचर अपना अपना बैग आदि समेट करके अपने घरों को जाने के लिए तैयार हो रहे थे. उसी समय मुझे प्रिंसीपल सर की आवाज़ सुनाई दी. वो ज्योत्सना मैडम को अपने केबिन में बुला रहे थे.

दरअसल हमारा स्कूल इतना बड़ा नहीं था कि अगर प्रिंसीपल किसी को भी बुलाएं और हम तक आवाज़ ना पहुंचे. अभी मैंने कुछ दिनों से लगातार ध्यान दिया हुआ था कि जैसे ही स्कूल खत्म होता था, ज्योत्सना मैडम के लिए प्रिंसीपल सर का बुलावा आ जाता था.

उस दिन मैंने सोचा कि आज तो मामला क्या है … ये जानने के बाद ही घर जाऊंगा. कुछ कुछ उड़ती हुई बातें भी मुझे उनके कमरे में झाँकने के लिए मजबूर कर रही थीं.

चूंकि सर और मैडम की आशिकी के चर्चे मेरे स्कूल में दाखिला लेने से पहले से ही चले आ रहे थे. बस उस दिन मैंने मन बना लिया.

प्रिंसीपल सर की आवाज़ सुनते ही मैडम जी ने अपना पर्स उठाया और उनके चेंबर में चली गईं. मैंने शुरू में बाहर रह कर ही इंतजार करना ठीक समझा और इंतजार करने के लिए बाहर पड़ी बेंच पर बैठ गया. इस दौरान मेरे कान कमरे में से आने वाली हर आवाज पर लगे हुए थे, मगर अन्दर से एक सुई गिरने तक की आवाज नहीं आ रही थी.

मैडम को प्रिंसीपल सर के कमरे में गए हुए एक घण्टा होने को आया पर अब तक ना मैडम बाहर आई थीं और ना ही प्रिंसीपल सर.

मैंने अन्तर्वासना पर पहले भी ऐसी अनेक कहानियां पढ़ी हुई थीं … इसलिए मुझे समझते हुए ज़रा भी देर नहीं लगी कि अन्दर क्या चल रहा होगा.

थोड़ी देर और इंतजार करने के बाद मैंने अपनी कॉपी खोने की शिकायत लिखवाने का बहाना करके प्रिंसीपल के कमरे जाने का मन बना लिया और मैं उनके कमरे तक पहुंच भी गया, पर उधर ना ही प्रिंसीपल सर नज़र आए और ना ही मैडम नज़र आईं. मैं कमरा खाली देख कर भौंचक्का था. मुझे लगा कि शायद ये दोनों पीछे के रास्ते से निकल कर कहीं चले गए हैं और बाद में रूम में आ जाएंगे.

मगर उस दिन काफी देर हो चुकी थी तो मैं स्कूल से वापस आ गया, पर मैं इन बातों से इतना भी अंजान नहीं था कि मैं समझ ना सकूँ कि मैडम और सर कहां चले गए होंगे.

अगले दिन जब मैं स्कूल में ज्योत्सना मैडम से मिला, तो उस दिन के बाद से मैंने उन्हें घूर कर देखना शुरू कर दिया.

मैडम भी मेरे बदले बदले तेवर को समझ सकती थीं. चूंकि मैं स्कूल का प्रेसीडेंट था, जिस वजह से स्कूल की प्रार्थना से लेकर स्कूल के नोटिस आदि तक सभी के लिए प्रिंसीपल सर सीधे मेरा नाम ही सुनिश्चित करते थे.

ऐसे ही देखते देखते स्कूल का वार्षिक समारोह का दिन आ गया. पूरा स्कूल सज-धज कर तैयार था. सारे बच्चे, टीचर, उस दिन सभी सज-धज कर आए थे.
आप समझ ही सकते हैं कि मैं किसकी तरफ इशारा कर रहा हूँ.

ज्योत्सना मैडम ने लंबा सा गाउन डाला था, वो भी सुर्ख लाल रंग का, जिसमें से उनके चुचे लगभग बाहर को निकलने को हो रहे थे. मैंने कई बार नोटिस किया कि प्रिंसीपल सर और मैडम के बीच आज बात बिल्कुल भी नहीं हो रही थी.

मैंने कारण जानने के लिए मैडम को टटोलने की कोशिश की, पर मैडम ने अपना मुँह नहीं खोला. उनके इस बर्ताव से मेरा आश्चर्य सातवें आसमान पर था कि आज मैडम इतना मस्त माल लग रही थीं और प्रिंसीपल सर कुछ घास ही नहीं डाल रहे हैं.

मैंने सोचा अपने संयम पर काबू रखने में ही भलाई है. वक़्त आने पर अपने संयम का सही फायदा मिल कर रहेगा. बस ये सोच कर मैं प्रोग्राम की बाकी तैयारियों में लग गया.

उस दिन छह सात प्रोग्राम्स के बाद वार्षिकोत्सव समाप्ति की ओर चला ही था और प्रिंसीपल सर उठ कर चले गए थे. तभी मेरे मन में एक उपाए सूझा. मैंने बाहर जाकर देखा तो पाया कि प्रिंसीपल सर प्रोग्राम को खत्म करने के बाद के कामों में लगे हुए थे और उनको अभी एक घंटा लग सकता था.

ये देख कर मेरे दिमाग में एक खतरनाक आईडिया आ गया. मैंने अपने एक साथी को ये कह कर मैडम के पास भेज दिया कि प्रिंसीपल सर ने आपको अपने ऑफिस में बुलाया है, उन्हें आपसे कुछ जरूरी काम है.

जितनी देर में मेरा साथी मैडम को ये बात बताता … उतनी देर में मैं प्रिंसीपल सर के ऑफिस में चला गया और कमरे की लाइट्स ऑफ करके मैं दरवाजे के पीछे छिप गया.

दो मिनट ही बीते होंगे कि मैंने किसी के आने की आहट सुनी. कुछ ही पलों में ज्योत्सना मैडम ऑफिस के अन्दर आ चुकी थीं. जैसे वो अन्दर आईं, मैंने झट से दरवाजा बंद करके उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनके मोटे मोटे मम्मों को कपड़ों के ऊपर से ही दबाने में लग गया.

मैडम की आवाज़ आई- सर, आज सारा कुछ यहीं कर लेंगे … या उसी वाले कमरे में चलेंगे.

किसी दूसरे कमरे का नाम सुन कर मेरा दिमाग़ ठनका और मुझे समझ में आ गया कि उस दिन जब मैं शिकायत के बहाने से आया था, तब मुझे इस ऑफिस में कोई क्यों नहीं मिला था.

मैडम ने दुबारा आवाज़ लगाई- सर अंदर वाले कमरे में चलो न.

मैंने ये सुनते ही मैडम को आगे की तरफ़ टेबल पर झुका कर उनकी ड्रेस ऊपर करके अपना लंड उनके चूतड़ों की दरार के बीच के छेद पर लगा दिया. जब तक वो कुछ सोच पातीं, इतनी देर में मेरा आधा लंड टीचर की गांड के अन्दर प्रवेश कर चुका था.

वो बहुत ज़ोर से चिल्लाने लगी थीं और कह रही थीं- आह सर आपको ये शौक कब चढ़ गया … कल तक तो आप बस चुत मार कर ही शांत हो जाते थे … आह आज शुरुआत ही इतनी ख़तरनाक है … क्या इरादे हैं आज हमारे प्रिंसीपल सर के..!

मैडम की बातें सुनकर मुझे मजा आने लगा था और मेरा जोश बढ़ भी रहा था. मैंने मैडम की गांड मारना चालू रखा और पन्द्रह मिनट की धक्कम पेलाई में मैंने मैडम की गांड में ही अपना वीर्य डाल दिया. जैसे ही मैं थोड़ा पीछे को हुआ, मैडम ने घूम कर मेरी ओर रूख़ कर लिया और वो मुझे देख कर सन्न रह गईं. मैं उनके सामने ही अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए दुबारा खड़ा करने की कोशिश में लगा था.

तभी मैडम ने मुझ पर चिल्ला कर कहा- अरे राज … ये क्या कर रहे हो तुम … और तुम अन्दर कब आए?
मैंने उन्हें सारा सीन समझाया और कहा- मैडम देखो … मुझे आपके साथ वही सब कुछ करना है, जो आप प्रिंसीपल सर के साथ हर रोज करती हो. अगर आप राजी राजी करोगी, तो आपके लिए सही है. नहीं तो स्कूल इतना बड़ा भी नहीं है कि आपके कारनामे किसी से छिपे रह जाएं. बात फ़ैल जायेगी तो आपकी ही ज्यादा बदनामी होगी.

इतना कहते ही मैडम ने मेरा लंड पकड़ लिया और उसको मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने और चाटने लगीं.
वो कहने लगीं- मैं तो कब से तुझसे चुदना चाह रही थी. तू ही गंडफट था तो मैं क्या करती. तूने कभी मुझे दाना ही नहीं डाला.

मुझे समझ आ गया कि मैडम मस्त हो गई हैं और फिर से मजा देंगी. अब मैंने मैडम के दूध मसलने शुरू कर दिए.

मैडम बोलीं- यार राज, मेरा गाउन खराब हो जाएगा. इस पर सिलवटें पड़ जायेंगी.
मैंने कहा- तो गाउन को उतार दो ना मैडम … आपके पक्के आशिक को आज पूरी नंगी मैडम चोदने का मन है.

मैडम ने गाउन उतार दिया और ब्रा पैंटी में आ गई’. मैंने अगले ही पल उनकी ब्रा पैंटी भी हटा दी और कमरे में एक छोटी लाईट जला दी. मैडम इतना चुदने के बाद अब भी मस्त माल थीं. मैं उनके एक दूध को चूसने लगा और दूसरे को मसलने लगा.

मैडम बोलीं- मुझे लंड ठीक से चूसने दे.
मैंने उनके दूध छोड़े और लंड से उनके मुँह को चोदना शुरू कर दिया.

थोड़ी ही देर में मैंने दुबारा अपना सारा माल मैडम के मुँह में डाल दिया.

इसके बाद मैंने मैडम को टेबल के ऊपर बिठाया और उनकी चूत चाटने लगा. दस मिनट के अन्दर ही उनकी चूत चुदने को तैयार थी.

मैडम ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थीं- राज आह … अब तो अपना लंड मेरी चूत में पेल दो. मेरी चूत पानी छोड़ रही है लंड हड़पने के लिए. इसका पेट भर दो अपने गर्म लंड से.

पर मैं आज उनको तड़पा तड़पा कर मजा देना चाहता था. सो मैंने उन्हें ऐसे कुछ मिनट और तड़पाया. फिर अपना सात इंच का लंड उनकी चूत में एक बार में ही उतार दिया.

मैडम की गीली चूत चौड़ी हो गयी और मजे के कारण उनकी आह निकल गई और हम दोनों चुदाई का मजा लेने लगे.

टीचर मैडम के मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकल रही थी. मैडम प्रिंसीपल को भी गालियाँ निकाल रही थी. कह रही थी – मादरचोद कुत्ता साला … रोज मुझे चुदाई के लिए दफ्तर में बुला लेता है. पर उससे होता जाता कुछ नहीं! दो मिनट पुच पुच करके झड़ जाता है. मुझे तो नौकरी करनी है तो मजबूरी में उसके नीचे लेटना पड़ता है. नहीं तो ऐसे चूहे को तो मैं अपना मूत भी ना पिलाऊँ.

लगभग बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया और उनके ऊपर ही निढाल होकर गिर पड़ा. फिर उन्होंने मुझे होठों पर किस किया और चुदाई के लिए थैंक्स कहा.
मैडम ने कहा- आज गांड और चूत मरवा कर मजा आ गया.

वो कहने लगीं- अब आज से साले प्रिंसीपल की माँ की चुत … आज के बाद मुझे जब भी मेरी चूत लंड मांगेगी, मुझे चुदना होगा तो मैं तुम्हें अपने घर बुला लूंगी.

बस इसी वादे के साथ हम प्रिंसीपल के ऑफिस के बाहर आए, तो देखा कि प्रोग्राम बस ख़त्म होने वाला था और प्रिंसीपल सर अपने ऑफिस में आने ही वाले थे.

इसके बाद भी मैंने मैडम की कई बार चुदाई की, उसकी कहानी मैं अगली बार लिखूंगा. आपके ईमेल मुझे हौसला देंगे. आप कमेंट्स करके भी मुझ तक अपनी राय पहुंचा सकते हैं.

Pehli Chudai Mai Aankh Bhar Aai


Hindi Sex Stories Me Aaj Janiye 60 % Mard Ko Kabhi Pata Nahi Chal Pata Ki Unki Patni Ya Girl Friend Ka Affair Kisi Kareebe Se Hi Chal Raha Hai Unki Naak Ke Theek Neeche.. Wahi 95 % Mahila Ko Kabhi Na Kabhi Unke Pati Ke Affair Ka Pata Chal Hi Jaata Hai..

लेखक – आलोक

हाय दोस्तो..

मेरा नाम आलोक है और मैं जयपुर का रहने वाला हूँ.

आज, मैं आपको अपनी स्टोरी बताने जा रहा हूँ जो मेरे साथ 2010 मे हुई.

तब मैं 20 साल का था, और वही जॉब करता था.

मस्त कहानियाँ हैं, मेरी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर !!! !!

मैं, मेरे परिवार के साथ रहता था.

मेरे एक रिलेटिव्स है जिनके बेटे की शादी कुछ साल पहले हुई थी. वो मेरे भाई लगते हैं, भाभी की उम्र कोई 30 रही होगी तब शायद और वो बहुत सुंदर थी हर तरीके मे.

फेस, फिगर भी अच्छा था और दिखती भी अच्छी थी पर उनके ससुराल वाले अच्छे नहीं थे तो वो सब मुझसे बात करती थी तो हम लोगों की अच्छी जमती थी.

वो वैसे कोटा मे रहती थी पर उनके रिलेटिव्स जयपुर मे थे.

कुछ दिन बाद उनका जयपुर आना हुआ, एक शादी मे.

मैं बहुत खुश था और वो भी बहुत खुश हुए और मेरे साथ शॉपिंग के लिए चली आई.

शॉपिंग मे ज़्यादा देर होने से, वो मेरे यहाँ ही रुक गई क्यूंकी वहाँ से शादी वाली जगह दूर थी जोकि एक फार्महाउस था.

मैं भी खुश था की कुछ टाइम मैं भी उनके साथ रहूँगा.

मेरा बंगलो बड़ा था जिसमे बाकी सब परिवार नीचे रहता था और मैं दूसरे फ्लोर पर रहता था और गेस्ट 1 फ्लोर पर जोकि वेकेंट रहता था.

भाभी के साथ, 4 साल का बच्चा भी था.

भाभी और मैं सच मे एक दूसरे को प्यार करने लगे थे.

उनकी खुशी के लिए सब कुछ करता था मैं.

डिन्नर करने के बाद सब लोग नीचे सो गये और मैं और भाभी 2 फ्लोर पर आ गये मेरा रूम देखने.

मैंने कहा उन्हें की रूम बड़ा है आप चाहो तो यही सो जाओ, मुझे भी कंपनी मिल जाएगी…

अकेले 1 फ्लोर पर शायद अच्छा नहीं लगता उन्हें तो वो खुद मान गई और मैंने गाने लगा दिए और हम कई घंटों तक बात करते रहे.

उनका बच्चा सो गया तो उसे डिस्टर्ब ना हो तो अलग सुलाया और भाभी और मैं साथ मे थे.

मुझे रात को सोते टाइम किसी चीज़ के ऊपर हाथ रख के सोने की आदत थी जैसे सॉफ्ट टॉय या तकिये.

गाने चल रहे थे और मैं हल्की नींद मे था शायद और आदत से मजबूर हो कर मैंने भाभी क ऊपर हाथ रखा तो वो और पास आ गई.

मुझे अच्छा फील हुआ, प्यार वाली फीलिंग आ रही थी तो मैंने भी उन्हें गले से लगा लिया और वो भी खुशी से लिपट गई.

फिर क्या था कई साल का प्यार जो उनके अंदर था एक साथ निकल आया.

हम दोनों एक दूसरे को बहुत टाइट्ली हग करते रहे, वो फीलिंग ही अलग थी जो बताई नहीं जा सकती.

उनकी आँखो मे चमक थी.

फिर मैं भी खुद को रोक नहीं पाया और फाइनली हमने एक दूसरे को किस किया..

फ्रीक्वेन्सी इतनी तेज थी की कारेब 20 मिनिट तक हमने किस किया पूरी तरह एक दूसरे मे खोके जैसे एक ही जिस्म हों.

हम दोनों बहुत खुश थे..

कहते हैं ना की प्यार सबको नसीब नहीं होता.

अब जो शुरूवात हो चुकी थी वो रुकने वाली नहीं थी मैंने उनके माथे पर, गाल पर, कान के पीछे, और होंठ पर इतने किस किए अलग अलग अंदाज़ मे की उनके तो होश ही उड़ गये और सिर्फ़ हल्की आवाज़ निकल रही थी लव यु आलोक की..

मैं भी पूरी तरह उनका प्यार कारण चाहता था सो मैंने फिर धीरे धीरे आगे आते हुए उनकी साड़ी को हटाया.

अब शरम जैसा कुछ नहीं था तो उन्होने भी अपोज़ नहीं किया.

साड़ी हटते ही मैंने उनकी गर्दन पर किस किया क्या फीलिंग थी, बीच बीच मे होंठ पर भी.

बिल्कुल लोली पोप के जैसे होंठ चूसे ही जा रहा था.

फिर मैंने गर्दन से नीचे उनके ब्लाउस तक पहुँचा अब मैं भी रुकना नहीं चाहता था तो जल्दी से उनके बटन्स ओपन किए.

वो काली ब्रा मे थी जैसे काले गुलाब जामुन सफेद चासनी मे डूबा हुआ हो.

अब मैंने देरी ना करते हुए उनकी तरफ देख तो पर्मिशन थी मुझे और वो भी एग्ज़ाइटेड थी शायद अब नहीं रुकना चाहती थी.

सुना है लड़कियो मे लड़को से ज़्यादा सेक्स फीलिंग होती है.

जैसे ही ब्रा ओपन की तो बिलीव नहीं हो रहा था की ये जैसे गुलाब जामुन मेरे हाथ मे थे.

ई मीन उनके बूब्स.

मैंने बच्चे की तरह उन्हें चूसना शुरू किया और भाभी ने मोनिंग करना..

ऑश पी लो इन्हे अच्छे से, चूसो, प्यार करो.. ये अहसास अलग है मेरे लिए, नहीं तो तुम्हारे भाई को तो कोई मतलब् नहीं मुझसे.. आज से इनका ध्यान तुम ही रखना.. सिर्फ़ तुम्हारे हैं ये अब से..

मैंने दोनों बूब्स चूस चूस के लाल कर दिए.

उसके बाद मैं उनकी वेस्ट पर आया और जीभ से चाटना शुरू किया और किस कर रहा था.

भाभी से कंट्रोल नहीं हो रहा था.

दोनों हाथ से बूब्स भी प्रेस कर रहा था.

अच्छे से किस करने के बाद मैंने उनके बीचे के कपड़े हटा दिए और पैंटी भी.

मेरे सामने एक जलपरी थी बिल्कुल सफेद पानी की तरह.

मैंने धीरे से उनकी चूत पर किस किया वो एक दम एग्ज़ाइट हो गई और मेरे सर को पकड़ के प्रेस करने लगी.

आह ह आ आह ह आलोक, ऊ ओह.. बस करो, प्लीज़… नहीं तो मैं जल्दी ही झड़ जाओंगी… अभी तो बहुत कुछ बाकी है…

करीब 5 मिनिट के बाद, उन्होने मुझे ऊपर उठाया और मेरे कपड़े उतार के मेरे पेनिस को मुंह मे ले लिया बिल्कुल एक बच्चे की तरह.

मैं आह ह आह ह की आवाज़ निकल रहा था और भाभी मेरा लंड खाए जा रही थी जैसे कब की भूखी है.

क्या फीलिंग थी, बता नहीं सकता. पूरा ब्लड ऊपर भाग रहा था और मैं हवा मे था.

उनका ब्लोवजोब का अंदाज ही अलग था बिल्कुल.

फाइनली मैंने भाभी को फिर एक लंबा किस दिया और उनके ऊपर आ गया और बिना टाइम गवाए अपना लंड उनकी चूत मे डाल दिया…

उन्होने हाथ से पकड़ के मुझे बच्चे की तरह रास्ता दिखाया और मेरा पूरा लंड उनके अंदर था.

उनकी चीख निकली पर मैंने होंठ रख दिए, शायद काफ़ी दिन बाद कर रही होंगी इसलिए दर्द हुआ.

फिर मैं कुछ देर रुका और उन्हें दर्द नहीं देना था तब फिर धीरे धीरे अंदर बाहर किया…

बाद मे स्पीड बड़ा दी..

वो मुझसे लिपटी हुए थी और आवाज़ें निकल रही थी आ अह ह आलोक … कम ओं … ऊ ऊह ह मज़ा आआ र् हा ई मेरी जा नन्न… आज कितने दिन बाद पूरी तरह से सेक्स किया है मैंने…

उनकी ये आवाज़ें मेरा खुमार बड़ा रही थी, ज़्यादा आवाज़ भी नहीं कर सकती थी नहीं तो बच्चा जाग जाता उनका.

भाभी ने कहा – बस करें… पर मैं कहाँ रुकने वाल था..

मैंने और करता रहा..

फिर भाभी को किस किया और उन्हें उल्टा होने को कहा, वो समझ गई की मैं क्या चाहता हूँ..

फिर मैंने डॉगी स्टाइल मे किया.

दोनों हाथ मे बूब्स और लीप किस करते हुए और मेरा लंड अंदर बाहर हो रहा था..

45 मिनिट के बाद, भाभी ने कहा की आगे के लिए भी छोड़ो कुछ की सारा आज ही करना है.. तब तक मैं भी सॅटिस्फाइ हो चुका था फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट के सो गये.

रात मे 2-3 बार नींद खुली, मैंने उतनी बार भाभी के साथ सेक्स किया. सोने का मूड था ही नहीं था असल मे तो पर एक बार सेक्स करने के बाद थोड़ा आराम चाहिए होता है क्यूंकी खुशी और रिलॅक्स से बॉडी फ्री हो जाती है पूरी तरह.

इतने साल हुए पर वो फर्स्ट टाइम वाली फीलिंग नहीं जाती कभी दिल और दिमाग़ से.

जब तक भाभी जयपुर मे रही हमने यूही एक दूसरे के साथ अच्छा टाइम बिताया.

कामिनी जी आगे भी कहानी लिखता रहूँगा.

Hindi Sex Stories Me Hazaro Kahaniya Hai Meri Site Par… Padhte Rahiye Aur Muth Maarte Rahiye…

Meri Suhaagraat

नमस्कार दोस्तों मैं टीना आज आपके सामने अपने जीवन का एक किस्सा लेकर आई हूं। मैं उम्मीद करती हूं कि, बाकी कहानियों की तरह आप सब लोग इसे भी अपना प्यार दोगे।

इस कहानी में पढिए किस तरह से मेरे पति ने मुझे हमारी सुहागरात पर चोदकर मेरी सारी इच्छाएं पूरी कर दी। पिछले साल ही मेरी शादी हुई है, घरवालों ने मेरे लिए एकदम सही लडका चुना था।

मेरे पति का नाम शंकर है, और वो मुझसे उम्र में दो साल बडे है। शंकर दिखने में बहुत ही हैंडसम है, उनके बात करने का अंदाज सबको उनकी ओर आकर्षित करता है।

उन्हें देखकर कोई भी बोल सकता है कि, उनकी शादी से पहली काफी गर्लफ्रैंड रही होंगी। उन्होंने मुझे हमारी दूसरी मुलाकात में ही उनके बारे में सबकुछ बता दिया था।

शादी से पहले वो बस एक ही रिलेशनशिप में थे, और उस लडकी के साथ वो काफी आगे तक का सफर सोच चुके थे। लेकिन उनकी किस्मत, वक़्त और हालात ने उन दोनों को एक-दूसरे से दूर कर दिया।

शादी से पहले मैं कभी किसी के प्यार में नही पडी। तो मेरा पहला रिलेशनशिप मेरे पति के साथ ही था। शादी से पहले हम दोनों कई बार एक-दूसरे को बाहर मिले, ताकि एक-दूसरे को ठीक से जान सके।

उन दिनों ही मैं शंकर के प्यार में पड गई। अब मुझे ऐसा लग रहा था, जल्द से जल्द हमारी शादी हो जाए ताकि हम एक-दूसरे के साथ रह सके।

फिर धीरे धीरे हमारी बातें बढने लगी, हमेशा मैं उनके बारे में ही सोचती रहती थी। उसके बाद जैसे तैसे शादी का दिन आया और हमारी शादी हो गई।

उस दिन तो हम दोनों ही बहुत थक चुके थे, तो जैसे ही मेरी बिदाई हुई और मैं उनके घर गई। वहां जाने के बाद भी कुछ रस्में करनी थी, जैसे तैसे करके सारी रस्में होने के बाद हम सो गए।

फिर आया हमारी सुहागरात वाला दिन, उस दिन सुबह से ही शंकर की बहनें मुझे रात के बारे में पूछकर चिढाने लगे थे। मुझे उनका इस तरह से चिढाना अच्छा ही लग रहा था।

खैर रात होते ही उनकी बहनों ने मुझे नहाने के लिए भेज दिया। उनमें से जो सबसे बडी बहन थी, उसने मुझे वीट थमाते हुए कहा,“मर्दों को वहां पर बाल पसंद नही होते, तो तुम वो साफ कर लेना।”

मैंने बस ठीक है कहा और फिर बाथरूम में घुसकर अंदर से कुंडी लगा दी। मैं शंकर को याद करते हुए ही नहा रही थी, नहाते समय अब आगे क्या होगा यह सोचकर ही मेरे शरीर में एक अजीब सी लहरें दौडने लगी।

मैंने फिर अपनी योनि के आसपास के सारे बाल वीट लगाकर निकाल दिए, और अपनी योनि को पूरी तरह से चिकना बना दिया। आज मैं कली से फूल बनने जा रही थी।

नहाने के बाद, उनकी तीनों बहनों ने मिलकर मुझे सजाया। फिर कुछ देर इधर उधर की बातें करने के बाद, दूध का गिलास मेरे हाथ में थमाकर मुझे अपने नए कमरे में ले जाकर बिस्तर पर बिठा दिया।

थोडी ही देर में, शंकर कमरे में आ गए, तो उनकी बहनें उठकर बाहर जाने लगी। जाते जाते वो उनको भी छेडने लगी। सब के बाहर जाते ही शंकर ने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और फिर मेरे पास आकर बैठ गए।

मैं अपनी शादी का जोडा पहनकर घूंघट ओढे बैठी हुई थी।उन्होंने मेरे पास आकर मेरा घूंघट निकाल दिया, और मेरा चेहरा देखकर बोले, “आज तो तुम्हे देखकर चांद भी शरमा जाए। बला की खूबसूरत लग रही हो।”

फिर वो उठकर अपनी जेब से कुछ निकालने लगे। उन्होंने अपनी जेब से एक सोने की चेन निकाली, और मुझे पहनाने लगे।

तो मैंने भी उठकर दूध का गिलास जो टेबल पर रखा हुआ था, उन्हें दिया। उन्होंने उसमें से आधा गिलास दूध पिया और आधा मेरी ओर बढाते हुए बोलने लगे, “आज से हर चीज में तुम मेरी साथीदार हो।”

मैंने भी बिना कुछ बोले, बचा हुआ दूध पी लिया और फिर गिलास को टेबल पर रख दिया। तभी शंकर उठकर मेरे पीछे आकर उन्होंने मुझे पीछे से अपनी बाहों में जकड लिया।

उनकी मजबूत पकड अपने चारों तरफ पाकर मुझे अच्छा लग रहा था। यह पहली बार था, जब कोई मर्द मुझे इतने पास से छू रहा हो।

फिर उन्होंने अपने एक हाथ से मेरे सारे बालों को एक तरफ करके मेरे गले पर अपने होंठ रख दिए। उनके होठों का मुझे बहुत ही गर्म अहसास हुआ जिसकी वजह से मैं सिहर गई।

उनका एक हाथ मेरे चेहरे पर घुमा रहे थे, तो दूसरा हाथ मेरी कमर के आसपास घूम रहा था। फिर उन्होंने अपने होंठ मेरे कान के पास लाते हुए मुझसे पूछा, “क्या तुम इसके लिए तैयार हो?”

इतना बोलकर उन्होंने मेरे कान को अपने होठों के बीच दबा लिया। मैंने बहुत ही धीमे स्वर में हां कहा, तो उन्होंने शायद सुना नही। इसलिए वो मुझसे फिर से पूछने लगे, तो मैंने सर हिलाकर अपनी हां उन्हें बता दी।

जैसे ही मैंने हां कर दी, उन्होंने मुझे घुमाकर सीधे अपनी बाहों में भर लिया, और अपने होठों को मेरे होठों पर रखकर चूमने लगे।

यह मेरे जीवन का सबसे पहला चुम्बन था। मैं भी उनका साथ देने लगी, अगले ही पल मुझे मेरे उरोजों पर उनके हाथ महसूस होने लगे। हमारा पहला चुम्बन काफी देर तक चला।

उसके बाद वो मेरे कपडों के ऊपर से ही मेरे उरोजों को अपने हाथों में लेकर मसलने लगे। तो मैंने उनसे कहा, “ऐसे तो कपडे खराब हो जाएंगे, क्यों न हम पहले अपने कपडे उतारकर रख दे। इससे कपडे भी खराब नही होंगे, और दोनों को मजा भी आएगा।”

इस पर वो खुश होकर बोले, “यह तुमने बहुत सही कहा, तो चलो तुम मेरे कपडे उतारो और मैं तुम्हारे कपडे उतारता हूं।”

इतना बोलकर वो मेरी शादी का जोडा निकालने में लग गए। तो मैंने उन्हें पहले अपने आभूषण उतारने को कहा। उन्होंने कुछ ही देर में मेरे सारे आभूषण उतारकर टेबल पर रख दिए।

फिर उन्होंने मुझे एक आईने के सामने खडी कर दिया। वहां वो मेरे पीछे आकर मेरे कपडे उतारने लगे। पहले मेरी साडी का पल्लू उन्होंने नीचे गिरा दिया और मेरे स्तनों को अपने हाथों में लेकर नापने लगे।

उनका इस तरह से मेरे शरीर के साथ छेडछाड करना अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था। उसके बाद उन्होंने मेरी कमर से बाकी बची हुई साडी को भी निकालकर अलग कर दिया।

मैं अब ब्लाउज और पेटीकोट में थी, ब्लाउज डिज़ाइनर था, जो मेरी शादी के दिन मैंने पहना था। शंकर ने फिर मेरा ब्लाउज खोलने की कोशिश की, लेकिन वह बहुत टाइट था, तो मुझे उनकी थोडी सहायता करनी पडी।

मेरे ब्लाउज के खुलते ही उनकी नजर जैसे मेरे स्तनों पर ही जम सी गई। उसके बाद वो आईने में मेरे स्तनों को घूरते हुए, मेरी ब्रा के ऊपर से ही स्तनों पर अपने हाथ फिराने लगे।

अब तक उनका लण्ड भी शायद तन चुका था, क्योंकि मुझे बार बार अपने चूतड़ों पर कुछ चुभ सा रहा था। मैंने उनकी हालत समझते हुए उनसे कहा, “आप भी तो अपने कपडे उतारो, कबसे मेरे ही कपडे उतरते जा रहे है।”

तो उन्होंने कहा, “आप ही इन्हें निकालकर यहां टेबल पर रख दो।”

तो अब मैं उनके कपडे उतारने लगी। उनके कपडेउतारना उतना मुश्किल काम नही था, मुझे बस शर्ट और पैंट उतारनी थी।

मुझे उनकी बेल्ट निकालने में थोडी दिक्कत हुई, लेकिन तुरंत ही उन्होंने मेरी सहायता करके अपनी बेल्ट खुद ही उतार दी। आगे की कहानी अगले भाग में लिखूंगी, तब तक के लिए आपसे विदा लेती हूं।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, हमें कमेंट करके जरूर बताइए। धन्यवाद।

Meri Biwi Ki Gaand Chudai

नमस्कार दोस्तों मैं आशीष आज आप सभी के सामने मेरी और मेरी पत्नी की कहानी लेकर आया हूं। इस कहानी में पढिए, किस तरह मैंने अपनी पत्नी की गांड चुदाई की।

हमारी शादी को चार साल हो चुके थे, लेकिन अब तक मेरी पत्नी ने मुझे उसकी गांड पर हाथ तक फेरने नही दिया था। मैं पहले आप सभी को मेरी पत्नी के बारे में बता देता हूं, मेरी पत्नी का नाम आयशा है।

आयशा का रंग गोरा है, और वो मुझसे दो साल छोटी है। आयशा के चुचियों का साइज ३६ बी है, और उसकी गांड ३६ की है। आयशा की कमर पतली होने के कारण उसकी ३६ की गांड बाहर को उठी हुई लगती है।

जिसे देखकर बार बार मेरा मन मचल जाता है। शादी के बाद मैंने बहुत बार उसे गांड मरवाने के लिए राजी करने की कोशिश की, लेकिन वो कभी नही मानी।

शादी से पहले उसके किसी एक बॉयफ्रेंड ने उसकी गांड चुदाई की थी, उस समय उसे बहुत ज्यादा दर्द हुआ था। इसी वजह से वो गांड चुदाई से अब तक डरती है।

लेकिन मुझे तो उसकी गांड गजब लगती थी, जब भी मैं उसकी गांड देखता मेरा मन करता कि, साली को यहीं पटककर इसकी गांड में बेरहमी से अपना लण्ड घुसा दूं।

मैंने उसे मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो मानती ही नही थी। आखिरकार शादी के बाद, चौथे साल में जाकर उसने मेरी बात मान ली।

कहते है ना, भगवान के घर में देर है, अंधेर नही। अचानक मुझे यह कहावत याद आ गई। मैं बहुत खुश हो गया था। चलो अब मैं सीधे कहानी पर आता हूं।

तो हमारी शादी की तीसरी सालगिरह थी, मैंने उसके लिए एक साडी और डिज़ाइनर ब्रा, पैंटी खरीद कर रखे थे। सालगिरह वाली रात, मैं उसे बाहर खाने के लिए ले गया, वहां हमने केक काटा।

फिर खाना खाकर कुछ रोमांटिक बातें करने के बाद, हम दोनों वहां से खुशी खुशी निकल गए। लेकिन मैं तो आज उसकी गांड मारना चाहता था, मैंने यह सब उसी लिए तो किया था।

घर जाते ही मैंने आयशा की आंखों पर पट्टी बांध दी, और उसे अपने बेडरूम में ले जाकर उसे उसके लिए लाए हुए गिफ्ट्स दिए। फिर अपने कमरे की सारी बत्तियां बुझाकर मैंने धीमी रोशनी वाली बत्ती जला दी।

अब पूरा माहौल रोमांटिक हो चुका था, तो मैंने उसके आंखों से पट्टी को हटा दिया। आयशा यह सब इंतजाम देखकर बहुत खुश हो गई।

सबसे पहले वो मेरी तरफ मुडकर मुझसे बोली, “यह सब तुमने कब किया? मैं तुमसे काफी प्रभावित हो गई।”

मैंने उससे कहा, “तुम बस इस पल का मजा लो।”

फिर उसने गिफ्ट्स देखें, और बहुत खुश हो गई। क्योंकि यह वही साडी थी, जो उसे पिछले साल से चाहिए थी।

सबकुछ देखने के बाद, वो मेरी तरफ बढी, और मुझसे कहा, “आज तुम्हें मुझसे क्या चाहिए? आज तुम जो भी मांगोगे, मैं मना नही करूंगी।”

अब मेरी बारी आ चुकी थी, लेकिन मैंने उससे कहा, “छोडो भी, तुम नही कर पाओगी।”

इतना कहकर मैं बिस्तर पर जाकर बैठ गया। आयशा मेरे पास आकर बैठते हुए बोली, “तुम बताओ तो क्या करना है? मैं आपके लिए इतना तो कर ही सकती हूं।”

तो मैंने उससे कहा दिया कि, “न जाने कबसे मैं तुम्हारी गांड के पीछे पडा हूं, आज मेरी यह ख्वाहिश पूरी कर दो।”

तो उसने थोडी देर सोचकर कहा, “ठीक है, आज तुम्हारी हर एक इच्छा पूरी होगी।”

इतना कहकर वो मैंने गिफ्ट किए हुए ब्रा पैंटी लेकर बाथरूम में घुस गई। आयशा नहाकर बाहर निकली, तो मैं उसे देखता ही रह गया।

आयशा मस्त माल लग रही थी, उसने वही ब्रा पैंटी पहन लिया था, जो मैंने उसे अभी दिया था। उस ब्रा में से उसके आधे चुचे बाहर आने को बेताब थे, और पैंटी बस नाममात्र के लिए उसकी चुत को ढक रही थी।

जैसे ही वो पलटी, उसके दोनों चूतड नंगे मेरे सामने थे। वो मनमोहक अदाकारी दिखाते हुए मेरे पास आई, और मुझे भी फ्रेश होकर आने के लिए कहा।

मैं भी तुरंत बाथरूम में घुसा और नहाकर नग्न अवस्था में ही बाहर आ गया। मेरे नहाकर बाहर आने तक आयशा ने सब इंतजाम कर रखा था।

उसने अपने पास वैसलीन, और दूसरी एक क्रीम भी ले रखी थी, जिससे थोडी चिकनाई बनी रहे। मैंने अपने बदन को पोंछकर फिर उसके पास जाकर बिस्तर पर बैठ गया।

मेरे बैठते ही उसने मेरे सर को पकडते हुए, अपने नशीले होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। अब मैं उसके नशीले होठों को चूम रहा था, और वो मेरे पूरे बदन पर अपने हाथ घुमा रही थी।

मैंने अब आगे बढते हुए उसके चुचियों को ब्रा के ऊपर से ही मसलना शुरू किया। कुछ देर बाद, मैंने उसके दोनों चुचियों को ब्रा कप के ऊपर से निकाल लिया। अब उसकी दोनों चुचियां मेरे मुंह के सामने थी, तो मैं उन्हें अपने मुंह में भरकर चूसने लगा।

आयशा की चुचियां चूसने के साथ ही, मैं उसकी चुत और गांड पर भी हाथ फेर रहा था। मेरे ऐसा करने से वो और भी उत्तेजित हो रही थी। अब मैंने उसकी ब्रा के हूक खोलते हुए उसको ब्रा से आजाद कर दिया।

ब्रा निकालने के बाद, मैं उसकी पैंटी की तरफ बढा। मैं नीचे की ओर बढते ही, आयशा उल्टी होकर लेट गई। जिससे उसकी गांड अब ऊपर की तरफ हो गई, और मेरे सामने अब उसके गोरे चूतड थे।

मैंने उसके दोनों चूतडों को चूमते हुए उसकी पैंटी को धीरे से नीचे की ओर खिसकाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में मैंने उसकी पैंटी निकालकर आयशा को भी पूरी तरह से नंगी कर दिया।

मैंने फिर उसके चूतड़ों को सहलाते हुए उसकी गांड में एक उंगली डालने की कोशिश की, लेकिन गांड बहुत ही टाइट थी। आयशा ने तुरंत ही वैसलीन को मेरी तरफ बढा दिया।

मैंने अब वो क्रीम अपने हाथ पर लेकर एक उंगली से उसे आयशा की गांड के छेद के आसपास लगाने लगा। धीरे धीरे करके मैंने आयशा की गेंद के छेद में एक उंगली घुसाकर अब अंदर की ओर से, क्रीम लगाने लगा।

थोडी देर में अब उसकी गांड का छेद पूरी तरह से चिकना हो चुका था। तो अब मैंने उसके हाथ में क्रीम देकर उसे अपने लण्ड पर लगाने के लिए कहा। मेरे कहे अनुसार आयशा ने मेरे पूरे लण्ड को क्रीम में भिगो दिया।

उसके बाद मैंने एक बार उसके होठों को चूमते हुए, उसे बिस्तर पर उल्टी करके लिटा दिया। फिर आयशा की कमर के नीचे मैंने एक तकिया रखा, जिस वजह से उसकी गांड थोडी ऊपर को उठ आई।

अब आयशा की गांड का छेद पूरी तरह खुलकर मेरे सामने था। ऊपर से तो उसकी गांड का छेद पूरी तरह गुलाबी लग रहा था, मैंने उसके चूतड़ों को चूमते हुए उसकी गांड के छेद पर अपना लण्ड रख दिया।

मैंने बिना धक्का मारे, सिर्फ दबाव डालकर अपना लण्ड अंदर घुसेडने की कोशिश की, लेकिन लण्ड फिसलकर बाहर निकल आया।

तो मैंने आयशा से कह दिया, “थोडा दर्द सहन कर लेना, मैं आराम से ही लण्ड डाल रहा हूं।”

इतना कहकर मैंने अपने लण्ड को सेट किया और एक जोरदार धक्के के साथ मेरे लण्ड का टोपा उसकी गांड में घुस गया। जैसे ही टोपा अंदर घुसा, आयशा अपने पैर पटकने लगी, उसे बहुत दर्द हो रहा था।

लेकिन मैंने अपनी पकड उसपर बनाए रखी, तो वो मेरी पकड से खुद को छुडा नही पाई। फिर मैंने धीरे धीरे करके अपना पूरा लण्ड उसकी गांड में उतार दिया।

अब भी आयशा को दर्द हो रहा था, लेकिन मुझ पर तो उसकी गांड मारने का बहुत सवार था। मैं उसके दर्द की परवाह किए बिना उसकी गांड मारता रहा।

उसकी गांड कसी हुई होने के कारण मैं अधिक देर तक अपने आप को रोक नही पाया, और जल्द ही झड गया। मैंने अपना सारा वीर्य उसकी गांड में ही छोड दिया, जो कुछ देर में उसकी टांगों से होकर नीचे बहने लगा था।

तो दोस्तों यह थी मेरी बीवी की गांड चुदाई की कहानी। आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी, हमें लिखकर जरूर बताइए। धन्यवाद।

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